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Rashmi Sthapak

Inspirational

4  

Rashmi Sthapak

Inspirational

फ़ैसला

फ़ैसला

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"हाँ बेटा.... अब बोलो क्या बोलना चाहते थे तुम दोनों.... ?" निशा ने ड्राइंग रूम में अपने बेटा-बहू के सामने बैठते हुए पूछा।

"हम दोनों नहीं माँ, केवल मैं आप लोगों के सामने बात करना चाहती हूँ।" बहू काजल कुछ दुखी स्वर में बोली।

.... पहले भी माँ मैंने आपको बताया... राज को कई मौके भी दे चुकी हूँ... दोनों बच्चे भी अब समझने लगे हैं.... लेकिन इनका ऑफिस वाला वह प्रेम रुकने का नाम ही नहीं लेता।"

निशा जो कि कॉलेज में प्रिंसिपल है, कई दिनों से कुछ गड़बड़ महसूस तो कर रही थी... पर बहू इतना खुलकर बोलेगी और उससे भी बड़ी बात की बेटा उसका विरोध भी नहीं कर रहा....उसने इसकी कभी कल्पना भी नही की थी।क्या बहू सच तो नहीं बोल रही माँ सशंकित हो गई।

"पिछले तीन बार से जब-जब भी ये आफिस के टूर बताकर एक-एक सप्ताह बाहर रहे तब भी ये उसी के साथ थे .....क्योकि मैने पता किया उस समय आफिस का कोई टूर था ही नही।" कहते कहते काजल की बड़ी-बड़ी आंखों में आँसुओं की धारा बह चली।

".... और अब तो गज़ब ही हो गया है माँ मेरी सोने की चूड़ियाँ भी उसे ही दे आए... यह मुझे आज ही पता चला...।"

"राज बेटा, बहू इस तरह से रो रही है... और तू चुप बैठा है.... बात क्या है? तू चूड़ियाँ दे आया?" शंकित दृष्टि से देखते हुए माँ ने पूछा।

"काजल सच कह रही है माँ....मै अपनी कलीग से ही प्यार करता हूँ और बहुत प्यार करता हूँ...मै खुद भी अब घर में बात करना चाहता था... और चूड़ियाँ क्या मैं तो उसके लिए अपनी जान भी दे सकता हूँ।" अब बात जब सामने आ गई तो राज के मन में लिहाज़ भी खत्म हो चुका था।काजल की सिसकियाँ तेज हो गई थी।

माँ के भी होश उड़ गए थे।

"माँ मुझे भी रोज-रोज की चिख-चिख पसंद नहीं है जबसे मेरी कलीग यहाँ ट्रांसफर होकर आई और मैने ज़िदगी को जीना शुरू किया है ... मैं भी अपनी कंपनी का बॉस हूँ... मेरी उस कलीग से मिलना तो आप माँ.... बिल्कुल मेरे स्टैंडर्ड को मैच करती है....खैर आप ही काजल से पूछ लीजिए यह अकेली जाना चाहती है या बच्चों के साथ ?"

माँ सन्नाटे में थी... इकलौता बेटा था... कुछ जिद्दी और अभिमानी तो था... पर इतना मुखर हो उठेगा ये उसे अंदाजा नहीं था।... अगले ही पल माँ ने खुद को संभाल लिया, एक नज़र दोनों पर डाली, काजल टेबल पर सर रखकर सिसकियाँ ले रही थी.... और राज बेसब्र हो रहा था कि माँ जल्दी फ़ैसला सुनाए।

"बेटा यह इतना बड़ा बंगला तेरे पिताजी ने बड़ी हसरतों से बनवाया था...हम सब इस परिवार में एक दूसरे से प्यार करते हैं..पर अगर हममें से कोई प्यार को बाहर तलाशता है .... तो घर भी वही छोड़ेगा जिसे अपना प्यार बाहर दिख रहा है.....बच्चे और काजल तो इस घर की रौनक हैं वो कही नहीं जा रहे।"

अब तक निशा का हाथ काजल के सर पर था, हाथ काँप ज़रूर रहा था पर आवाज बिल्कुल दृढ़ थी।


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