रामू की शक्ति
रामू की शक्ति
रामू की शक्ति
जंगल के सभी जानवर एक समस्या से परेशान थे—रामू भालू के खर्राटों की गूंज! यह कोई मामूली खर्राटे नहीं थे, बल्कि जंगल का प्राकृतिक भूकंप अलार्म!
रात होते ही शेरसिंह अपनी महल की छत पर करवटें बदलता, हाथी हरिराम अपने कानों में पत्ते ठूंसता, और उल्लू दादा, जो खुद रात में जागते थे, अपनी आंखों पर पट्टी बाँधकर "शांति मंत्र" दोहराते—पर कोई फायदा नहीं!
एक दिन शेरसिंह ने दरबार बुलाया। सभी जानवर उपस्थित हुए—बंदर बल्लू, चालाक लोमड़ी सुनयना, उल्लू दादा, और गिरगिट गगन।
"यह कोई आम समस्या नहीं, यह जंगल संकट है!"शेरसिंह गरजे।
उल्लू दादा ने सुझाव दिया, "रामू को उल्टा लटका दो, ताकत ऊपर निकल जाएगी!"
बंदर बल्लू ने मस्ती में कहा, "हेडफोन पहना दो, उसकी ही आवाज उसे वापस सुनाई देगी!"
लोमड़ी सुनयना ने गंभीर होकर कहा, "उसे गुफा में अकेले सुला दो, बाकी जंगल चैन से सोएगा!"
शेरसिंह को यह समाधान सही लगा। उसी रात रामू को जंगल की सबसे शांत गुफा में भेज दिया गया।
लेकिन सुबह जंगल में हड़कंप मच गया—"बचाओ! नागों का हमला!"
सभी जानवर भागे-भागे वहाँ पहुँचे, और देखा कि गुफा में नागों की सभा थी! रामू के महाशक्तिशाली खर्राटों ने ऐसी खलबली मचाई कि नाग-नागिनें फुफकारना ही भूल गईं!
उल्लू दादा अपनी चोंच में हँसी दबाते बोले, "रामू की शक्ति इतनी अद्भुत है कि नागों को भी मात दे सकती है!"
शर्मिंदा शेरसिंह ने तुरंत रामू के लिए विशेष झूला बनवाया, जो हवा में झूलता रहे ताकि उसके खर्राटों की शक्ति जंगल में संगीत की तरह गूंजे।
उस रात जंगल में पहली बार संगीतमय नींद आई—रामू की शक्ति अब जंगल का आधिकारिक लोरी बन गई!
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सीख:
हर समस्या का हल गुस्से में नहीं, समझदारी से होता है। और अगर कोई खर्राटे मारता है—तो उसे झूला दो, गुफा नहीं!
