Read #1 book on Hinduism and enhance your understanding of ancient Indian history.
Read #1 book on Hinduism and enhance your understanding of ancient Indian history.

Vijay Kumar उपनाम "साखी"

Inspirational


2  

Vijay Kumar उपनाम "साखी"

Inspirational


निद्रासुर का अंत

निद्रासुर का अंत

3 mins 147 3 mins 147

संग्रामपुर में रितेश नाम का एक होनहार लड़का रहता था। रितेश अभी कला संकाय की स्नातक डिग्री के अंतिम वर्ष का छात्र था। वह पूरे जिले में अव्वल आता था। जितना वह पढ़ने में होशियार था। उतना ही वह विनम्र था। उसी गांव में उसके साथ के पांच दोस्त कालू,मोनू,सोनू,टोनू,जोनू भी रहते थे। उनके गांव के बाहर एक काली गुफ़ा थी। उस गुफ़ा में निद्रासुर नाम का एक राक्षस रहता था। वह बड़ा ही भयानक था। वह अक्सर छात्रों के परीक्षा के दिनों में निकलता था। वह एक-एक करके सभी होशियार बालकों को अपना शिकार बनाया करता था। वह अधिकतर रात के समय में बाहर निकलता था। जिस छात्र को वह अपना शिकार बनाता, वह छात्र या तो अनुतीर्ण हो जाता या फिर बहुत कम अंक से उतीर्ण होता था। इस प्रकार संग्रामपुर में 10 वी, 12 वी फैल होने वालों की संख्या में बहुत वृद्धि होने लगी थी। रितेश के दोस्त भी एक-एक करके निद्रासुर का शिकार होने लगे थे। कालू कक्षा 10 में निद्रासुर का शिकार हुआ। मोनू कक्षा 12 में निद्रासुर का शिकार हुआ। सोनू स्नातक प्रथम वर्ष में निद्रासुर का शिकार हुआ। टोनू स्नातक द्वितीय वर्ष में निद्रासुर का शिकार हुआ। अब रितेश का दोस्त जोनू और वह स्वयं ये दोनों ही निद्रासुर से बचे हुए थे। रितेश और जोनू दोनों ने अच्छे अंकों से कला संकाय में स्नातक की डिग्री ले ली।

दोनों ही गांव में रह आईएएस की तैयारी करने लगे। रितेश के एक चाचा दिल्ली में रहते थे। वह उनसे आईएएस के नोट्स मंगा लेता था। रितेश नियमित रूप से 8 घण्टे प्रतिदिन पढ़ता था। पर इधर जोनू कभी 2 घण्टे तो कभी 10 घण्टे पढ़ता था। आईएएस का प्रथम पेपर दोनों ने क्लीयर कर लिया। अब मेन पेपर की बारी थी। जैसे-जैसे आईएएस के मेन पेपर की तारीख नज़दिक आने लगी। वैसे-वैसे जोनू को निद्रासुर अपने आगोश में लेने लगा। आईएएस का मेन पेपर जून माह की 23 तारीख को था। निद्रासुर रीतेश को भी अपना शिकार बनाने आया था। पर रितेश ने आईएएस ऑफिसर बनने का हिमालय पर्वत जैसा दृढ़ संकल्प ले रखा था। निद्रासुर, रितेश के दृढ़ संकल्प से हारकर वापिस अपनी गुफा भाग गया। परिणाम यह हुआ रितेश ने आईएएस परीक्षा पूरे राज्य में प्रथम स्थान से उत्तीर्ण की। उसका दोस्त जोनू आईएएस परीक्षा उतीर्ण नहीं कर सका। निद्रासुर ने अंत मे आते-आते उसे अपना शिकार बना लिया था। रितेश ने अपने सभी दोस्तों को अपने घर पर खाने की दावत दी। दोस्तो ने उसे पूंछा, तू आख़िर निद्रासुर से कैसे बचा। रितेश बोला,निद्रासुर ने मुझे भी बहुत प्रलोभन दिये, बहुत मीठे-मीठे सपने दिए, बहुत मनभावन आलस्य दिया, कर्म छोड़कर भागने को कहा,मे हनत छोड़कर भाग्य के सहारे चलने को कहा। पर दोस्तो मैंने उसे अपने दृढ़ संकल्प,आत्मविश्वास,कठोर मेहनत, हिम्मत से उसे पराजित कर दिया। यह निद्रासुर राक्षस गांव की काली गुफा से कहीं अधिक हमारे अंतर्मन में वास करता है। जो शख्स इस राक्षस को अपनी मेहनत,आत्मविश्वास, दृढ़ संकल्प, हिम्मत से पराजित कर देता है, वो ही इतिहास बनाता है। वो ही सफल होता है।

जो शख्स त्यागता है नींद

श्वान जैसी लेता है वो नींद

कौए जैसी बजाता है बिंद

बगुले सा ध्यान लगाता है

शेर सा साहस दिखाता है

वो ही शख्स विद्या पाता है



Rate this content
Log in

More hindi story from Vijay Kumar उपनाम "साखी"

Similar hindi story from Inspirational