चिड़िया सी ज़िंदगी
चिड़िया सी ज़िंदगी
पेड़ की ऊंची, पतली डाल पर बैठी
छोटी सी
चिड़िया सी
ज़िंदगी
कभी ऊंचे आकाश को पीछे छोड़ देती
उसकी उड़ान सी विस्तृत ज़िंदगी
कभी अपने घोंसले में दिये अंडों
और उन अंडों से निकले चूजों को बचाने,
बिल्ली का शिकार
हो जाने से रोकने
पूरी ताकत लगा
जोर जोर से शोर मचाती
शेरदिल सी ज़िंदगी
कभी चुपचाप एक डाल पर बैठ
तेज़ हवा और पानी की बौछारों को
सहती चिड़िया सी
सहमी
ज़िंदगी
कभी दानें ढूंढती
इधर उधर फुदकती
कड़ी धूप में, चोंच खोल
पानी की तलाश करती
उस चिड़िया सी परेशान ज़िंदगी
सूरज निकलने से पहले
उजियारे को,चहक कर
सलाम करती
और सूरज ढलने पर
फिर उसे आने को कहती,
उस छोटी चिड़िया सी मचलती ज़िंदगी
फिर शाम घिरे
शोर मचा मचा कर
सभी को
सूरज के जाने की
खबर सुनाती
उतावली सी ज़िंदगी
छोटी सी चिड़िया सी,
छोटी लगती पर बड़ी लंबी ज़िंदगी...
