Shakuntla Agarwal

Inspirational


4.7  

Shakuntla Agarwal

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नासमझी

नासमझी

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मोदी जी ने नौ मिनट का आवाहन किया कि मुझे दीपक, टोर्च, मोबाइल की फ़्लैश या मोमबत्ती के साथ आपकी नौ मिनट चाहिए ! ताक़ि हम कोरोना वायरस को हराने के लिये, एकजुटता दिखा सकें ! हम सबने आठ बजे से ही बड़े उत्साह के साथ तैय्यारियाँ आरम्भ कर दी ! न केवल भारत अपितु प्रत्येक उस हिन्दुस्तानी ने भी, जो कि विदेशों में रह रहें हैं ! हम सब मन और आत्मा से एक - दूसरें के साथ जुड़े और हमने यह भी साबित कर दिया कि हम इस जँग में साथ - साथ हैं ! परन्तु एक नासमझी कर बैठे - हम सब में पटाखें चलानें की होड़ लग गयी ! इतने दिनों तक जो प्रदूषण का स्तर कम हुआ था, हम उसकों फ़िर से बढ़ाने में लग गये ! गँगा - यमुना का 55 % पानी साफ़ हो चुका है ! हमारा वातावरण निर्मल और स्वस्थ हो गया है ! हमारे पहाड़ों की बर्फ़ीली चोटियाँ नज़र आने लगी हैं ! मोदी जी ने हमें सिर्फ़ दीप प्रज्जवलित करने को कहा और हम नासमझों ने शँखों, घंटों की ध्वनि को आतिशबाजी के विस्फ़ोट में दबा दिया ! एक आध्यात्मिक माहौल को हमने भड़ाम - भड़ुम के शोर में बदल दिया ! कानों को प्रिय लगने वाली कर्णप्रिय वाणियों के बदले दिल दहलाने वाले शोर में बदल दिया ! क्या हम इतने नासमझ हैं, शायद भेड़ - चाल है हमारें देश में ! हमने आतिशबाजी चलाकर उसका परिचय दिया ! दूसरीं तरफ हम दूसरें देशों के लिए मिसाल बनते जा रहें हैं ! हिन्दुस्तान कितनी शालीनता से कोरोना का सामना कर रहा हैं, कृप्या करके अपनी इस शान को बरक़रार रखें ! कोई भी बचकाना हरक़त हमारें लिये नुकसानदेह हो सकती हैं, उससे बचें !



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