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Rishab K.

Drama Crime Thriller

4  

Rishab K.

Drama Crime Thriller

पड़ोसन

पड़ोसन

3 mins
6



रात के 2:30 बज चुके थे। भागदौड़ भरी जिंदगी में यह वो वक्त होता है जब पूरा शहर गहरी नींद में सोता है, लेकिन एक नई माँ के लिए नींद किसी लग्जरी से कम नहीं होती। सुजाता अपनी बांहों में अपने बीस दिन के रोते हुए बच्चे को थामे, उसे सुलाने की जद्दोजहद कर रही थी।
तभी उसकी नज़र सामने वाले घर की खिड़की पर पड़ी। वहां रहने वाला अतुल, जो अक्सर रात 10 बजे तक सो जाता था, आज रात के अंधेरे में एक भारी कालीन घसीट रहा था। सुजाता ने ज़ूम करके अपने मोबाइल में उसे रिकॉर्ड करने की कोशिश की। तभी अतुल रुका। उसने सीधा सुजाता की खिड़की की तरफ देखा और एक बेहद खौफनाक, ठंडी मुस्कान के साथ हाथ हिलाया। उस एक मुस्कान ने सुजाता के रोंगटे खड़े कर दिए।
अगले ही दिन न्यूज़ चैनल पर खबर गूंजी—शहर से छठी एयर होस्टेस गायब हो चुकी थी। सुजाता का शक यकीन में बदलने लगा। लेकिन जब उसने अपने पति मोहित और पुलिस इंस्पेक्टर रवि को यह बात बताई, तो किसी ने उस पर विश्वास नहीं किया। मोहल्ले वालों के लिए अतुल एक 'परफेक्ट पड़ोसी' और कड़े अनुशासन वाला एक शरीफ इंसान था। मोहित ने इंस्पेक्टर रवि को अकेले में बताया कि सुजाता 'पोस्टपार्टम इनसोमनिया' (Postpartum Insomnia) की शिकार है, जिसमें नींद की कमी से इंसान को हैलुसिनेशन होने लगते हैं और वो मनगढ़ंत कहानियां बनाने लगता है।
पुलिस खाली हाथ लौट गई। सुजाता बिल्कुल अकेली पड़ गई थी। पति ने साथ छोड़ दिया था, घर की पुरानी नौकरानी रूबी ने अचानक काम छोड़ दिया, और पूरी दुनिया की नज़रों में वो एक मानसिक रूप से बीमार औरत मान ली गई। लेकिन एक माँ की वृत्ति (Instinct) कभी गलत नहीं होती। सुजाता ने ठान लिया कि चाहे जो हो जाए, वो इस 'परफेक्ट पड़ोसी' का असली चेहरा दुनिया के सामने लाकर रहेगी।
एक रात जब अतुल घर पर नहीं था, सुजाता अपनी जान की बाज़ी लगाकर उसके घर के बेसमेंट में घुस गई। वहां का नज़ारा हैरान करने वाला था। एक बड़े इंडस्ट्रियल फ्रीजर के अंदर इंसान के सिर की बेहद यथार्थवादी (hyper-realistic) मूर्तियां रखी थीं। कुछ भारी गार्बेज बैग्स भी कोने में रखे थे, जिनमें से एक अजीब सी बदबू आ रही थी। सुजाता को एहसास हो गया कि ये मूर्तियां सिर्फ एक दिखावा थीं; असली खौफ उन बैग्स में दफ्न था।
अगली सुबह पुलिस के सायरन की आवाज़ से पूरा मोहल्ला गूंज उठा। अतुल के हाथों में हथकड़ियां थीं। वो खुद को बेगुनाह बता रहा था, लेकिन तभी टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज़ आई—अतुल पांडेय ही वो खूंखार सीरियल किलर है जिसने उन एयर होस्टेसेस का बेरहमी से कत्ल किया है।
कहानी का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला रहस्य तब खुला जब इंस्पेक्टर रवि ने इस असली मास्टरप्लान से पर्दा उठाया। सुजाता कोई मानसिक रोगी नहीं थी। जब अतुल छुपकर सुजाता और पुलिस की बातें सुन रहा था, तब रवि ने जानबूझकर 'पोस्टपार्टम इनसोमनिया' की झूठी कहानी गढ़ी थी। मोहित ने भी एक परेशान पति का बेहतरीन नाटक किया था, और नौकरानी रूबी का काम छोड़ना भी उसी सोचे-समझे प्लान का हिस्सा था। यह सब अतुल को अति-आत्मविश्वास (overconfidence) में डालने के लिए किया गया था ताकि वो लापरवाह हो जाए।
बेसमेंट में अपनी जान जोखिम में डालकर सुजाता ने चुपके से खून से सने कपड़े का जो सैंपल लिया था, उसी ने अतुल को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
अंत में, जिसे पूरी दुनिया एक कमज़ोर, डरी हुई और नींद की मारी हुई नई माँ समझ रही थी, उसी माँ के पक्के शक और खतरनाक जासूसी ने शहर की कई लड़कियों को इंसाफ दिला दिया। यह कहानी साबित करती है कि एक औरत के शक को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए।


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