STORYMIRROR

Swapnil Ranjan Vaish

Inspirational

3  

Swapnil Ranjan Vaish

Inspirational

मैं किसके हिस्से में हूँ

मैं किसके हिस्से में हूँ

2 mins
276

" अरे भाभी... ओ भाभी... देखो तुमरे दोनों छोरे बाप की जायदाद को लेकर कैसे लड़े हैं...", संतो बुआ ने गोमती से कहा।

" अरे बुआजी, जब पिताजी बटवारा करके गए ही नहीं तो हमें ही तो करना पड़ेगा ना... ", बड़े बेटे ने बुआ को चुप कराते हुए कहा।


पिताजी और माँ हमेशा गाँव में ही रहे, शहर की हवा उन्हें कभी रास ही नहीं आई, कभी वसीयत भी नहीं बनवाई। दोनों को अपने बेटों पर ऐसा भरोसा था मानों उड़ती चिड़िया को अपने पंखों पर। क्या पता था कि पिता के जाते ही पैसा भातृ प्रेम के ऊपर हो जायेगा।


" क्या रे लल्ला... अभी तुमरे पिताजी की चिता ठंडी भी ना भई और तुम दोनों चालू हो गए, जे चेहरा तो आज तलक हमसे छुपा कर रखा तुम दोनों ने ", गोमती रोने लगी।


" अम्मा हम बार बार शहर से नहीं आ सकते इसलिए बटवारा जितना जल्दी हो कर निपटा लेना सही समझा, और कोई लड़ाई नहीं हुई है। वकील साहब ने हम दोनों को समान हिस्सा दे दिया है। " बड़ा बेटा बोला


" अच्छा... अच्छा अरे वकील साहिब जे तो बाताओ हमरी भाभी किसके हिस्से में लिखे हो? हैं...? "बुआ ने वकील की तरफ़ देखते हुए कहा।

" हाँ लल्ला बता दो हमें किसके साथ जाना है, अब माँ को तो काट के अलग कर ना सकत?" गोमती ने पूछा।

अब दोनों बेटे चुप थे, शहर की महंगाई में एक और सदस्य का खर्चा कैसे होगा?


" अरे माँ वहाँ शहर में कहाँ तुम्हें अच्छा लगेगा, वहाँ ऐसे खुले खुले घर नहीं होते। छोटे छोटे से घर हैं, तुम्हारा दम घुटेगा वहाँ", छोटे बेटे ने माँ का हाथ थामते हुए कहा।

" अरे भाभी... काहे जाना चाहती हो शहर, हम हैं ना इहाँ तुमरे साथ, छोड़ो इन नालायकों को, हम तुम नंद भौजाई रहेंगे ना इंहा खुले खुले अपने गाँव में... पर ऐ लल्ला मिलते आते रहना समझे... वर्ना डंडे से पिटोगे ", बोल बुआ ने गोमती को गले से लगा लिया।


गोमती ने धीरे से उनके कान में कहा " जिज्जी आज हमरी परवरिश हार गई, हम अच्छी माँ नहीं बन सके।"


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi story from Inspirational