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Priyanka Gupta

Inspirational


5.0  

Priyanka Gupta

Inspirational


मेरी मम्मी और मम्मीजी

मेरी मम्मी और मम्मीजी

10 mins 624 10 mins 624

"देख बेटा, हमने रंजन की सगाई में औपचारिकता वश रेखा जी को निमंत्रित तो कर लिया है। लेकिन तू तो सब जानती ही है, उनको यहाँ देखकर लोग कानाफूसी करेंगे। हम किस-किस को जवाब देंगे? तू किसी बहाने से उन्हें वहीँ घर पर छोड़कर आना" नीरू की मम्मी मीरा जी नीरू से उसकी सास के बारे में फ़ोन पर बात कर रही थी।

"मम्मी, तुम तो अपने आपको बड़ा आधुनिक मानती हो। सलवार सूट, लैगिंग सब पहनती हो। यहाँ तक कि कभी-कभी जीन्स भी पहन लेती हो। फिर कैसी बातें कर रही हो?" नीरू ने आश्चर्य और रोष के साथ कहा।

"अरे, तू वह सब छोड़। दुनियादारी भी कुछ होती है। मैंने जो कहा बस उसका ध्यान रखना" नीरू की मम्मी मीराजी ने समझाते हुए कहा।

"मम्मा, पापाजी को लेके आऊँ या नहीं। ज़रा वह भी समझा दो" नीरू ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा।

"मत लाना, उन्हें देखकर भी तो वही बातें होंगी। तू और दामाद जी समय से आ जाना। ",नीरू के व्यंग्य को सुना -अनसुना करते हुए नीरू की मम्मी मीराजी ने कहा।

"चलो मम्मी, बाद में बात करती हूँ, मम्मीजी को दवा देनी है" नीरू ने कहते हुए फ़ोन रख दिया।

नीरू के इकलौते भाई रंजन की सगाई होने वाली थी। अपनी मम्मी की बातों पर उसे बहुत गुस्सा आ रहा था, लेकिन उसने अभी चुप रहना ही बेहतर समझा। आधुनिकता का दम्भ भरने वाली अपनी मम्मी की बातों और मानसिकता पर गुस्सा और तरस दोनों ही आ रहा था। 

नीरू दवाई लेकर अपनी मम्मीजी रेखाजी के कमरे में गयी। मम्मी जी घर भर के कपड़े इस्त्री कर रही थीं। मम्मी जी के चेहरे से नूर टपक रहा था, साक्षात ममता की मूर्ति लग रही थी। नीरू उनको एकटक देखते हुए सोच रही थी कि, देवियाँ ऐसी ही होती होंगी। हमेशा की तरह रेखाजी के चेहरे पर मुस्कान थी। कॉटन की साड़ी बड़ी तरतीब से पहने हुई थी, बालों का एक ढीला सा जुड़ा बना रखा था। ऐसी हालत में भी मम्मीजी अपने आपको और अपने कमरे को व्यवस्थित रखती हैं। नीरू ने उनसे ही समय प्रबन्धन सीखा था। 

"अरे क्या हुआ बेटा ?क्या देख रही है ?", रेखाजी की नज़र जैसे ही नीरू पर पड़ी, उन्होंने नीरू से पूछा। 

कुछ नहीं मम्मीजी, आप २ मिनट भी ख़ाली नहीं बैठ सकते। डॉक्टर ने आपको ऐसी हालत में आराम करने के सलाह दी है। कपड़े मैं इस्त्री कर दूँगी। आप दवाई खाकर आराम कीजिये। ",नीरू ने रेखाजी के हाथ से इस्त्री लेते हुए कहा। 

"बेटा, मेरे इस निर्णय के कारण वैसे ही तुम्हें इतना कुछ सुनना पड़ता है। घर की भी सारी जिम्मेदारी तुम्हारे कन्धों पर आ गयी है। कई बार मुझे बड़ी ग्लानि होती है कि एक अच्छी माँ बनने की चाह में, मैं एक अच्छी सास नहीं बन पा रही। तो मुझे माफ़ कर देना बेटा। ",रेखाजी ने रूँधे गले से कहा। 

"अरे मम्मीजी, आप तो दुनिया की सबसे अच्छी माँ और सास हैं। आपने तो मुझे अपनी बेटी की तरह सब सिखाया है। अब निम्मी दीदी की आख़िरी उम्मीद आप ही हो। निम्मी दीदी का दर्द मैं बख़ूबी समझती हूँ। आप तो इस घर का सबसे मज़बूत स्तम्भ हो। आप तो मेरी प्रेरणा हो। आप ऐसे निराश और दुःखी होंगी तो कैसे चलेगा ?", नीरू ने अपनी सास रेखाजी को दवाई खिलाते हुए कहा। 

"अरे, रंजन की सगाई होने वाली है। तुम कुछ दिन पहले ही चली जाना, काफी तैयारियाँ करवानी होती हैं। मैं निम्मी को फ़ोन करके बोल देती हूँ कि कुछ दिन छुट्टी लेकर यहाँ आ जाए। ",रेखाजी ने लेटते हुए कहा। 

"नहीं मम्मीजी, ऐसी कुछ खास तैयारियां नहीं करनी हैं। शॉपिंग तो सब होने वाली दुल्हन को मम्मी और रंजन ने करा ही दी है। निम्मी दीदी आपको देखकर दुःखी होती हैं। उन्हें लगता है उनकी वजह से आपको इतनी तकलीफ़ झेलनी पड़ रही है। वैसे भी उन्हें बाद में बहुत छुट्टियाँ लेनी होंगी। ",नीरू ने कहा। 

"हाँ, मीराजी तो खुद ही इतनी आधुनिक हैं। आजकल के फैशन का पूरा सेंस हैं और आज की पीढ़ी के साथ पूरा घुलमिल जाती हैं। रंजन की होने वाली पत्नी बड़ी भाग्यशाली है, इतनी बढ़िया सोच वाली सास मिली हैं। देखो इस हालत में भी, मुझे तक सगाई में बुलाया है। ",रेखाजी ने मुस्कुराते हुए कहा। 

मम्मीजी, मम्मी के बारे में कितने अच्छे विचार रखती हैं और एक मम्मी को देखो। मम्मी इतने मुखौटे लगाकर कैसे घूम लेती हैं। अब मम्मीजी को क्या बताऊँ ? बेचारी बिना बात ही दुःखी हो जायेंगी। "जी, मम्मी जी, चिंकी उठने वाली होगी, मैं उसे देखकर आती हूँ। ",अपने सोच के घोड़े पर लगाम कसते हुए नीरू ने कहा। 

"हाँ, जाओ बेटा। एक और बात अपनी होने वाली भाभी को सगाई में तोहफे में क्या दोगी ?मैं सोच रही थी कि अभी सोने के कंगन दे दो, शादी में कंगन के मैचिंग का सेट दे देना। रंजन के लिए भी एक सोने का ब्रेसलेट अभी ले लो, शादी का बाद में सोच लेंगे। ",रेखाजी ने कहा। 

"अरे मम्मीजी, इतने महँगे तोहफे देने की क्या जरूरत है ?",नीरू ने अपनी आँखें बड़ी करते हुए पूछा। 

"कैसे नहीं है जरूरत।?भूल गयी तुम तुम्हारी ननद निम्मी ने भी तो तुम्हें ऐसे ही तोहफे दिए थे। ",रेखाजी ने कहा। 

निम्मी दीदी तो खुद भी नौकरी करती हैं, इसलिए आराम से इतने महँगे तोहफे दे सकती थी। लेकिन मम्मीजी तो मुझे भी वैसे ही तोहफे देने के लिए कह रही हैं। जहाँ पीहर वालों को कुछ भी दे दो तो ससुराल वालों के मुँह फूल जाते हैं, वहाँ मम्मीजी तो हमेशा मैं जितना सोचती हूँ ;उससे भी चार क़दम बढ़कर मेरे पीहर वालों का मान-सम्मान करती हैं। मेरी मम्मी भी न कई बार सही लोगों के लिए गलत बातें बोल देती हैं। ऐसा सोचते हुए नीरू ने कहा, "जी मम्मी जी" और वहाँ से चली गयी।

नीरू ने अपने कमरे में झाँककर देखा तो चिंकी अभी सो रही थी। नीरू भी चिंकी के बगल में जाकर लेट गयी। नींद तो उसे आ नहीं रही थी ;वह अपनी मम्मी और मम्मीजी के बारे में सोचने लगी। 

जब चिंकी होने वाली थी ,तब रेखाजी ने नीरू का बहुत अच्छे से ध्यान रखा था। उस समय निम्मी दीदी भी गर्भवती थी। नीरू की शादी से पहले से ही निम्मी दीदी की शादी हो चुकी थी। शादी के बाद निम्मी दीदी का २ बार मिस्कैरेज हो गया था और अब वह तीसरी बार गर्भवती थी। डॉक्टर के सारे निर्देशों का पालन करने के बावजूद , तमाम सावधानियाँ रखते -रखते भी निम्मी दीदी का इस बार भी मिस्कैरेज हो गया था। अबकी बार तो डॉक्टर ने यह भी बता दिया कि ,"निम्मी दीदी का गर्भाशय इतना कमजोर है कि दुबारा माँ बनने की कोशिश उनकी जान तक ले सकती है। "

निम्मी दीदी बहुत टूट गयी थी। तब नीरू ने सोचा था कि ,"वह अपनी होने वाली संतान को निम्मी दीदी को दे देगी। " लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। अगर सब कुछ हम इंसानों की सोच के अनुसार ही होता चला जाए तो ख़्वाब और हकीकत में अंतर समाप्त ही नहीं हो जाता क्या ?

चिंकी के जनम के समय हुए कुछ मेडिकल कॉम्प्लीकेशन्स की वजह से डॉक्टर ने जब नीरू को बताया कि ,"वह अब भविष्य में कभी माँ सकती। ", नीरू को तो समझ ही नहीं आ रहा था कि वह क्या कहे और क्या करे। फिर भी उसने रुई सी कोमल चिंकी को निम्मी दीदी की गोदी में डालते हुए कहा था कि ," दीदी ,आप इसकी बुआ नहीं माँ हो। यह आप ही की बेटी है। "

तब निम्मी दीदी ने अपनी आँसू भरी आँखों से ,रूंधे गले से सिर्फ इतना ही कहा कि ," नहीं भाभी ,मैं इतनी स्वार्थी नहीं हूँ। यह आप ही की बेटी है। जब मेरी किस्मत में मातृत्व का सुख ही नहीं है तो कोई क्या कर सकता है ?"

"नहीं दीदी ,आप जरूर माँ बनोगी। आप कोई बच्चा गोद भी तो ले सकती हो। ", नीरू ने कहा। 

"नहीं भाभी ,अपना खून तो अपना ही होता है। ",निम्मी दीदी ने अपने आँसू पोंछते हुए कहा। 

"अरे दीदी ,आपने सेरोगेसी के बारे में तो सुना ही होगा। ", नीरू ने निम्मी दीदी से पूछा। 

"हां भाभी ,सुना तो है। लेकिन सेरोगेट मदर मिलना थोड़ा मुश्किल है।",निम्मी दीदी ने कहा। 

तब ही मम्मी जी ने कमरे में प्रवेश करते हुए पूछा ," बेटा ,यह सेरोगेट मदर क्या होता है ?"

"मम्मा जब किसी औरत का गर्भाशय इतना कमजोर होता है कि गर्भ बार -बार गिर जाता है। तब परखनली में उसके अंडे से उसका भ्रूण बनाकर किसी और औरत के गर्भ में प्रत्यारोपित किया जाता है। जिसके गर्भ में प्रत्यारोपित किया जाता है ,वह सेरोगेट मदर कहलाती है। ", निम्मी दीदी ने समझाते हुए अपने चेहरे पर झूठी मुस्कुराहट के साथ कहा। 

"मम्मी जी ,काश मैं दीदी के लिए सेरोगेट मदर बन पाती। ", नीरू ने चिंकी को गोदी में लेते हुए कहा। 

दीदी चाहे कितना ही मुस्कुरा ले ,लेकिन माँ से कभी कुछ नहीं छुपता। जो माँ हमें गर्भ में ९ माह रखती है ,उससे कैसे कुछ छुप सकता है। मम्मी जी दीदी के दर्द को समझती थी। उन्हें यह भी पता था कि बच्चा ही पति -पत्नी के रिश्तों को मजबूत करता है। कहीं बच्चे की कमी उसके रिश्ते को भी कमजोर न कर दे ,अगर ऐसा हुआ तो निम्मी पूरी तरीके से टूट जायेगी। ऐसा सोचकर मम्मीजी ने कहा ,"निम्मी ,बेटा मैं तेरे बच्चे के लिए सेरोगेट मदर बन सकती हूँ। "

"नहीं मम्मी , अव्वल तो इस उम्र में मैं आपको इतना बड़ा जोखिम उठाने नहीं दे सकती। दूसरा मम्मी लोग भी तो कितनी तरीके की बातें करेंगे। हम किस-किस का मुँह बंद करते फिरेंगे। ",निम्मी दीदी ने नीरू की तरफ देखते हुए कहा। 

"हाँ ,मम्मी जी दीदी सही कह रही हैं। ",नीरू ने कहा। 

"सही कहाँ कह रही है। स्वास्थ्य जोखिम तो समझ आता है ,लेकिन पहले हम डॉक्टर से सलाह लेंगे ;उसके बाद ही प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे। तुम दोनों आज की लडकियां कब से लोगों की सोच की परवाह करने लग गयी। आधुनिक कपड़ों के साथ आधुनिक सोच तो रखती। ",मम्मी जी ने कहा। 

"अरे मम्मी ,लोग कहेंगे की नाती -पोते खिलाने की उम्र में खुद माँ बन रही है। अपनी उम्र का भी लिहाज़ नहीं। आपका कहीं भी आना -जाना मुहाल हो जाएगा। मम्मा रहना तो इन्हीं लोगों के बीच है। ",निम्मी दीदी ने कहा। 

"वही तो बेटा ,हम हर वक़्त उम्र की बात क्यों करते हैं। उम्र को महज एक अंक क्यों नहीं मान लेते ? ये मत पहनो ,ये मत करो ,अपनी उम्र का लिहाज रखो। उम्र कोई भी हो ,हर औरत पहले एक औरत होती है ;फिर बाकी कुछ। अव्वल तो वह तुम क्या कह रही थी ,भ्रूण तो परखनली में बनेगा न। और दूसरा अगर कोई पत्नी अपने पति के साथ अंतरंग पल बिता ले तो उसमें क्या बुराई है। एक माँ , माँ होने से पहले औरत भी होती है। हमें लोगों की घटिया सोच बदलनी चाहिए ,न कि उनके कारण अपनी ज़िन्दगी। ",मम्मी जी ने एक साँस में अपनी बात ख़त्म कर दी। नीरू और निम्मी दीदी दोनों मम्मी जी को एकटक देखे जा रही थी। 

तब ही नीरू ने ताली बजाते हुए निम्मी दीदी की तरफ देखते हुए कहा ,"वाह मम्मी जी ,आपने कितनी अच्छी बात कही। अपनी ज़िन्दगी क्यों बदले ?"

"अरे ,तू तो कुछ बोल। ",मम्मी जी ने निम्मी दीदी की तरफ देखते हुए कहा। 

"मैं अब क्या बोलूँ ?", निम्मी दीदी ने कहा। 

"मम्मीजी ,हम कल ही डॉक्टर के पास चलते हैं। अब तो दीदी की गोद में भी जल्द ही एक बच्चा होगा। ",नीरू ने चहकते हुए कहा। 

डॉक्टर से मुलाक़ात अच्छी रही। मम्मीजी को स्वास्थ्य से संबंधित कोई परेशानी नहीं थी। डॉक्टर ने प्रक्रिया शुरू कर दी। कुछ महीनों बाद मम्मीजी के गर्भाशय में निम्मी दीदी का भ्रूण सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित कर दिया गया। 

तब ही चिंकी जाग गयी और चिंकी की आवाज़ से नीरू की सोच का घोड़ा भी रुक गया था। नीरू चिंकी को चुप कराने लगी और कुछ ही देर में चिंकी खेलने लग गयी थी। 

मम्मीजी का पाँचवा महीना चल रहा था ;इसीलिए मम्मी चाहती थी कि मम्मीजी सगाई में न आएं। अब उनका पेट जो थोड़ा -थोड़ा दिखने लग गया था। 

नीरू ने एक निर्णय ले लिया था और उसने दोबारा अपनी मम्मी को फ़ोन लगाया और कहा ,"मम्मी अगर मम्मी जी नहीं आएँगी तो मैं भी नहीं आ सकती। "

"बेटा ,कैसी बातें कर रही है ?तुझे ही लोगों की सुननी पड़ती ;बस इसलिए कह रही थी। ",नीरू की मम्मी मीराजी ने कहा। 

नीरू ने रेखाजी द्वारा कही गयी बात ज्यों की त्यों मम्मी को बताते हुए कहा ," मम्मी लोगों की सोच के लिए हमें अपनी ज़िन्दगी नहीं बदलनी चाहिए। "

"बेटा ,तूने मेरी आँखें खोल दी। भगवान् हर लड़की को रेखाजी जैसी सास दे। तू अपने पूरे परिवार के साथ आना। हो सके तो तू २-४ दिन पहले आ जाना। अब तो ठीक है। ", मीराजी ने अपनी ग़लती स्वीकारते हुए कहा। 

"यह हुई न मेरी मम्मी वाली बात। ", नीरू ने चहकते हुए कहा। 


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