फोकस
फोकस
जीवन में मैंने एक ही बात सीखी है.
वह है उम्र कुछ भी हो सीखना कभी बंद मत करना.
याद रहे उम्र किसी के लिए भी एक संख्या मात्र से बढ़कर कुछ भी नहीं है.
पुष्पा ने पूछा आज अकेले अकेले क्या बड़बड़ा रहे हो.
मैंने कहा पुष्पा कल मैं रहूँ या ना रहूँ अपने जीवन में एक गिठ बांध लेना.
जब तक मृत्यु लोक में रहेंगे तब तक सीखना बंद नहीं करेंगे.
पुष्पा ने कहा जब दो वक्त की रोटी चल रही है. तो अब सीखने की क्या जरुरत है.
मैंने कहा पुष्पा बहस का कोई अंत नहीं होता.
हाँ मेरा मानना है जब तक इंसान सीखता है. तब तक वह बूढ़ा नहीं होगा.
*मैंने कहा पुष्पा मैंने bruclee से एक बात सीखी है*
जो भी काम आप करो बहुत ही समझदारी से करो.
आपका पूरा ध्यान अपने उस काम पर इस तरह केंद्रित रहना चाहिए.
जैसे अर्जुन को मछली की आँख के सिवाय कुछ नजर नहीं आ रहा था.
क्या आप जानती हो bruclee की आँखें कमजोर थी.
पुष्पा ने कहा हाँ मैंने कही पढ़ा था bruclee अपने दुश्मन के दांत खट्टे बड़े ही करीब से करता था.
यही एक वजह थी जिससे यह साबित होता है. Bruclee की आँखे कमजोर थी.
मैंने कहा पुष्पा आप ही बताओ bruclee से और क्या सीखा जा सकता है.
पुष्पा ने कहा bruclee कोई अध्यापक नहीं था.
Bruclee कोई प्रोफेसर नहीं था.
बावजूद इसके मैंने यह भी सीखा अपना काम बड़ी शिद्दत से करो.
अपने काम के प्रति ईमानदार रहो.
अपने लक्ष्य के प्रति बागुले की भाँति ध्यान केंद्रित रखो.
कभी भी अपने लक्ष्य के लिए आलसी मत बनो.
ध्यान रहे कौआ कभी भी आलस नहीं करता.
वह अकेला ही अपना भोजन एकत्रित करता है.
ठीक उसी प्रकार जैसे bruclee कई दुश्मनों पर अकेला ही भारी पड़ता था.
Bruclee की एक और विशेषता यह थी.
वह अपने दुश्मन की अच्छी तकनीक की तारीफ़ किए बिना नहीं रहता था.
Bruclee ना केवल अपने दुश्मन की तकनीक की तारीफ करता था.
अपितु वह तकनीक उनसे अपने को और बेहतर बनाने के लिए सीखता था.
पुष्पा ने कहा सीखना ही ज्ञान है.
सीखना ही अपने को अपने क्षेत्र में पारंगत करना है.
सीखने से कभी भी इंकार नहीं करना चाहिए.
सीखना ही एक महत्वपूर्ण हथौड़ा है. सीखना ही एक महत्वपूर्ण कसौटी है.
जो लोहे को औजार बना देती है और सोने को आभूषण.
सीखना जीवन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है.
मैंने कहा पुष्पा तुमने bruclee से और क्या सीखा.
पुष्पा ने कहा जैसे एक ग्रहणी रोटी बनाते समय पेंदी बनाती है. उसी समय पर तवे पे रखी रोटी पर भी नजर रखती है. इसके साथ साथ रोटी बेलने पर उसकी पैनी नजर रहती है.
ठीक उसी प्रकार bruclee की पैनी नजर दुश्मन से लड़ते समय सिर्फ लड़ाई पर ही नहीं.
अपितु नय नय दाँव पेच सीखने पर भी रहती है.
वास्तव में bruclee अपने काम के प्रति बहुत फोकस रखता था.
उसमे बाज की पैनी नजर थी. वह चीते से भी फुर्तीला था. वह एक सेंकेंड में दस घुसे मार देता था.
पुष्पा ने कहा अर्जुन के बाद bruclee ही एक ऐसा figter था.
जो अपने दुश्मन के प्रति अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहता था.
Bruclee के जीवन से आज के बच्चे भी सीख कर अपना जीवन सुनहरा बना सकते है.
Bruclee में डर नाम की कोई चीज नहीं थी.
वह बेखौफ लड़ा वह जानता था. यदि जीतना है तो अपने काम के प्रति focus रखना बहुत जरुरी है.
इतिश्री
