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बेज़ुबानशायर 143

Romance

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बेज़ुबानशायर 143

Romance

प्रेम

प्रेम

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प्रेम बना रहे हमारे बीच

ये प्रार्थना नहीं विश्वास बन रहा है


इस दौर की मोहब्बत में,,

तेरा नेक दिल मेरी प्यास बन रहा है


" हमेशा हमारे बीच मे दो अंगुल की दूरी रहेगी 

इस दूरी में जो सिमटा हुआ इश्क़ का सारा रंग है"


तेरा यह कहना मुझसे हर अपनी बात में , 

तेरी और थोड़ा थोड़ा रोज दरकने की...


मेरी जीने की आस बन रहा है,,

मेरी अरदास बन रहा है 


मानो तुम्हारे प्रेम मे ही

सारे जग से लड़ जाने को जी चाहे 


दो दिलो को मिलने से नही रोक सकी 

चाहे कुछ भी हो जाये ....


तुम्हारे बिना जीना मुश्किल बहुत है 

एक एक पल भी दुशवार सा लगता है .....मेरी जान 


तुम तो मुझसे कोषों दूर हो पर भी 

मेरी दुआ तो यही है की तुम खुश रहो हमेशा .....मेरी जान।



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