Sangita Tripathi

Inspirational


4.0  

Sangita Tripathi

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#फ्री इंडिया #सोचो इंडियन

#फ्री इंडिया #सोचो इंडियन

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           हमारा देश स्वतंत्र हुए बहुत समय बीत गया....हम अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त हो गए। हमारा देश हमारा हो गया, भारतीय संस्कृति फिर जी उठी,देश स्वतंत्र होने के पीछे बहुत से लोगों को बलिदान देना पड़ा,।ना जाने कितने माँ के लाल शहीद हो गए.... वो लोग थे जो हँसते हुए फांसी पर चढ़ गए..। ना जाने कितने सिंदूर पूछ गए... ना जाने कितनी बहनो की राखी इंतजार ही करती रह गई .. .. पर क्या सच में हम आजाद हो गए। क्या स्वतंत्र देश में सबको आजादी मिली हैं... क्या स्वतंत्र देश की यहीं तस्वीर शहीदों ने देखी थी... 


              मौजूदा हालत देख शायद उनकी आत्मा भी रो पड़ती होंगी। क्या ऐसे ही स्वतंत्र देश की परिकल्पना उन्होने की, जहाँ आज भी लड़कियां या महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। अंग्रेज तो चले गए...पर हम उनकी मानसिक गुलामी से आज तक स्वतंत्र नहीं हुए।.. अंग्रेजी जानना नितांत आवश्यक हो गया। क्योंकि तभी आप पढ़े -लिखे की श्रेणी में आप आएंगे.... अरे भाई आपको अपनी मातृभाषा आती हैं ना... फिर क्यों नहीं उसी भाषा में बात करते.....। 

                  असल में हम कुछ उनकी संस्कृति से, और कुछ अपनी कुंठाओं से नई रीत बना ली। उनके यहाँ तो फिर भी महिलाओं का सम्मान हैं, पर हमारे यहाँ तो आज भी महिलाएं अपने अस्तित्व की जंग लड़ रही... विदेशी संस्कृति तो हम अपना रहे, पर मानसिक तौर पर नहीं। लड़कियां शॉर्ट्स या जीन्स पहन रही, पर सोच हमारी संकीर्ण ही हैं.। पहनावे में तो हमारी सोच खुली हैं पर काश मानसिक सोच भी सोच खुलती.... 


             जिस दिन हमारे देश में लड़कियां या महिलाएं अपने को सुरक्षित महसूस करेंगी उसी दिन देश स्वतंत्र माना जाएगा, जिस दिन कन्या भ्रूण की हत्या बन्द होंगी उस दिन देश स्वतंत्र माना जाएगा , जिस दिन पुरुष महिला को इज़्ज़त देना सीख लेगा, उस दिन देश स्वतंत्र माना जाएगा.... जिस दिन हम विदेशी संस्कृति के बजाय अपनी संस्कृति का महत्व समझेंगे उस दिन देश स्वतंत्र माना जाएगा ..... 


             आज विदेशी भी भारतीय संस्कृति को मान रहे.... पुरी मैं मैंने कई विदेशी को साड़ी पहन कर काम करते देखा... पुरुष धोती कुरता पहन सिर पर लम्बी छोटी धारण किये... फख्र से सड़को पर घूम रहे.... हमें तो गर्व होना चाहिए अपनी संस्कृति पर...... पुरानी रूढ़ियो को तोड़ने का समय आ गया... अपने संस्कारों को इज़्ज़त दे.... रिश्तों को इज़्ज़त दे.। तभी हम आगे बढ़ पाएंगे... नारी को अबला मत बनाओ उसे सबला बना कर आगे बढ़ाओ। तभी घर परिवार आगे बढेगा। जब घर परिवार आगे बढेगा तो समाज आगे बढेगा। समाज से देश आगे बढेगा... एक दिये से दूसरा दिया जलाओ कई दिये जल जायेंगे ... 


             हमारा देश पूर्णतया स्वतंत्र होगा जब हम इसकी कुरीतियों को दूर कर पाएंगे... खुशहाल परिवार समाज का कवच हैं जो समाज को मजबूत बनाता हैं.... अशिक्षा, गरीबी, बेईमानी आदि हमारे समाज को पंगु बनाते हैं..इन्हे दूर कर ही हम देश को आगे ले जा सकते हैं.... सुधार घर से ही शुरू होता हैं..... सोचो इंडियन तभी तो नया पाओगे इंडिया.......



           


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