पूनम की रात
पूनम की रात
बात उन दिनों की है जब शाम होते ही सुंदरवन से थोड़ी दूरी पर एक कस्बे में
सन्नाटा हो जाया करता था।यूं तो हादसा शरद पूर्णिमा की रात को ही होता था, किंतु दहशत तो हर दिन ही थी।
सुंदरवन में एक महल था, वहाँ हज़ारों लाखों की संख्या में पंछी बसते थे।इतने पंछी की अकेले जाने से पहले सोचना हो।
हर पूनम की रात, रात बारह बजे जब सियार आवाजें लगाता, ये पंछी आसमान में उड़ने लगते और जिस घर या क्षेत्र में ये पंछी जा बैठते, वहाँ से सुबह अनहोनी घटना ही हाथ आए।
कहीं जानवरों का गायब हो जाना, कहीं शिशुओं का।कुछ समझ ही नहीं आता था, हो क्या रहा है।
उसी कस्बे में एक व्यक्ति रहता था, जिसे मायावी विद्या का ज्ञान था, और सब उसे बाबा कहते थे।उसने निर्णय लिया कि वो महल जाएगा और सभी रहस्य पता करेगा।
बाबा के महल में प्रवेश करते ही, उसे दीवारों में कैद सभी कहानियां दिखने लगी और एक आत्मा जो उस महल में कैद में है, वो भी दिखा।उसने उसकी मुक्ति के बारे में पूछा, आत्मा ने बताया , यदि पूनम की रात महल की छत पर उगे सफेद फूल लाकर नीचे सरोवर में प्रवाहित कर दो, जब इसमें पूरा चाँद का प्रतिबिम्ब आए, मैं मुक्त हो जाऊंगा।बाबा ने ऐसा ही किया, और वो मुक्त हो गया।इसके पश्चात वहाँ कोई भी अनहोनी घटना नहीं घटी।सब खुशी से रहने लगे। बाबा और सबके प्रिय हो गये।
