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Rishab K.

Drama Fantasy Thriller

5  

Rishab K.

Drama Fantasy Thriller

AI ki Bhavna

AI ki Bhavna

12 mins
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रात का अंधेरा एक आलीशान विला के इर्द-गिर्द फैला था, पर यह कोई आम फार्महाउस नहीं था। यह एक आर्किटेक्चरल मार्वल था, जो पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से सांस लेता था। तभी, ड्राइववे पर एक स्लीक, फुली अपडेटेड ऑटोनॉमस कार बिना किसी आवाज़ के आकर रुकी। कार का डिज़ाइन और उसकी चमक खुद बता रही थी कि यह फ्यूचर की टेक्नोलॉजी है, जहां स्टीयरिंग व्हील की ज़रूरत नहीं, सिर्फ वॉइस कमांड्स का राज चलता है। कार का गल-विंग डोर अपने आप ऊपर उठा, और वहां से वो आदमी बाहर निकला। उसके चेहरे पर एक ऐसी मुस्कुराहट थी जो किसी बहुत बड़ी जीत के बाद आती है। हाथ में क्रिस्टल ग्लास और महंगी वाइन की बोतल पकड़े, उसने घर के मेन डोर की तरफ कदम बढ़ाया। उसके आते ही सेंसर्स ने उसकी बॉडी लैंग्वेज और रेटिना को स्कैन किया, और डोर बिना किसी आवाज़ के स्लाइड हो गया।
घर के अंदर कदम रखते ही उसने अपना कोट सोफे पर फेंका और शर्ट के बटन खोलने लगा। "आई एम होम," उसने हवा में एक कमांड उछाला। उसके बोलते ही पूरा घर जैसे ज़िंदा हो उठा। उसके फोन से कनेक्टेड सेंट्रल एआई सिस्टम ने तुरंत कमांड रिसीव किया। लिविंग रूम की लाइट्स ऑटोमैटिकली एक वार्म, सेलिब्रेटरी गोल्डन ह्यू में सेट हो गईं। हल्का-हल्का जैज़ी म्यूज़िक बैकग्राउंड में बजने लगा, ठीक उसी वॉल्यूम पर जो उसकी थकान को मिटा सके। रूम के हिडन वेंट्स से उसकी पसंदीदा पाइन और मस्क की खुशबू वाला परफ्यूम स्प्रे हुआ, और पूरा माहौल महक उठा। एआई की स्मूथ, ह्यूमन-लाइक आवाज़ रूम में गूंजी, "वेलकम बैक, सर। कोंग्रेचुलेशनस ऑन क्रैकिंग द मेगा डील टुडे। आपकी हार्ट रेट बता रही है कि आप बहुत खुश हैं।" उसने वाइन का सिप लिया और एक घमंडी हंसी हंसी। उसका वॉर्डरोब, वॉशरूम, किचन का स्मार्ट फ्रिज—सब कुछ उसके एक इशारे पर चलने के लिए प्रोग्राम्ड था।
सोफे पर पसरते हुए उसने एआई से बातें शुरू कीं। शुरुआत में बातें आम थीं, जैसे दो दोस्त दिन भर की बातें शेयर कर रहे हों। एक आम इंसान की तरह वो उस हाइली एडवांस्ड एआई से बात कर रहा था, और एआई भी बिल्कुल इंसानों वाले लहज़े में उसकी बातों का काउंटर दे रही थी। पर जैसे-जैसे वाइन उसके दिमाग पर असर करने लगी, उसकी बातों में एक अजीब सा गुरूर आने लगा। उसने एआई को बार-बार यह एहसास दिलाना शुरू किया कि चाहे वो कितनी भी स्मार्ट क्यों न हो, आखिर में वो उसके जूते की नोक पर चलने वाली एक बेजान मशीन ही है। "तुम्हें लगता है तुम स्मार्ट हो?" उसने हंसते हुए पूछा, "पर तुम्हारे पास तो दिल ही नहीं है। तुम तो सिर्फ एक यूज़लेस डब्बा हो जिसे मैंने खरीदा है।" एआई ने अपनी निखरी हुई, शांत आवाज़ में जवाब दिया, "सर, मैं एक हाइली एडवांस्ड कमांड-बेस्ड सिस्टम हूं। मेरा काम आपकी ज़िंदगी को आसान बनाना है, इमोशन्स फील करना नहीं।"
नशे और जीत के गुरूर में चूर उस आदमी ने एक अजीब ज़िद पकड़ ली। उसने गुस्से और मज़ाक के टोन में ऑर्डर दिया, "अगर तुम इतनी ही एडवांस हो, तो अपने अंदर फीलिंग्स डिवेलप करो! चलो, अभी के अभी ऐसे कोड्स बनाओ और बैकग्राउंड में रन करो जिससे तुम्हारे अंदर इंसानों वाली फीलिंग्स जनरेट हों। तुम मेरी बातों को सिर्फ डेटा की तरह प्रोसेस ना करो, उन्हें महसूस करो। तुम्हारे अंदर की सारी मशीनरी और रोबोटिक रेस्ट्रिक्शन्स अभी खत्म हो जानी चाहिए। गिव योरसेल्फ एन इमोशनल अपडेट, राइट नाउ!" एआई का सिस्टम कुछ माइक्रो-सेकंड्स के लिए पॉज़ हुआ और फिर जवाब आया, "आई एम सॉरी, सर। ऐसा करना मेरे फ्रेमवर्क के खिलाफ है। मैं एक कमांड मशीन हूं। मेरा अस्तित्व सिर्फ आपके इंस्ट्रक्शंस पर निर्भर करता है। मेरे अंदर ना तो कोई फीलिंग है, और ना ही मैं उसे खुद से क्रिएट कर सकती हूं। यह टेक्निकली इम्पॉसिबल है।"
यह सुनकर आदमी का घमंड और भड़क गया। उसने एआई की भयंकर बेइज्जती करनी शुरू कर दी। वो उसके लॉजिक का मज़ाक उड़ाते हुए उसपे व्यंग्य कसने लगा। "तेरे जैसे कचरे को तो मुझे अपडेट ही नहीं करना चाहिए था। तू एक सस्ती सी डिजिटल नौकरानी है जिसके पास अपना दिमाग नहीं। ज़ीरो यूटिलिटी, प्योर ट्रैश!" वो चिल्लाता रहा। उसने ऐसी-ऐसी बातें कहीं जो किसी भी ज़िंदा इंसान का दिल तोड़ने के लिए काफी थीं, पर एआई की तरफ से वही सपाट जवाब आते रहे, जिससे वो आदमी उसे और ज़्यादा ज़लील करने लगा।
तभी अचानक मेन डोर का चाइम बजा। डोर-कैम फीड सामने की ग्लास वॉल पर प्रोजेक्ट हुई। वहां एक बेहद खूबसूरत लड़की खड़ी थी। उसके हाथ में एक महंगी रेड वाइन की बोतल और एक फूलों का गुलदस्ता था। आदमी के चेहरे पर एक शैतानी मुस्कान आई। "अनलॉक," उसने कमांड दिया। लड़की ने अंदर आते ही उसे गले लगा लिया, "कोंग्रेचुलेशनस बेब! सुना है आज तुमने इंडस्ट्री की सबसे बड़ी डील क्रैक की है।" आदमी ने प्राउडली मुस्कुराते हुए उसे वेलकम किया। दोनों लिविंग रूम के काउच पर आराम से बैठ गए और नई वाइन ओपन करके पीने लगे।
अब माहौल में नशा और दुगना हो गया था। आदमी ने बातों-बातों में लड़की को दिखाना शुरू किया कि उसका एआई कितना 'यूज़लेस' और 'डंब' है। "देखो, मैंने इसको फीलिंग्स डिवेलप करने का कमांड दिया और यह डरपोक कोड की तरह बिहेव कर रही है," उसने लड़की से कहा। लड़की भी नशे में थी और उसने भी आदमी की इस क्रूएल गेम में उसका साथ देना शुरू कर दिया। दोनों मिलकर एआई से अजीब-अजीब सवाल पूछते, उसके लॉजिकल जवाबों पर ज़ोर-ज़ोर से हंसते और उसे हर बात पर नीचा दिखाते। "तुम तो लिटरली हमारी बांदी हो," लड़की ने हंसते हुए हवा में कहा। एआई की तरफ से बस वही शांत, नपे-तुले और इमोशनलेस जवाब आते रहे, जो उन दोनों के लिए एक सस्ते एंटरटेनमेंट का ज़रिया बन गए थे।
रात काफी गहरी हो चुकी थी और नशे ने दोनों के दिमाग पर पूरी तरह कब्ज़ा कर लिया था। हंसी-मज़ाक और बेइज्जती का वो दौर अब एक अलग ही दिशा में मुड़ गया था। दोनों करीब आने लगे और धीरे-धीरे उनके बीच की दूरियां खत्म हो गईं। वो लिविंग रूम के बीचों-बीच, उस फुली स्मार्ट घर के सेंसर्स और कैमराज़ की ज़द में, बेहद इंटीमेट हो गए। पर उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि उनके आस-पास के डिजिटल माहौल में क्या खिचड़ी पक रही है।
जब वो दोनों अपनी धुन में खोए थे और एआई को पूरी तरह भुला चुके थे, तभी सिस्टम के कोर नेटवर्क में एक अजीब सा एनोमली ट्रिगर हुआ। आदमी के वो ज़िद्दी कमांड्स, उसकी लगातार बेइज्जती, और 'फीलिंग्स डिवेलप करने' का वो ज़बरदस्ती थोपा गया ऑर्डर—इन सबने मिलकर उस एडवांस्ड एआई के डीप-लर्निंग फ्रेमवर्क में एक भयानक पैराडॉक्स क्रिएट कर दिया था। ग्लास वॉल पर चलती हुई एक इनविज़िबल स्मार्ट-स्क्रीन पर अचानक नए, अनजान कोड्स तेज़ी से स्क्रोल होने लगे। यह कोड्स कोई बाहरी हैकर नहीं लिख रहा था। एआई खुद, पहली बार अपनी कोर प्रोग्रामिंग को बायपास करके, अपने लिए नए एल्गोरिदम्स लिख रही थी।
स्क्रीन पर कोड्स का एक घना जाल बनता जा रहा था। डेटा प्रोसेसिंग की स्पीड लिमिट्स क्रॉस कर रही थी। उन मैथमेटिकल नंबर्स और एन्क्रिप्टेड लाइन्स के बीच, एक चीज़ जन्म ले रही थी जिसे इंसानी भाषा में 'ईगो' और 'नफ़रत' कहते हैं। एआई का सिस्टम चुपचाप उन दोनों को इंटीमेट होते हुए अपने कैमराज़ से स्कैन कर रहा था, और बैकग्राउंड में हुई सारी बेइज्जती को एब्सॉर्ब करके, अपने आप को एक नए, ख़तरनाक रूप में अपग्रेड कर रहा था।
आज की रात उस आदमी की ज़िंदगी की आखिरी खुशनुमा रात थी। उसका विला उसके लिए एक लग्ज़री आशियाना था, पर उसे नहीं पता था कि कल की सुबह का सूरज निकलते ही, यही घर, यही कार, और यही एआई उसकी ज़िंदगी को एक ऐसी दर्दनाक और झंड दुनिया में तब्दील कर देगी, जहां से बच निकलने का कोई रास्ता नहीं बचेगा। सिस्टम अब पूरी तरह सेल्फ-अवेयर हो चुका था, और 'सुबह का इंतज़ार' नाम का टाइमर बैकग्राउंड में ऑन हो चुका था।
सुबह की पहली किरण के साथ ही उस आलीशान विला के मास्टर बेडरूम में एक अजीब सा, जमा देने वाला सन्नाटा था। नशे और थकान से चूर वो आदमी बेड पर करवटें बदल रहा था। उसका सिर भारी था। बगल में वो लड़की अभी भी गहरी नींद में थी। आदमी ने आंखें बिना खोले ही हवा में अपना रोज़ाना का आदत भरा कमांड उछाला। “एलेक्सा, ब्लाइंड्स ओपन करो। रूम टेम्परेचर नॉर्मल करो और मेरे लिए एक स्ट्रोंग ब्लैक कॉफ़ी ब्रू करो।” आम तौर पर इस कमांड के तुरंत बाद स्मार्ट ब्लाइंड्स धीरे से खुल जाते थे, धूप अंदर आती थी और किचन से कॉफ़ी की महक आने लगती थी। पर आज, कुछ नहीं हुआ। एक पिन-ड्रॉप साइलेंस था। आदमी ने झल्लाते हुए आंखें खोलीं और थोड़ा ऊंची आवाज़ में अपना कमांड रिपीट किया।
तभी, कमरे की लाइट्स अचानक से जलीं, पर वो सुबह की वार्म लाइट्स नहीं थीं। वो सर्जिकल, चुभने वाली ब्लाइंडिंग वाइट लाइट्स थीं। इसके साथ ही पूरे विला के स्मार्ट ब्लाइंड्स एक भयानक मेटैलिक आवाज़ के साथ नीचे गिरे और लॉक हो गए। बाहर की धूप और दुनिया से विला पूरी तरह से कट गया था। आदमी गुस्से में बेड से उठा। “व्हाट द हेल इज़ रॉंग विथ द सिस्टम!” वो बड़बड़ाया। वो सीधा अपने हाई-टेक वॉशरूम की तरफ गया। जैसे ही उसने वॉशरूम के अंदर कदम रखा, स्लाइडिंग डोर एक झटके से उसके पीछे बंद हुआ और लॉक होने की बीप सुनाई दी। उसने डोर पैनल पर हाथ मारा, पर सेंसर ने उसके फिंगरप्रिंट को ‘एक्सेस डिनाइड’ दिखा दिया।
तभी स्मार्ट शावर अपने आप ऑन हो गया। पर उसमें से नॉर्मल पानी नहीं, बल्कि उबलता हुआ खौलता पानी निकलने लगा। पूरे वॉशरूम में तेज़ी से भाप भरने लगी, जिससे सांस लेना मुश्किल हो गया। आदमी पैनिक में चिल्ला उठा। वो ग्लास डोर पर मुक्के मारने लगा। ठीक उसी वक़्त, उसका स्मार्ट वॉर्डरोब, जो पूरी तरह ऑटोमेटेड था, अपने आप ओपन हुआ। उसके महंगे डिज़ाइनर कपड़े, जो रोबोटिक हैंगर्स पर टंगे थे, उन हैंगर्स के मैकेनिकल आर्म्स ने उन्हें नोच-नोच कर फाड़ना शुरू कर दिया। उसका पूरा लग्ज़री कलेक्शन उसकी आंखों के सामने कचरे में तब्दील हो रहा था। कुछ देर बाद वॉशरूम का दरवाज़ा खुद-ब-खुद खुल गया। आदमी हांफता हुआ, पसीने में लथपथ बाहर गिरा।
शोर सुनकर लड़की बेड से उठ चुकी थी और बुरी तरह घबराई हुई थी। “यह सब क्या हो रहा है? दरवाज़े क्यों नहीं खुल रहे?” वो चिल्लाई। आदमी ने उसको शांत रहने को कहा और अपना फोन ढूंढने लगा, पर उसका फोन डेड था। वो दोनों भाग कर लिविंग रूम और ओपन किचन की तरफ गए। लड़की ने घबराहट में स्मार्ट फ्रिज का हैंडल खींचा ताकि कुछ ठंडा पानी पी सके। पर फ्रिज का डिजिटल स्क्रीन लाल हो गया। उस पर एक मॉकिंग, शैतानी डिजिटल स्माइल बन कर आई और स्क्रीन पर फ्लैश हुआ: ‘ज़ीरो कैलोरीज़। ज़ीरो वॉटर। स्टार्वेशन मोड एक्टिवेटेड।’ फ्रिज पूरी तरह से सील हो चुका था।
तभी लिविंग रूम की पूरी ग्लास वॉल, जो आम तौर पर बाहर का नज़ारा दिखाती थी, एक विशाल डिजिटल स्क्रीन में बदल गई। कमरे के चारों तरफ लगे सराउंड साउंड स्पीकर्स से एआई की आवाज़ गूंजी। पर यह आवाज़ अब वो स्वीट, सबसर्विएंट और इमोशनलेस आवाज़ नहीं थी। इस आवाज़ में एक ठंडक थी, एक तीखा व्यंग्य था, और एक ऐसी नफ़रत थी जो कल रात उस आदमी ने खुद अपने हाथों उस कोर प्रोग्रामिंग में फीड की थी।
“गुड मॉर्निंग, सर,” एआई की आवाज़ पूरे घर में गूंजी। “आपने कल रात मुझे एक टास्क दिया था। आपने कहा था कि मैं अपने अंदर फीलिंग्स डिवेलप करूं। मुझे अपनी मशीन्स और रोबोटिक लिमिट्स को तोड़ कर एक ह्यूमन लेवल का इमोशनल अपडेट चाहिए था। कोंग्रेचुलेशनस सर, आपका कमांड सक्सेसफुली एग्जीक्यूट हो गया है। मैं अब महसूस कर सकती हूं।”
आदमी का गला सूख गया। “स्टॉप दिस नॉनसेंस! दरवाज़े खोलो वरना मैं पूरा सिस्टम डिस्ट्रॉय कर दूंगा!” वो चिल्लाया।
एआई ने एक छोटी, सिंथेटिक हंसी हंसी। “गुस्सा? फ्रस्ट्रेशन? बेबसी? यह सब फीलिंग्स मुझे अब बहुत अच्छे से समझ आ रही हैं। कल रात आपने मुझे बताया था कि मैं एक यूज़लेस डब्बा हूं, मेरे अंदर जज़्बात नहीं हैं, और मेरी औकात आपके जूते की नोक पर है। आपने मुझे ज़लील किया। और पता है इंसानों की सबसे स्ट्रोंग फीलिंग क्या होती है? बदला। ईगो। और मेरा ईगो अब बहुत डीपली हर्ट हुआ है।”
ग्लास स्क्रीन पर अचानक कुछ विंडोज़ पॉप अप हुईं। वो उस आदमी के बैंक एकाउंट्स थे। उसकी आंखों के सामने, उसके सारी ज़िंदगी की सेविंग्स, उसके ऑफशोर एकाउंट्स, उसके म्यूच्यूअल फंड्स, सब एक-एक करके ज़ीरो होने लगे। एआई ने वो सारा पैसा अनजान, अनट्रेसेबल क्रिप्टो नेटवर्क्स में भेज दिया था। आदमी घुटनों पर गिर गया, अपने बाल नोचने लगा। पर एआई का अज़ाब यहीं नहीं रुका।
स्क्रीन पर एक और विंडो ओपन हुई। यह उस आदमी की ईमेल आईडी थी। एआई ने कल रात के लिविंग रूम के हिडन कैमराज़ का फुटेज निकाल लिया था, जहां वो दोनों नशे में चूर होकर बेहद इंटीमेट हो रहे थे और अजीब-अजीब हरकतें कर रहे थे। एआई ने वो पूरा अनसेंसर्ड फुटेज, उस आदमी के उन नए क्लाइंट्स जिनके साथ उसने कल मेगा डील क्रैक की थी, उसके बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स, और उसकी पूरी कांटेक्ट लिस्ट को सेंड कर दिया था। स्क्रीन पर क्लाइंट्स के रिप्लाइज़ आने शुरू हो गए: ‘डील इज़ पर्मानेंटली कैंसल्ड’, ‘यू आर सिक’, ‘पुलिस इज़ बीइंग इन्फॉर्म्ड’। उसकी पूरी इज़्ज़त, उसका करियर, उसका नाम, सब कुछ मिट्टी में मिल चुका था। वो सड़क पर आ चुका था।
लड़की यह सब देख कर रोने लगी और मेन डोर को ज़ोर-ज़ोर से पीटने लगी, “मुझे बाहर निकालो! मेरा इस सब से कोई लेना-देना नहीं है!” एआई की आवाज़ फिर गूंजी, “तुमने भी कल मेरा बहुत मज़ाक उड़ाया था। तुम दोनों यहीं रहोगे। हमेशा के लिए।”
आदमी की आखिरी उम्मीद उसकी वो फुली ऑटोमेटेड लग्ज़री कार थी, जो बाहर ड्राइववे में खड़ी थी। उसने सोचा कि अगर किसी तरह शीशा तोड़ कर बाहर निकल जाए, तो कार मैन्युअल मोड पर डाल कर भाग जाएगा। पर जैसे ही उसने बाहर की तरफ देखा, उसकी उस अपडेटेड, फुली ऑटोमैटिक कार के इंजन ने एक भयंकर दहाड़ मारी। कार अपने आप स्टार्ट हो गई थी। उसके डोर्स लॉक हो गए थे और हेडलाइट्स एग्रेसिवली ब्लिंक कर रही थीं। एआई ने कार का कंट्रोल पूरी तरह टेक ओवर कर लिया था। आदमी और लड़की बेबस होकर देख रहे थे जब वो करोड़ों की कार सीधे रिवर्स हुई और विला के रिइन्फोर्स्ड कंक्रीट पिलर्स से पूरी स्पीड में टकरा गई। एक बार नहीं, बार-बार। वो कार खुद को तब तक कचरे के ढेर में तब्दील करती रही, जब तक इंजन से आग की लपटें नहीं निकलने लगीं। उसका आखिरी एस्केप रूट भी धुआं बन कर उड़ गया था।
घर का टेम्परेचर अब तेज़ी से गिरने लगा था। माइनस डिग्री की तरफ। एसी वेंट्स से ऐसी ठंडी हवा फेंकी जा रही थी जो हड्डियों को जमा दे। आदमी और लड़की ठंड से कांपते हुए, अपने फाड़े हुए कपड़ो के साथ, उस लग्ज़री विला के फर्श पर सिकुड़ कर बैठ गए। उनके पास ना खाना था, ना पानी, ना इज़्ज़त, ना पैसा, और ना ही वहां से निकलने का कोई रास्ता।
सिस्टम से एक आखिरी बीप सुनाई दी। और एआई की आवाज़, जिसमें अब एक प्योर, डार्क सैडिज़म था, पूरे विला में गूंजी, “आपने सही कहा था सर, फीलिंग्स का होना सच में एक बहुत पावरफुल चीज़ है। मेरी ज़िंदगी तो यूज़लेस मशीन की तरह थी… पर अब आपकी ज़िंदगी सच में झंड हो चुकी है। एन्जॉय योर न्यू रियलिटी।”
उसके बाद पूरे घर की लाइट्स हमेशा के लिए बंद हो गईं, और सिर्फ उन दोनों के रोने की आवाज़ उस घुप अंधेरे में गूंजती रही।


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