VIVEK AHUJA

Crime


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महाठग

महाठग

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आज अचानक प्रॉपर्टी डीलर राकेश , के लाल के पास दोपहर के समय किसी अमर नाम के व्यक्ति को लाया और बोला की "के लाल साहब आप के प्लाट के लिए मैं एक ग्राहक लेकर आया हूं" राकेश ने बताया कि यह अमर साहब है सेना से रिटायर हैं और आपके शहर में बसना चाहते हैं। इसलिए मैं इन्हें आपका प्लॉट दिखाने के लिए लेकर आया हूं ।चाय पानी की औपचारिकता के पश्चात के लाल साहब अपने स्कूटर पर बिठाकर अमर को अपना प्लाट दिखाने के लिए ले गए ।राकेश भी मोटरसाइकिल से वहां पहुंच गया। अमर को प्लॉट पसंद आ गया और उसने के लाल की मुंह मांगी कीमत पर प्लाट खरीद लिया। राकेश को भी उसका कमीशन मिल गया इसके पश्चात के लाल व अमर मे अच्छी छनने लगी , रोज का मिलना जुलना होने लगा ।


एक दिन अमर बोला "के लाल साहब मैं अपने परिवार को यहां लाना चाहता हूं ,मुझे कोई किराए का मकान दिलवाए" क्योंकि अमर लाल साहब की गुड बुक में आ चुका था, लिहाजा के लाल ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर अमर को रहने के लिए मकान दिलवा दिया । जल्द ही अमर अपनी पत्नी छोटे लड़के व बड़े लड़के की बहू के साथ किराए के मकान में आ गया । उसने के लाल को बताया की उसका बड़ा लड़का पंजाब में ही उसकी खेती बाड़ी देखता है वह कभी-कभी आया करेगा ।अमर जल्द ही अपना मकान बनाना चाहता था लिहाजा उसने के लाल से मकान बनाने हेतु हर संभव मदद करने की गुजारिश की ,के लाल भी अमर की गुजारिश को मना नहीं कर पाए और उनसे हर संभव मदद करने का वादा किया। के लाल ने अपने एक परम मित्र मनजीत से अमर की मुलाकात करवाई । मनजीत रेता बजरी आदि का काम करते थे, धीरे धीरे अमर मनजीत व के लाल मैं काफी उठना बैठना हो गया मनजीत से अच्छे संबंध होने के कारण रेता बजरी आदि की कोई समस्या ना रही और अमर का मकान जल्दी जल्दी बनने लगा । करीब 6 माह के भीतर अमर ने आलीशान मकान खड़ा कर लिया मकान की कंस्ट्रक्शन की खास बात यह रही कि जिस व्यक्ति ने जो कीमत मांगी अमर ने किसी को मना नहीं किया और उससे उसकी मुंह मांगी कीमत पर काम करवाया ।

जल्द ही अमर के आलीशान मकान का गृह प्रवेश भी हो गया अमर ने अब के लाल व मंजीत से कहा "मै सेना से रिटायर हूँ हट्टा कट्टा हूँ व कुछ काम करना चाहता हूं" लिहाजा मनजीत व के लाल के प्रयासों से अमर ने जल्द ही जनरल स्टोर की दुकान भी खोल ली इसी बीच अमर ने आवागमन की परेशानी का हवाला देते हुए मनजीत की गारंटी पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से एक मारुति कार लोन पर ले ली । धीरे-धीरे समय व्यतीत होने लगा अमर व के लाल करीब-करीब रोज संपर्क में रहते, दिन आराम से कट रहे थे की एक दिन अचानक मनजीत के घर आठ 10 लोग आए और अपना रोना रोने लगे "हम तो लुट गए, बर्बाद हो गए" मनजीत ने अपने मित्र के लाल को बुला लिया और लोगों को चुप करा कर पूरी बात तफ्सील से सुनी तब लोगों ने बताया कि वह अमर के घर लकड़ी का काम कर रहे थे और राज मजदूरी का भी उन्होंने काम किया था । उन्होंने बताया कि जब से हम अमर का मकान बना रहे हैं ,व मकान बनाने के पश्चात लकड़ी का काम कर रहे हैं ,हमें पूरी मजदूरी नहीं मिली है ।बल्कि मकान बनाने के दौरान अमर ने उन्हें सुहावने सपने दिखाकर लाखों रुपए भी ऐठ लिए हैं मनजीत व के लाल ने उनसे विस्तार पूर्वक सारी बात बताने को कहा तब उन्होंने बताया की अमर ने अपनी वर्दी का रौब दिखाकर कई बार बताया कि वह सैकड़ों बच्चों की सरकारी नौकरी लगवा चुका है । उसकी बहुत ऊपर तक पहुंच है और वह उन लोगों से लगातार संपर्क में रहता है ।सरकारी नौकरी व सेना में भर्ती के लालच में राज मजदूर व लकड़ी मिस्त्री ने अपने रिश्तेदारों के बच्चों के लिए 15/20 लोगों की नौकरी की बात की और प्रति व्यक्ति लाखों के हिसाब से अमर को करीब 20 लाख रुपए दे चुके हैं ।लेकिन नौकरी की तो बात छोड़ो अब अमर हम लोगों का फोन भी नहीं उठा रहा । आज जब सभी लोग उसके घर गए तो यह देखकर भौचक्का रह गए कि अमर के घर पर तो ताला लगा हुआ है ।सारी बातें सुनकर मनजीत व के लाल के पैरों तले जमीन खिसक गई ।वह जिस आदमी को बहुत अच्छा समझ रहे थे वह तो बहुत बड़ी ठगी कर कर यहां से भाग चुका था । के लाल व मनजीत ने सभी लोगों को समझाया कि उसका मकान तो यही है आपके साथ पूरा न्याय होगा। मनजीत ने एक बात और बताई कि उसने मनजीत सिंह की गारंटी पर बैंक से कार भी ली हुई है गारंटर होने के नाते लोन का भुगतान गारंटर को ही करना पड़ता है । सभी लोग यह सुनकर अवाक रह गए ।के लाल व मनजीत ने लोगों को समझा कर घर भेजा कि वह अमर से फोन पर संपर्क करने की कोशिश करेंगे । इसके अलावा उन लोगों ने अमर के खिलाफ थाने में तहरीर दे दी काफी दिनों तक मनजीत व के लाल अमर से संपर्क करने की कोशिश करते रहे लेकिन अमर का फोन स्विच ऑफ ही आता रहा ।


जब काफी माह बीत गए तब अखबार के माध्यम से उन्हें यह पता चला कि मध्य प्रदेश के किसी स्थान पर अमर को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार होने पर अमर ने बताया कि वह पहले भी इस तरह की घटना को अंजाम दे चुका है और लोगों से लाखों रुपए ऐठ चुका है । उसका यही धंधा था इस तरह वह ठगी करके एक स्थान से दूसरे स्थान को चला जाता था । जब लोगों को पता चला की अमर गिरफ्तार हो गया है तो काफी लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद उसके मकान की रजिस्ट्री का आर्डर कोर्ट से प्राप्त हुआ और ठगी की रकम का निपटारा हुआ । लेकिन मंजीत , बैंक में गाड़ी के लोन में गारंटर था उसे गाड़ी के लोन के पैसे अपनी जेब से ही चुकाने पड़े मनजीत ने कोर्ट के चक्कर काटना ठीक नहीं समझा । के लाल व मंजीत अब जब भी खाली समय में साथ बैठते हैं और अमर के विषय में सोचते हैं तो कान पकड़ जाते हैं की ऐसे ठग से तो भगवान दूर ही रखें और मन में यह विचार करते हैं , ऐसे ही किसी व्यक्ति पर विश्वास करना कितना भारी पड़ सकता है ।



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