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Ritu Purohit

Abstract Others

4.0  

Ritu Purohit

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मृगमरीचिका

मृगमरीचिका

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वो ऐसे घर में पैदा हुई थी,जहां सब एक साथ रहते थे एक दूसरे के साथ बिना किसी तरह की बनावट के रहते थे। सबके बीच समानता का भाव था, जो जिसकी जगह थी वो उसे मिली हुई थी हां,19,20का फ़र्क जरूर होता था,पर इतना हो सकता है। वो कोई मशीन से बनी चीजें नहीं थी की एक जैसी हों और उनके साथ सब सामान व्यवहार हो। दूसरे परिवारों में  बहुत ज्यादा का फर्क होता है जो उनके यहां बिलकुल भी नहीं था ।

उसके बचपन के खेल, पढ़ाई -लिखाई और परिवार बड़ा होने की वजह से न तो पता चला ना ही कभी ध्यान गया की उनके घर की दुनिया और बाहर की दुनिया का अंतर क्या है, और वो बड़ी होती गई, वो हमेशा अपने परिवार के नियमों तौर तरीकों को ही देखा करती थी। वे ही उसकी खुद की पहचान भी बन गए थे।

जैसे परिवार में सभी कुछ अच्छा था उसी तरह उसके शहर में हर तरफ़  आस पास हरियाली थी उसे ये पता तो था कि रेगिस्तान होता है और वहां पानी की कमी की वजह से पेड़ पौधे न के बराबर होते हैं, पर उस सूखेपन को महसूस  नहीं कर पाई थी उसके मन पर  हमेशा वो सुकून देने वाली हरियाली ही छाई रहती थी। 

वो बड़ी हुई पढ़ाई पूरी होते, न होते उसका विवाह कर दिया गया।

अब वो विवाह के बाद बिलकुल नए माहौल  में पहुंच गई थी। उसे पता था कि उसके घर जैसा न कोई रिश्ता वहां होगा, ना ही माहौल और न ही खान पान।ये सब  उसे पता जरूर था पर समझी वो तब जब वहां जा कर उसे जीने लगी और तब उसे असली अंतर पता चला हरियाली और रेगिस्तान का।


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