Sandeep Murarka

Inspirational Others


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पद्मश्री दैतारी नायक

पद्मश्री दैतारी नायक

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जीवन परिचय - 'कैनाल मैन यानी नहर पुरुष' के नाम से विख्यात दैतारी नायक का जन्म ओड़िशा के छोटे से गांव वैतरणी में ट्राइबल परिवार में हुआ। दैतारी का परिवार कृषि कार्यो से जुड़ा है, ये केन्दु पत्ता व आमपापड़ बना कर बेचते हैँ। इनके पुत्र का नाम आलेख है। दैतारी की कहानी की तुलना बिहार के माउंटेन मैन दशरथ मांझी से की जा सकती है।

योगदान - दैतारी नायक के गांव के लोग खेती पर निर्भर थे, किन्तु सिंचाई की व्यवस्था नहीँ होने के कारण खेती नगण्य थी और गांव के किसान गरीबी का जीवन जीने को मजबूर थे। गांव के लोगों ने कई बार स्थानीय प्रशासन से अनुरोध किया किन्तु उनका गांव नजरंदाज होता रहा। प्रखण्ड बांसपोल, तेलखोई, हरिचंदनपुर के गांव पहाड़ियों से घिरे थे, इसलिए यहाँ ना केवल सिंचाई की बल्कि पीने के पानी की भी किल्लत थी।

ये सभी गांव ट्राइबल बहुल हैँ, दैतारी ने अपने पुरखों से सुन रखा था कि 'वर्षा के जल को सामने वाले पहाड़ों की श्रृंखला ने रोक लेता है यदि वो पहाड़ ना होते तो हमारे गावों में भी जल होता।' दैतारी ने यह बात ग्रामीणों से साझा की तो सभी ने यह कहकर टाल दिया कि इसी कार्य के लिए वे लोग प्रशासन से गुहार कर रहे हैँ। तब दैतारी ने कंहा कि यदि प्रशासन सहयोग नहीँ कर रहा तो ना करे, यह कार्य हम गांव वाले मिलकर करे। यह तो वही बात हो गई कि राजा भागीरथ कठोर तपस्या कर गंगा को पृथ्वी पर ले आए थे। पर इतना कठोर तप, इतनी कड़ी मेहनत, करे कौन ? सभी ग्रामीण इस प्रस्ताव पर हँस पड़े और उनका मजाक उड़ाकर अपने अपने घरों को लौट गए।

मानो दैतारी को यह बात चुभ गई, आज का भागीरथ एक कुदाल और बरमा लेकर पहाड़ों को काटकर जल देवता के लिए नई राह बनाने में जुट गया।

ट्राइबल किसान 'दैतारी नायक' वर्ष 2010 से 2013 तक अकेले ही गोनासिका के पहाडो को खोदता रहा, खोदता रहा, चार साल, लगातार, खोदता रहा, तीन किलोमीटर एकल नहर को खोद डाला। जहाँ चाह वहाँ राह, एक दिन ऐसा आया जब पानी की धारा उन पहाड़ों के बीच से उस 'दैतारी नहर ' से होती हुई ग्रामीणों के खेतॉ तक पहुँच गई।

सिंचाई के लिए वर्षा जल पर निर्भर रहने वाले और पीने के लिए तालाबों के गंदे पानी का उपयोग करने वाले ग्रामीण आश्चर्य व खुशी से झूम उठे। तीन किलोमीटर नहर अब बैतरणी गाँव के आसपास लगभग 100 एकड़ भूमि को पानी प्रदान करती है और आज तक पानी की कमी नहीं हुई है।

ठीक ही कंहा जाता है कि मीडिया हनारे देश के लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है, कैनाल मैन दैतारी की कहानी गांव तक सीमित ना रह सकी, मीडिया के जरिए अखबारों से होती हुई यह चर्चा संसद के गलियारों तक जा पहुँची।

असीमित इच्छाशक्ति के धनी दैतारी समाज के लिए चिंतनशील हैँ, वे चाहते हैँ कि उनके द्वारा निर्मित नहर को उचित स्वरूप प्रदान करते हुए कंक्रीट का बना दिया जाए ताकि उनके गांव में आने वाली पीढ़ी को कभी सिंचाई एवं पेयजल की कमी ना हो।

सम्मान - समाज के सामने प्रस्तुत इस अप्रतिम उदहारण के लिए को 2019 में 71वें गणतन्त्र दिवस पर 71 वर्षीय कैनाल मैन दैतारी नायक को पद्मश्री से सम्मानित किया गया। 


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