Laxmi Dixit

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प्रिय डायरी बदलाव की आदत

प्रिय डायरी बदलाव की आदत

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 कहते हैं वक्त रहते अगर हम अपनी आदत नहीं बदलते तो आदत ही हमें बदल देती है ।सफाई के मामले में दुनिया में तीन तरह के लोग होते हैं । पहले, वह जो साफ- सफाई के प्रति बहुत जागरूक होते हैं। यह स्वयं की और अपने आसपास की चीजों की स्वच्छता के लिए बेहद संवेदनशील होते हैं । दूसरे, जो स्वयं की स्वच्छता में तो रुचि रखते हैं लेकिन अपने आसपास की सफाई में अपना कोई दायित्व नहीं निभाते। और तीसरे, वे लोग जो ना तो अपनी और ना आसपास की सफाई से कोई सरोकार रखते है।

वैश्विक महामारी कोरोना का यह कालखंड एक ऐसा टर्निंग प्वाइंट साबित होगा जहां से हमें अपनी बहुत से आदतों को बदलना होगा ।इस टर्निंग प्वाइंट के उस तरफ तीसरी तरह की आदत वाले लोगों का वर्ग अपना अस्तित्व खो देगा और दूसरा वर्ग पहले वर्ग के समकक्ष बनने का प्रयास करेगा।

अब हमें सोशल डिस्टेसिंग के साथ-साथ सोशल हाईजीन को भी अपनी दिनचर्या में शुमार करना होगा । प्रायः यह देखा जाता है कि हम लोग अपनी सफाई तो स्वयं कर लेते हैं लेकिन रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल में आने वाली चीजों की सफाई के लिए घर में ,परिवार के अन्य सदस्य या फिर नौकरों पर निर्भर रहते हैं ।वही कार्यालय में तो टेबल, कुर्सी, कंप्यूटर, लैपटॉप की सफाई पियून ही करता है। लेकिन अब हमें पैसों के साथ- साथ सफाई के लिए भी स्वावलंबी बनना होगा। यह हमें वायरस के संक्रमण से तो सुरक्षित रखेगा ही ,हमें आलस्य को छोड़कर चुस्त-दुरुस्त रखने में भी प्रेरित करेगा ।वर्क फ्रॉम होम का वर्क करते -करते कहीं हम अपने हाथ पैर चलाना ही ना छोड़ दें।इसलिए हमे साफ -सफाई के बहाने अपने आपको ,अपने शरीर को एक्टिव रखने की जरूरत होगी। और तो और ,अब हम अपने साथ-साथ अपने यहां काम करने वाले कर्मियों को भी स्वयं की साफ- सफाई रखने के लिए प्रेरित करेंगे । कोरोना महामारी का प्रसार ,ना केवल हमारे ,बल्कि पूरे समुदाय के साफ - सफाई के प्रति जागरूक होना और क्रियान्वित होने पर रुकेगा।

कोरोना महामारी के चलते हमारे देश में पहली बार सार्वजनिक स्थानों पर थूकने पर हरजाने का प्रावधान बना है । हालांकि विदेशों में सार्वजनिक स्थानों पर थूकना पहले से ही दंडनीय अपराध है लेकिन हमारे देश में इस आदत को मनुष्य की प्रवृत्ति मानकर आया -गया कर दिया जाता था। हो सकता है अब हम लोग किसी को थूकते देखें तो सतर्क हो जाएं और उस व्यक्ति से दूरी बना लें। जिससे अगला व्यक्ति अपमानित महसूस करें और थूकने की प्रवृत्ति से तौबा कर ले। यह प्रक्रिया जब हमारे साथ अन्य लोग करेंगे तो हम सार्वजनिक स्थानों पर थूकने की आदत से बचने का प्रयास करेंगे।

दुनिया में फुटबॉल के बाद दूसरा सबसे लोकप्रिय खेल क्रिकेट है ।बेड- बल्ले के इस खेल में विकेटकीपर को छोड़कर जिस भी खिलाड़ी के हाथ में बॉल आती है वह दूसरे खिलाड़ी को बॉल पास करने से पहले थूक अवश्य लगाता है। वर्तमान समय में तो वैश्विक महामारी कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए क्रिकेट सहित सभी खेलों पर विराम लगा हुआ है । लेकिन विराम को हटाने के साथ-साथ क्या हमें वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए गेंद पर थूक लगाने की आदत को बदलने के लिए विचार नहीं करना चाहिए।

 फंडा यह है कि जहां कोरोना वायरस से बचाव के लिए हमारे भीतर हर्ड इम्यूनिटी का विकास होना जरूरी हो गया है वही हमारे लौकिक शिष्टाचार में कुछ आदतों का बदलाव भी आवश्यक हो गया है।


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