पराक्रमी हो, तो अन्याय न हो।
पराक्रमी हो, तो अन्याय न हो।
कनु एक बहुत पराक्रमी राजा था। उसकी रानी का नाम तमु था। वो उससे बेहद प्यार करता था। राजा के प्रति प्रजा की बहुत आस्था थी। राजा भी अन्याय को सहन नहीं करता था। एक बार राजा कहीं शिकार पर जाता है। और साथ में उसके उसकी रानी तमु भी होती है। अचानक कुछ डाकु राजा पे हमला कर देते हैं। और वो राजा की रानी का अपहरण कर लेते हैं। राजा वहां मूर्छित हो जाता है। डाकू राजा को ऐसे ही छोड़कर भाग जाते हैं। काफी समय हो जाता है। जब राजा राजमहल वापिस नहीं लौटता। तो उसके सैनिक उसकी तलाश शुरू कर देते हैं। आखिर ढूंढ़ते ढूंढ़ते वो राजा के पास पहुंच जाते हैं। राजा को मूर्छित देख कुछ सैनिक राजा को लेकर वापिस राजमहल लौट जाते हैं। और कुछ रानी तमु की तलाश शुरू कर देते हैं। राजमहल में कुछ दिनों के उपचार के बाद राजा ठीक हो जाता है। तो वो अपने मंत्री से रानी तमु के बारे में पुछता है। तो मंत्री उसे बताता है। कि जिस हादसे में आप मूर्छित हुए थे। उसी में वो डाकू रानी तमु को उठाकर ले गये हैं। तो राजा मंत्री पर बहुत बिगड़ता है। और बोलता है। कि हमारी सेना क्या इतनी नापुंसक है। कि अपने साम्राज्य की रानी को भी नहीं बचा सकती। तो मंत्री बताता है। कि महाराज के आदेश का इंतजार कर रहे थे। राजा कनु तुरंत डाकुओं के ठिकाने पर अपने लक्शर के साथ आक्रमण करता है। और डाकू मारा जाता है। राजा कनु रानी तमु को लेकर वापिस राजमहल आ जाता है। दोनों फिर से प्यार से रहना शुरू कर देते हैं। आखिर रानी तमु कुछ समय बाद गर्भवती हो जाती है। एक दिन राजा रात को भेष बदलकर अपने राजधानी में घूम रहा होता है। वो एक मयखाने में चला जाता है। वहां एक व्यक्ति बहुत अधिक मदिरा पी चुका होता है। वो उस राजा के पास आकर बैठ जाता है। और नशे में बोलता है। हमारा राजा कनु अपने आपको बहुत आदर्शों वाला समझता है। मालूम है रानी को एक डाकू उठाकर ले गया था। उसने रानी को अपने पास रखा। और राजा की मूर्खता देखो। उसने उस रानी को फिर से अपना लिया। जो किसी गैर मर्द के पास रहकर आई। तभी कुछ लोग उस व्यक्ति की पिटाई कर देते हैं। और बोलते हैं। हमारे राजा जैसा चरित्र वाला व्यक्ति इस ब्रह्माण्ड में नहीं है। ये देख वो व्यक्ति वहां से जान बचाकर भाग जाता है। राजा कनु मायूस हो जाता है। और चुपचाप वापिस राजमहल लौट आता है। सारी रात उसको नींद नहीं आती। रानी तमु राजा को परेशान देख बहुत विचलित होती है। और मंत्रीजी को बताती है। तुरंत सारी मंत्री परिषद की बैठक बुलाई जाती है। और राजा स्वयं इसकी अध्यक्षता करता है। सारा मामला मंत्री परिषद के सामने रखा जाता है। मंत्री परिषद उस व्यक्ति की गिरफ्तारी का हुक्म देती है। उसे गिरफ्तार करके मंत्री परिषद के सामने लाया जाता है। मंत्री उसपे आरोप पत्र दाखिल करता है। वो व्यक्ति राजा से गिड़गिड़ा कर माफी मांगता है। और बोलता है। कि आगे से वो मदिरा का सेवन कभी नहीं करेगा। ये सब जो भी अनाप-शनाप बोला गया। ये सब नशे की बदौलत हुआ।
