नारी तुम क्या हो
नारी तुम क्या हो
नारी तुम क्या हो
काली, दुर्गा, लक्ष्मी
या सरस्वती का रूप
कहते हैं सब
खुशियों का संसार हो तुम
जीने का आधार हो तुम
प्रेम की मूरत हो
जीवन का आगाज तुमसे
कभी कठोर कभी सरल
कभी पी लेती हो गरल
ममता, शक्ति, प्रेम
सब तुमसे ही है
संस्कार निभाती तुम
सबको हँसाती तुम
दर्द, त्याग , बलिदान
संसार में पहचान तुम्हीं से
तुम सब कुछ हो
पर कुछ भी नहीं
ये है बिडंबना
समाज की
पहचान को तरसते
आखिर !
नारी तुम क्या हो ?
