Laxmi Dixit

Inspirational


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Laxmi Dixit

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प्रिय डायरी मौका

प्रिय डायरी मौका

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जीवन में हमें अपनी महत्वाकांक्षाओं ,अपने सपनों को पूरा करने के अनेक अवसर मिलते हैं। लेकिन हम एक बार नहीं बार-बार उन मौकों को इसलिए जाने देते हैं कि आगे इससे भी कोई अधिक अच्छा और बेहतर अवसर हमारा इंतजार कर रहा होगा, जो हमें हमारे सपनों को साकार करने की दिशा में कम परिश्रम करते हुए आगे लेकर जाएगा। लेकिन ऐसा होता नहीं है।

जिन अवसरों को हम आज जाने देते हैं क्योंकि वर्तमान में अवसरों के साथ खड़ी परेशानियां हमें बड़ी लगती हैं। हमें लगता है इस अवसर के बाद वाला अवसर अधिक अच्छा होगा, उसके साथ परेशानियां नहीं होगीं और हम आसानी से अपना सपना पूरा कर सकेंगे । लेकिन वक्त धीरे-धीरे रेत की तरह हमारी मुट्ठी से निकलता जाता है। आगे आने वाला अवसर और अधिक चुनौतियां लेकर आता है और इस बार भी हम यही सोचते हैं कि इसके आगे जो अवसर आएगा वह इससे बेहतर और कम चुनौतियों से घिरा हुआ होगा।

 यही सोचते-सोचते समय निकल जाता है जीवन और भी सख्त हो जाता है। हमारे अंदर की प्रतिभा कहीं खोने लगती है। क्योंकि हमने अपने समय और ऊर्जा दोनों किसी अच्छे मौके की तलाश में लगा दिया

हम यह नहीं सोचते कि इन मौकों के निकलने के बाद हमें वो परेशानियां याद नहीं रहेगीं जो इन मौकों के साथ आईं वरण् तब हमें यह गिलानी होगी कि हमारे सामने कितने अवसर आए और हमने उनको यूं ही जाने दिया।

 ऐसा क्यों होता है कि हम मौकों को जाने देते हैैैं। क्या हममें अक़ल नही होती?

 नहीं, एेसा नही है कि हममें बुद्धि की कमी होती है बल्कि होता यह है कि जब ये मौके आते हैं तब हमें अपनी आयु के अनुसार अक़ल तो होती है लेकिन हम यह नहीं समझ पाते कि आयु के बढ़ने के साथ जीवन की जटिलताएं भी बढ़ेगीं और जब हम इस आयु में पहुंचेंगे तो बीते हुए कल की परेशानियां हमें कम लगेंगी । किसी भी अवसर को सफलता में बदलने के लिए व्यक्ति के अंदर जुनून होना चाहिए। बिना जुनून के किसी भी मौके को सफलता में परिवर्तित करना असंभव है ।

तो फिर हमें क्या करना चाहिए ? आज जो मौका हमारे सामने हैं उसे ना जाने दीजिए क्योंकि भविष्य में हमें वर्तमान की परिस्थितियां याद नहीं रहेंगी। याद रहेगा तो बस वह मौका जो हमने जाने दिया और तब हमारा मन विषाद और आत्मग्लानि से भर उठेगा।

आज जब वैश्विक महामारी काेरोना के कारण पिछले 40 दिनों से देश में लॉकडाउन है तो मन अतीत के श्याम पन्नों को अनायास ही पलटने लगता है और बार-बार यही सोच रहा है कि अतीत में ऐसे कितने अवसर आए जिनको मैंने यूं ही जाने दिया।


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