प्यार की कोई उम्र नहीं •••
प्यार की कोई उम्र नहीं •••
आज सुबह-सुबह जैसे खिड़की के पर्दे के पीछे से रोशनी पड़ने लगी तो घनश्याम जी की नींद खुली तो देखा कि कितनी देर हो गई।आज सुरज की किरणें ही बता रही थी कि साढ़े सात बज गए होंगे।तब उन्हें लगा कि आज रुटीन गड़बड़ा जायेगा। रेनू को दवाई ठीक समय पर देनी है । सुबह - सुबह अब तो अखबार पढ़ने का भी समय नहीं बचा। उन्होंने फटाफट फ्रेश होकर चाय बनाई फिर श्रीमती को जगाया, और उन्हें मुंह धुलाया। और उन्हें चाय बिस्किट खिलाई । फिर स्वयं भी चाय बिस्किट ली। थोड़ी देर बाद दवाई देकर दुबारा उन्हें लिटा दिया।
रेनू को पैरालिसिस अटैक हो गया था तब से न वो अपने आप उठ पाती थी,न ही बैठ पाती थी,न ही कुछ अपना काम कर पाती।अब उनकी जिंदगी उन्हें एक बोझ समान लगती थी। उन्हें हमेशा लगता कि भगवान उठा ले।उनकी सुन ले••• हमेशा ही पति से कहती कि मैं आप पर बोझ बन गई हूं।पर वो कहते कि पागल है क्या? जो ऐसी बातें बोले जा रही है। अगर मैं तुम्हारी जगह होता तो क्या तुम देखभाल नहीं करती।इस तरह घनश्याम जी उन्हें चुप करा देते थे।
उनके दोनों लड़कियों की शादी हो चुकी थी। घनश्याम जी एक शिक्षक थे।वो भी रिटायर हो चुके थे। उनकी दिनचर्या यही थी। कि वह रेनू का पूरा ध्यान रखते ।काम वाली आती वो दोनों टाइम का खाना बना कर चली जाती..
इस तरह एक्स्ट्रा काम के लिए भी एक बाई भी रखी थी जो ग्यारह से सात बजे तक रहती।सब उठा धरी वाले काम के साथ रेनू जी का ध्यान रखती।इस तरह दोनों बुजुर्ग की दिनचर्या चल रही थी।पर घनश्याम जी अपनी पत्नी के साथ खुश थे। उन्हें लगता था कि अगर रेनू जी अगर न रही तो उनका क्या होगा? उनके बिना क्या करेंगे किससे मन की बातें करेंगे?
अब उन्होंने सोचा कि चलो पेपर देखा जाए।आज तो उन्हें वैलेंटाइन डे के किस्से कहानियों से भरा पेज भी दिखाई दिया। तब उन्हें लगा कि पुरानी यादें ताजा की जाए। उन्होंने बड़े ही प्यार से पलंग से उन्हें उठाकर टिकाया। तब रेनू ने कहा - "अजी आज आपके मिजाज बड़े बदले - बदले लग रहे हैं।आज कुछ खास है क्या ?"
" कुछ नहीं रेनू जी , मैंने सोचा कि आपको आज अच्छे से तैयार कर दूं।"
बड़े ही प्यार से एक बिंदी लगाई और मांग भी भरी।तब वो बला की खूबसूरत लग रही थी।और उन्होंने एक छत के गमले से गुलाब का फूल तोड़ कर भी दे दिया।
तब रेनू बहुत खुश होकर बोली - "अच्छा जी आज वेलेंटाइन डे है।इस उम्र में भी क्या सूझ रही है।हम तो बूढ़े हो चले हैं।इसकी भी आपको क्या सूझी! सही है आप हमारे साथ ही खुशी ढूंढ ही लेते हैं।"
फिर घनश्याम जी कहने लगे-"हम आपकी खूबसूरती के दीवाने थे, दीवाने ही रहेंगे।अरे आप तो इतनी खूबसूरत होने के साथ मन से भी खुबसूरत है।तो हमें कैसे प्यार न होता ! हमें तो प्यार हो गया। जब हम एक-दूसरे को प्यार करते हैं ,उसे जताना भी चाहिए। प्यार तो ताजगी का एहसास ही कराता है,। जिंदगी का क्या है ,एक ही दिनचर्या में क्या रखा है। जीवन में नयापन भी होना चाहिए। "
फिर वो मुस्कुरा पड़ी।
दोस्तों - प्यार एक एहसास ही होता है जो नीरस जिंदगी में भी नया रंग भर देता है। यह केवल दिखावा ही नहीं होता हैं ,बल्कि इस तरह के बदलाव से जीवन में एक-दूसरे के प्रति प्यार बढ़ जाता है।
दोस्तों -बुढापे में प्यार दर्शाना भी सकारात्मक सोच होती है।यदि जीवन के प्रति उदासीनता रहेगी तो हम अंदर से खुश नहीं रह सकतें हैं। एक दूसरे से दो मीठे बोल और कुछ अलग करें तो भी जिंदगी किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं होती हैं।अगर आप सब मेरे विचार से सहमत हो तो अपनी प्रतिक्रिया भी व्यक्त करें। और बताए कि बुढ़ापे में कैसे एक दूसरे का सहारा बन सकते हैं। और प्यार दर्शा सकते हैं।

