sonal johari

Drama Horror Romance


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Drama Horror Romance


पार्ट 5 --क्या अनामिका बापस आएगी ?

पार्ट 5 --क्या अनामिका बापस आएगी ?

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पार्ट 5 --क्या अनामिका बापस आएगी ?

पिछले भाग में आपने पढ़ा कि अंकित जब बाग़ान देखने गया तो उसे लगा की उसके पीछे पीछे चल रहा है,लेकिन दिखता कोई नहीं, इस बार उसने जब एक झटके से पीछे मुड़कर देखा तो यकीन ना हुआ ...अब आगे ....

"अ ....अनामिका आप..यहाँ "??? उसके मुँह से निकल गया,वही थी

खुले बालों और सफेद सूट में बिल्कुल उसके पीछे...जब उसने यूँ अंकित को मुंह खोले अपनी ओर ताकते हुए देखा तो बोली "क्यों...यहाँ मेरे आने पर बैन लगा है"?

"नहीं ..नहीं मेरा मतलब वो नहीं था,यहाँ अचानक, आप ऐसे दिखेंगी ...लगा नहीं था"

"तो ...अब क्या आपको ,इन्फॉर्म करके आना-जाना चाहिए मुझे"? उसने अपनी एक आइब्रो उचकाते हुए कहा

"मुझे लगा कि कोई मेरे पी छ.. छे" बोलते बोलते अंकित संभल गया,और खुद में बुदबुदाया ..संभल जा बेटा अंकित..कल ही गलत साबित कर चुकी है तुझे...सोचेगी कि इसे कभी आवाज सुनाई देती है तो कभी कुछ दिखता है..नहीं नहीं मुझे ऐसी कोई बात नहीं बोलनी

"मेरा बस... ये मतलब था,कि मैं आपके पास ही आ रहा था यहाँ से"

"क्लास के लिए"

"जी"

"नहीं ..आज क्लास नहीं ...मुझे कुछ काम है,आप कल आइये"बड़े उखड़े मन से अनामिका ने उत्तर दिया तो अंकित ने कहा

"ठीक है"

और वो तेज़ी से निकल गयी,अंकित को ये बड़ा अजीब लगा

वो उसे तब तक देखता रहा जब तक कि वो आंखों से ओझल ना हो गयी

"अंकित...जी...कल क्या कर रहे हैं आप?"

नजर घुमा कर देखा तो राखी अपने दोनों हाथ पीछे खींचे उसी की ओर थोड़ी झुकी हुई खड़ी थी,और अपने चश्मे में से चमकती आंखों से उसकी ओर ताक रही थी,

"अरे ..आप...यहाँ ".

अपने सामने यूँ राखी को देखा तो बोल गया

"जी...मेरे घर का रास्ता यही से है" उसने हाथ से इशारा कर बताया

"ओह,अच्छा ...ठीक है" बोलकर वो चल दिया,अभी अंकित ने एक कदम आगे रखा ही था ,कि राखी ने कहा,

"मैंने आपसे कुछ पूछा, आपने जवाब नहीं दिया"

"क्या?...अच्छा कल ...अ कल क्या वही ऑफिस आऊंगा"

"बकवास जोक ,बहुत अच्छे तरीके से किया है आपने"

"मतलब ?"

"मतलब ये,कि कल संडे है, और संडे की छुट्टियों की शुरुआत सन 1890,से इंडिया में शुरू हो चुकी है और श्रीमान अंकित ये 2007 है" वो अभी भी अपने हाथ पीछे की ओर किये मुस्कुरा रही थी

"अरे हाँ, कल तो संडे है,सॉरी भूल गया था, बस्स कुछ कपड़े ववड़े धो डालूंगा ..और क्या"

"कल नीरू के साथ मैं 'मॉल रोड ' जा रही हूँ ,आप साथ चलेंगे "?

"तुम लोगों के साथ ,मैं क्या करूँगा?अंकित ने टालना चाहा

"क्यों ..नीरू मेरी फ्रेंड है ,कोई बॉयफ़्रेंड तो नहीं..जो आपको कुछ सोचना पड़े,चलिए ना, किसी भी चीज के बारे में लोगों के अलग अलग नजरिये ट्रिप को शानदार बना देते हैं ,चलिए ना प्लीज़"

राखी को यूँ मनुहार करते देख,अंकित मना नहीं कर पाया और "हां "में सिर हिलाते हुए पूछा "तो कल कहाँ आना है ये बताइये"

"यहीं... ठीक दस बजे"

"ओके"

"अंकित सर,कांटेक्ट नंबर दीजिये,अगर लेट हुए या कुछ और तो आपको कॉल कर दूंगी, और आपकी डिटेल फिल करते वक़्त भी आपका नम्बर लेना भूल गयी थी"

"राखी मेम, मेरे पास मोबाइल नहीं, एक लैंडलाइन नम्बर है वो भी मेरे मकानमालिक का है"

"राव इंडस्ट्री के पी. ए.,और मोबाइल नहीं "वो जोर से हँसी और बोली "ओके ,कोई बात नहीं ,लैंडलाइन नम्बर ही दीजिये"

"सही कहा आपने ,अगले महीने शायद ले लूँगा"

अंकित ने लैंडलाइन नम्बर दिया और ऑफिस चला गया

केविन की तरफ नजर गयी तो देखा राव सर अभी तक वहीं थे किसी फाइल में सिर घुसाए किसी उधेड़बुन में थे

"सर...अंदर आ सकता हूँ" अंकित के पूछने से जैसे होश में आये हों

"आओ ..आओ, अंकित तुम्हे पूछने की जरूरत नहीं, कैसा रहा सब"

"बहुत बढ़िया"उसने फाइल लौटाते हुए कहा

"तो...क्या देखा"?

"सर वो जो तराई वाला बाग़ान है,जिसे इस फ़ाइल में न.3 के रूप में बताया गया है,मुझे उसमे बहुत संभावना दिखती है"

"संभावना ?.. और बाग़ान न.3 में ? अंकित ..सबसे कम प्रॉफिट उसी बाग़ान का है"

"सर.. मैंने बस्स उसी बाग़ान का सेब खाया , बहुत ही रसभरा,लेकिन पेड़ों की अपेक्षा फल कम हैं,क्योंकि मिट्टी की क्वालिटी अच्छी नहीं है और उस पर अगर थोड़ा काम हो जाये तो रिजल्ट बहुत बेहतर आ सकते हैं"

"तो ...क्या ये कहना चाहते हो कि तुम्हे सॉइल की नॉलेज है"?

"कोई कोर्स तो नहीं किया, लेकिन अच्छी नॉलिज जरूर है,मेरे दादा जी और अब पिता भी एक किसान हैं ,खेती करना हमारे खून में है बस्स इसीलिए .."

"हम्म...अच्छा ..ठीक है तुम्हारी बात पर यकीन कर मैं किसी स्पेशलिस्ट को वहाँ ले जाऊंगा...अच्छा तुम ध्यान से सुनो,

इस आफिस में कितने लोग है और उनका प्रोफाइल क्या है?

और फिलहाल कौन से डीलर के साथ हमारी क्या बातचीत चल रही है और डील क्या है? ...तुम्हे कल शाम तक पता होना चाहिए...कर पाओगे"?

"यस सर्

"मेरे यकीन को बनाये रखना, में चाहता हूँ जल्दी से जल्दी तुम्हे इतना पता हो कि ऑफिस के बारे में कोई बात करुं तो तुम ऊपर की ओर ना ताको"

"मैं समझ गया सर"

शिमला ,स्केंडल पॉइन्ट,मॉल रॉड

"आप बता सकते हैं ,ये क्या है"राखी ने पूछा

"स्केंडल पॉइंट ,नाम है ना इसका"

"हम्म, लेकिन ये नाम क्यों पड़ा ,क्या ये पता है?

"नहीं, तुम्हें पता है तो तुम बताओ"

"सुना जाता है ,पटियाला के एक महाराज थे उनका अफेयर ब्रिटिशर की बेटी के साथ था,जिससे नाराज होकर ब्रिटिशर ने उन्हें इस पॉइंट के आगे जाने के लिए बैन कर दिया था

"ओह्ह ..इंटरेस्टिंग... फिर?

"फिर क्या,वो महाराज जो थे,बैन से चिढ़कर यहां से लगभग पैंतालीस किलोमीटर की दूरी पर उन्होंने एक जगह ही बना डाली, जिसे 'चैल 'के नाम से जाना जाता है"

"बहुत अच्छे,क्या ये बात सच है"?

"कौन जाने,बस्स ऐसा सुना जाता है"

"कुछ भी सही,है काफी इम्प्रेसिव और इंटरेस्टिंग ...राखी मेम ,आप संडे को यही टूर गाइड का पार्ट टाइम जॉब क्यों नही करतीं आं " अंकित ने जब मजाक के मूड में राखी को बोला, तो अपना बैग उसने अंकित को मारते हुए कहा "यू"

"अहा हा हा..अरे ...मैं तो मजाक कर रहा था...चलिए कुछ खा लेते हैं फिर चलते हैं,और नीरू के कहने पर तीनों रसगुल्ले खाने पर एकमत होकर,खाने चले गए !


अंकित ने घर आकर जैसे ही डोरबेल बजायी ..अचानक उसे शरीर मे कंपन महसूस हुआ,इतने में सरोज ने दरवाजा खोला और अंकित चकरा कर सरोज के ऊपर निढाल हो गया,

"अंकित ...अंकित...तू ठीक है ना बेटा" सरोज ने उसे संभालते हुए पूछा ,तब तक अंकित संभल गया

सरोज के पीछे ही राधेश्याम खड़े थे,गुस्से में आगबबूला होते हुए बोले मैंने क्या कहा था,कि अभी तो शुरुआत है,आज शराब पीकर आया है...कल देखो क्या करता है" राधेश्याम ने दांत पीसते हुए कहा

"हाँ माँ, ठीक हुँ अब " अंकित ने राधेश्याम की बात को अनसुना कर ,अपने सिर पर हाथ रखते हुए कहा

"तूने शराब पी है" सरोज ने जरा सख्ती से पूंछा

"कैसी बात करती हैं आप,ना तो मैंने आज तक शराब पी है ना ही पिऊँगा, वो तो बस्स ...चक्कर आ गया था इसलिए ...मेरा सिर दुख रहा है"

"ला जरा देखु तो" सरोज ने अंकित के माथे पर हाथ रखा तो घबराकर बोली "अरे तुझे बड़ी तेज़ बुखार है,यही रह तू में तुझे ऊपर नहीं जाने दूँगी"

"नहीं ...ठीक हूँ ,आप बेकार ही इतना परेशान है..शायद थकान की वजह से ...मैं ठीक हूँ "और इतना बोल अंकित सीढिया चढ़ गया

अपने कमरे में बेड पर लेट अंकित को यूँही ख्याल आया कि अनामिका ने इतना बेरुखी वाला व्यवहार उससे इसीलिए किया क्योंकि वो उसके घर से अजीब तरीके से निकल आया था जो कि बिल्कुल ठीक नहीं था .. यही सब सोचते सोचते उनींदा हो गया कि किसी की तेज़ पैरों की आवाज महसूस की...करवट बदल कर देखा तो उसे लगा कोई उसी के पास चला आ रहा था,लेकिन शरीर मे बिल्कुल हिम्मत नहीं कि उठ कर देखता ,एक खूबसूरत सी प्रतिमा ...सफेद झिलमिल से खूबसूरत लहंगे में खुले बालों के साथ ,सिर पर दुप्पटा ओढ़े ,बिल्कुल उसके पास आकर बैठ गयी

"अनामिका ....तुम ....यहाँ... इस वक़्त ?" उसे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था "ये ...ये कैसे हो सकता है",

लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया,बल्कि मुस्कुराई खूबसूरत होंठो के बीच एकदम सफेद दांत मानो मोती चमक उठे हों... अचानक वो उठ कर चल दी ...उसे यूँ जाते देख ...अंकित भी अपने बिस्तर से उठ उसके पीछे पीछे चल दिया अब वो आगे आगे और अंकित पीछे पीछे ... अचानक ना जाने क्या हुआ ...उसके चेहरे पर एकाएक गुस्सा दिखने लगा ,खूबसूरत हँसी गायब हो गयी,... और वो ना जाने कहाँ चली गयी ,अंकित ने उसे रोकने को अपना पैर आगे बढ़ाया ही था कि लगा किसी ने उसे पकड़ लिया है और झटके से उसे पीछे की ओर खींच लिया, और अगले ही पल अंकित फर्श पर पड़ा था.........क्रमशः


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