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Ritu Purohit

Comedy Drama Others

4.5  

Ritu Purohit

Comedy Drama Others

पति vs पत्नी

पति vs पत्नी

12 mins
9

कल रात को अचानक तबियत खराब होने के बाद जब वो आराम करने जैसे तैसे खुद को संभालती हुई बिस्तर पर पहुंची 

उसे इतने चक्करों के आने का कारण समझ नहीं आया वैसे भी उस हालत में वो कुछ भी सोच समझ नहीं पा रही थी बस तबियत पर से ध्यान हटाने के लिए मोबाइल में जो  कुछ भी सामने दिखा उसे चला दिया उसे नींद या कहें अर्ध बेहोशी की सी हालत में देखने के बाद भी उसका पति आराम से खुद के मोबाइल पर कुछl रील्स देखने में बिजी था।

बस कुछ ही देर बाद उसे थोड़ा होश आया, वो उठी उसे टॉयलेट जाना था प्यास भी लगी थी रात काफी हो चुकी थी उठ कर पानी पी कर वो कमरे से बाहर निकली मेन दरवाज़ा चेक किया,उसे ठीक से बंद किया फिर किचन में जा कर गैस सिलेंडर का नॉब बंद किया, ये उसकी हमेशा की आदत थी। 

दूध गरम तो कर चुकी थी पर उस पर प्लेट नहीं रख पाई थी और सब्जी आदी के छिलके गाय के खाने के लिए घर से थोड़ी दूर सीमेंट से बनी टंकी में डालने गई थी  उस टंकी का यूज आस पास के घरों के लोग गाय के लिए घर का बचा खाना, सब्जी के छिलके आदि डालने के लिए करते हैं।

घर से निकली तभी उसे चक्कर आने लगे थे और वो ये बात उसके पति को कह चुकी थी पर उसने कोई मतलब दिखाए बिना कहा "कल सुबह चली जाना अभी क्यों जा रही हो",

वो कह सकता था की तुम रहने दो, दो मकान दूर  ही है "मैं डाल आता हूं इसे"  पर वो तो हमेशा से ऐसा ही है कभी  भी किसी काम में उसका मदद करना ऐसा है जैसे साल में आपका जन्म दिन आता है, 

वो चली तो गई पर वहां पहुंचते ही चक्कर बहुत बढ़ गए और पास पड़े बड़े से पत्थर पर उसे बैठना पड़ा

 वहां थोड़ी देर में खुद को संभाल कर पास बने मकान की बाउंड्री वॉल की रेलिंग पकड़ पकड़ कर गेट के अंदर आ कर वो पास ही जमीन के अंदर बनी पानी की टंकी के फर्श पर लेट ही गई 

उसकी हिम्मत ही नहीं हो पा रही थी एक  भी कदम चलने की,कमजोरी और चक्कर इतने ज्यादा थे कि उसे लगा आज कुछ हो ही जाएगा। 

मकान मालिक जिनका घर उसके घर से सट कर ही बना हुआ है की बीबी बाहर ही थी गेट लॉक करने आई थी उसने उसे देखा और उसे अनदेखा कर जल्दी से अन्दर चली गई और जोर से दरवाज़ा बंद कर दिया, ऐसा लगा उसे बिना  बोले सुना रही हो कि मुझे तुझ से कोई मतलब नहीं है। 

वो इस हालत में नहीं थी कि ये सब देखे और इस पर ध्यान दे वैसे भी मकान मालिक और उसका परिवार गांव की पृष्ठ भूमि से हैं और लालची, झूठे,चुगलखोर हैं उसे इन सब बातों का पता होता तो किसी भी कीमत पर इस मकान में रहने नहीं आती।

यहां भी उसके पति ने अपनी दादागिरि चलाई और उन लोगों को इस मकान में शिफ्ट होना पड़ा।

पर ये सब तो उसे तब  ध्यान आया याने अगले दिन जब वो कल की बातों को याद कर रही थी। 

थोड़ी देर टंकी के फर्श पर लेटे हुए उसने पूरी ताकत समेटी और जैसे तैसे खुद उठ कर घर के दरवाज़े तक गई जो की उस जगह से  पंद्रह कदम की दूरी पर था। बस उसे यही लगा हर कदम पर कि अब गिरी की तब। 

दरवाज़े के अंदर पास ही रखी कुर्सी पर खुद को पटकते हुए,बिलकुल ऐसी हालत थी कि बस शरीर पूरी तरह निचूड़ गया हो

 सामने ही उसका पति बैठा था उसे इस तरह देख कर उठ कर आया और थोड़ा चिढ़ाता हुआ बोला "बस तुम्हारा यही है " उसका हर बार का रटा रटाया वाक्य बोल दिया। उसे पति के इस व्यवहार पर तेज़ गुस्सा आया कि इतनी देर तक वो (उसकी बीबी) रात को बाहर गई है सब्ज़ी के छिलके डालने और आई नहीं है तो न तो उसने जाने की जहमत उठाई और न ये देखने की कि वो अब तक वापस नहीं आई है उसे चक्कर आ रहे थे देख ही लूं,उल्टा बातें सुनाने लगा।

दुनिया में कोई आपका नहीं होता खास तौर पर शादी से बने रिश्ते तो बिलकुल भी आपके नहीं होते वो तो ऐसे होते हैं कि न जीने देते हैं ना मरने और छोड़ तो आप बिलकुल नहीं सकते।

रात को टॉयलेट से आ कर लेटी और थोड़ी ही देर में तेज हवा चलने लगी मौसम खराब हो गया था उसे ठंड लग रही थी तो उसने पति को पंखा बंद करने को कहा

 वो पहले अनसुना कर दुसरी बात करने लगा ताकि बात बदल जाए और बीबी भूल जाए की पंखा बंद करने को कहा है, मौसम ठंडा ही था 24,25 डिग्री चल रहा है और लोग ac में इतना टेंप्रेचर सेट करते हैं 

पर उसके पति को हमेशा पति बन कर बस बात मनवानी है चाहे जरूरी ना भी हो  पर पंखा चलेगा।

वो खुद बिना पंखे के आराम से सो पाती है और कई बार उसके पति की वजह से पंखा चलने देती है खुद ओढ़ कर सो जाती है और जब उसके पति को उसे धौंस दिखानी होती है या खुद का टाइम अकेले बिताना होता है तो गर्मी का बहाना करके खुद दुसरे कमरे में जा कर सो जाता है भले ही बीबी की तबियत खराब हो और उसे शायद रात में कोई मदद चाहिए हो  पर वो सिर्फ खुद की मर्जी से चलता है।

आज सुबह ही उसकी नींद पांच बजे खुल गई उसने चार्ज करने को लगे फोन का स्विच बंद किया और फिर से सोने की असफल कोशिश करने लगी पैरों का दर्द सोने नहीं दे रहा था कमर भी अकड़ी हुई थी और उसका बायां कंधा तेज दर्द में अंगुलियों तक डूबा हुआ था जैसे तैसे उसे छह बजे के बाद नींद आई फिर उसके पति के तेज खर्राटों ने उसे फिर उठा दिया 

चिढ़ से,दर्द से उसे और गुस्सा आ रहा था उसने पति को जोर जोर से हिलाया कि जब वो सो नहीं पा रही तो वो कैसे आराम से सो सकता है।

उनके झगड़ों का एक बड़ा कारण वो तेज़ आवाज़ वाले खर्राटे और उनको उसके पति का जायज़ ठहराना है। वो आज तक यह बात मान ही नहीं सका कि उसकी पत्नी की नींद उसके खर्राटों की वजह से पूरी नहीं होती और टूटी फूटी नींद उसकी बीमारी को लंबा कर देती है।

पति पत्नी के रिश्ते में पति हमेशा सेवाएं लेने में लगा रहता है और पत्नी दुखी रहने के लिए उसके साथ रहती है। जैसे कोई सजा  मिली हो उसे जो पूरी उम्र चलेगी 

पति अपने को मर्द ही शायद तब मानता है जब वो उसकी पत्नी को हर तरह से दुखी कर लेता है। 

ऐसा जीवन जीते हुए आप क्या तो बन पाएंगे, क्या नया ढूंढ पाएंगे और क्या ही आपका परिवार आगे बढ़ पाएगा।


खैर इसे यहीं छोड़ते हैं अब खर्राटों को बंद करा कर जैसे तैसे उसे झपकी आई ही थी की उसके उठने का टाइम हो गया सात बजने वाले थे वो उठी और जा कर ब्रश किया रसोई में जा कर दोनों के लिए चाय बनाई उठने के बाद से अभी चाय पी कर टॉयलेट जा कर आ जाने के बाद तक उसके पति ने एक शब्द भी उस से कोई बात नहीं की और न तबियत पूछी न ही कुछ और कहा और जा कर बेडरूम के पलंग पर अध लेटे रह कर अपना मोबाइल यूज करता रहा।

वो सामने ही लगी सोफे की कुर्सी पर बैठी थी अचानक वो उठा और कमरे की एक मात्र खिड़की जो मकान मालिक के साइड खुलती है वैसे उसे वेंटीलेटर कहें तो ज्यादा ठीक होगा खिड़की की ऊंचाई से कहीं ज्यादा ऊपर बनी 4 x 1 फीट की  हवा के लिए बनी जगह है  वो भी बिना दरवाजे की

 उस से ठंडी हवा या पानी  को अंदर आने से रोकने के लिए बेचारी उसके सामने लकड़ी का एक फट्टा लगाती है  बस उसी से उस खिड़कीनुमा जगह को बंद करता दिखा वो, तो वो पूछ बैठी क्या हुआ,तो देखा बाहर से तेज धुंआ कमरे में भरने लगा था और वो उसे ही रोकने की नाकाम कोशिश कर रहा था जब तक वो वहां पहुंची और स्टूल  के ऊपर चढ़ कर पूरी तरह खिड़की बंद करती उसे दिखा खिड़की के बाहर तो बहुत ज्यादा धुआं हो रहा है और मकान मालिक की बुढ़िया पत्नी उसे और जलाए जा रही है 


रात को हुई थोड़ी सी बारिश से उसके पत्ते और पतली लकड़ियां गीली हो गईं थीं और वो उनको जला कर धुआं ही धुआं कर रही थी। वो पहले से अपनी खराब तबियत और पति के बेहूदे बरताव से दुःखी थी ही उपर से उसका पति धुआं करने वाले को मना करने की जगह खिड़की को बंद करने की नाकाम कोशिश करता रहा ऐसे जैसे कोई अपने बच्चे की गलती पर पर्दा डालता है।


इतना करने पर भी धुआं कहां रुकता कोई फिक्स दरवाजा तो उस खिड़कीनुमा जगह पर नहीं लगा था काफी गैप था उस से पूरे घर में धुंआ ऐसा भरा कि बैठना मुश्किल हो गया और उसका पति ऐसा दिखावा करने लगा कि उसे ना धुआं दिखा और न ही कोई दिक्कत हो रही  है बल्कि ऑफिस जाने के लिए नहाने चला गया। 


वो बेचारी अस्थमा की दिक्कत से कई बार हॉस्पिटल इमरजेंसी में गई है पर उसके पति परमेश्वर तो उसके साथ ऐसे रहते हैं जैसे ट्रेन या बस में यात्री एक दूसरे के साथ।


अब उसका पारा सातवें आसमान पर था वो तो थोड़ी देर में चला जाएगा घर से बाहर और उस धुएं वाले घर में परेशान होती वही रह जाएगी अकेली। 

पूरे 2 साल हो गए इन लोगों के चूल्हे के धुंए को बरदाश्त करते 

वो उठ कर बाहर वाले कमरे में चली जाती या सहन कर लेती और ये लोग भी दिन में कई बार उस चूल्हे को जलाते ही रहते हैं। 

सरकार ने इस तरह के चूल्हों पर बैन लगा रखा है पर अपने आप को गांव का बता कर सरकारी ऑफिस में काम करके उनके पढ़े लिखे बेटा बहू भी ऐसी फुहड़ता दिखाते हैं तो नाराज़गी उनके लिए बनती ही है।

उसने सोचा बहुत हो गया अब तो उसके बोले बिना कुछ नहीं होगा उसकी मां कहती थीं "मरे बिना स्वर्ग नहीं" बस वो उठी उस बंद करने के लिए लगे लकड़ी के फट्टे को हटाया और बोली " माताजी बंद करो ये धुआं करना यहां कमरे में बैठा नहीं जा रहा पूरे घर में धुआं हो गया है " पर बुढ़िया अपने मालकिन होने की अकड़ हमेशा ही दिखाती आई है उसने उसकी बात अनसुनी की और जोर जोर से फूंक मार कर गीली पत्तियों को जलाने की नाकाम कोशिश से  धुएं को और बढ़ाने लगी।


 उसकी इस अनदेखी ने उसे और बोलने पर मजबूर कर दिया वो जोर से बोली किराए पर मकान आराम से रहने के लिए लिया है तुम्हें किराएदार चाहिए अच्छा आदमी छोटा परिवार सीधे लोग और खुद को देखो रोज़ तंग करते हो हटाओ अपना चूल्हा यहां से तो बुढ़िया जवाब में बड़ी अकड़ से बोली चूल्हा तो नहीं हटेगा तो वो बोली तो पैसे खर्च करके इस पर पाइप लगाओ धुआं निकलने का वैसे भी सरकार ने चूल्हे बैन कर रखे हैं इन्हें नहीं जला सकते शहर में और गांव की आदतें रखनी हैं तो वहीं जा कर रहो। यहां तंग मत करो लोगों को। 


 बुढ़िया फिर बोली सिलेंडर की दिक्कत है,, ये झूठ सुनते ही उसका दिमाग और खराब हो गया अभी  बीस दिनों पहले उसने अपना गैस सिलेंडर बुक करवाया था और ईरान ,अमेरिका इजराइल वॉर शुरू हो गई तो इन लोगों ने पहचान का फायदा उठा कर तीन दिन लगातार  रोज दो दो करके कुल छह गैस सिलेंडर ले लिए हमारा गैस सप्लायर एक ही है और अपनी बुकिंग की वजह से वो गाड़ी के  आते ही ये सोच कर की उसका ही ऑर्डर आया होगा खिड़की से देखती और पडोसी को सिलेंडर लेता देखती दोनो मकानों के बीच दीवार नहीं बना होना परेशानी तो बहुत करता है पर कभी कभी ऐसी जानकारी लेने में काम भी आ जाता है।

जैसे ही बुढ़िया का झूठ सुना तुरंत उसने उसे कहा झूठ मत बोलो कितने सिलेंडर ले चुके हो मैने खुद देखा है और इतना पैसा है बचा कर क्या करोगी धुएं  से खुद के कैंसर तो होगा ही बाकियों को भी बीमार कर रही हो इस धुएं से बूढ़ी हो नाती पोतों वाली, उनको क्या सिखाती हो? अपने घर में?

 पब्लिक पार्क में पेड़ों की छंटाई हुई तो इन लोगों ने काफी सारी लकड़ी वहां से उठा ली जो की उस ठेकेदार की थी उसी लकड़ी को सारी ठंड जलाते रहे हैं पूरी छत भर गई इतनी ज्यादा लकड़ी थी। 

ये गांव वाले शहर वालों से कहीं ज्यादा चालाक होते हैं और करप्ट भी,तुरंत ही उसके मन में आया 

अभी इसे बंद नहीं कराया तो ये और ज्यादा करेगी तो वो उस बुढ़िया को बोली बुढ़ापा है आज हो कल दुनियां से चली जाओगी टाइम नहीं है तुम्हारे पास ज्यादा, अच्छे काम करो, लोगों को तंग करना, चुगली करना बंद करके राम का नाम लो तो किए हुए पाप कम होंगे, सिर्फ आते जाते "रोम रोम" (गांव वाले राम को रौम कहते हैं यहां) करना काफी नहीं है। तो बुढ़िया ने कईयांपना दिखाया और बोली "खाली करदे मकान दिक्कत है तो" 

बस उसके इस बकवास वाक्य ने ईरान अमेरिका वॉर टाइप हालत बना दिए उधर उसका पति इतना सब होता देख कर भी बिलकुल नॉर्मल बना ऑफिस जाने की तैयारी में लगा रहा वो तो वैसे भी सहयात्री की भूमिका में ही है हमेशा से 

बुढ़िया की बकवास और फुहड़ता के सामने उसके वाजिब पॉइंट्स को सुन कर बुढ़िया की बहू घर के अंदर से सब सुन कर आई और बोली "बंद कर दो" पर वो कहां मानने वाली थी अकड़ के लगी रही चूल्हा फूंकने में तो अपने पति जो कभी कही साथ नहीं देता का नाम ले कर वो बोली "मेरे पति घर में हैं यहां आराम कर रहे हैं सारा सारा दिन काम करके यहां कोई आराम भी नहीं कर सकता इनकी बत्तमीजियों से,

 मकान मालिक ऐसे होते हैं राक्षस हैं ये लोग कल रात से मेरी तबियत ठीक नहीं पूरी रात नींद नहीं आई है और अब इनकी बकवास और धमकी भी सुनो।" उसने खुद रात को अपने किराएदार की बीबी को बुरी हालत में देख कर अनदेखा किया था अब उसकी बहू ने जोर डाला तो उसको जाना पड़ा लकड़ियां बुझा कर 

आप लड़ते हैं खुद के और परिवार के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ पर हालत तब बुरे हो जाते हैं जब आप अकेले रह जाते हो और जिनके लिए आगे आ कर लड़ते हो वो और आपके अपने कहलाने वाले आपको अकेला छोड़ कर बुरा बना देते हैं सबके सामने बस जो जैसा है उसकी सच्चाई आपके सामने आ जाती है।

अगर आप लड़ाई लड़ कर  जीत गए तो वो सभी उस जीत से मिलने वाले फायदे को भोगने आ जाते हैं पर जो नुकसान हुआ उसे बस आप खुद ही झेलो।  यहां उसे एक बात और भी समझ आ गई कि सच के साथी बड़ी मुश्किल से मिलते हैं पर झूठ के पीछे हुजूम अपने आप बन जाता है।


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