Anju Kanwar

Inspirational


4.9  

Anju Kanwar

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मा की ममता

मा की ममता

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वो मासूम खेल रहा था। उसे पता भी नहीं था उसका आज उसका भविष्य बदलने वाला है। मात्र 5 साल का था वो। अभी तो स्कूल भी जाने नहीं लगा था दाखिला ले लिया था। परन्तु कोरोनो के लॉकडॉउन की वजह से छुट्टियां पड़ रही थी। उसके घर में बहुत भीड़ हो रही थी। लोगो का आना जाना लग रहा था। गाडियां खड़ी थी।  पर वो माँसूम कभी कभी लोगो को देखकर सहम जाता। फिर अपने खेल खेलने में मग्न हो जाता।। दो दिन से उसके मम्मी पापा के बीच झगडा चल रहा था। भोली भाली सी उसकी मम्मी रोजाना उसके पापा से पिट जाती। थप्पड़ खाना तो जैसे उसके लिए जरूरी बन गया था। फिर भी वो अपनी पति की इज्जत करती। कभी सामने नहीं बोलती। शादी के दूसरे दिन ही उसके पहला थपड़ पड़ा। ना चाहते हुए भी वो किसी को बता नहीं पाई। शायद उसे डर था।

अगर बोलती तो उसका घर टूट जाता। क्युकी समाँज से बस यही सब सुना था उसने। इस थपड़ के बाद ना जाने कितने थपड़ लगने लगे अब तो उसे खुद महसूस भी नहीं होता था। उसकी सास ससुर देवर सब बैठकर मजे लेते कभी अपने बेटे को रोकने की कोशिश भी नहीं की।। धीरे धीरे ये सब इतना बढ़ गया था कि। ना वो किसी को बता सकती थी। ना रोक पा रही थी। एक दिन उनके भाई का यहां आना हुआ। बताए बिना भी ना जाने भाई को कैसे महसूस हुआ। सब बातो को पता चल गया। उसी पल भाई ने अपनी बहन का हाथ पकड़ा और ले गया घर। वहां महिला आयोग में केस करवाया। कुछ दिन चला केस पर समाँज के डर की वजह से सब खतम कर दिया। और वो वापिस घर आ गई। कुछ दिन आराम से चला पर एक दिन उसे बहुत माँरा गया। फिर क्या था। माँयके से उसकी माँ भाई सब आ गए। पुलिस आ गई। आज का दिन यही था। जिसमें लोगों की भीड़ लग रही थी। आस पड़ोस के लोग केवल तमाँशा देख कर हस रहे थे। कोई आगे नहीं।  आज सबके सामने पूरे समाँज के सामने उसकी माँ उसका हाथ पकड़ कर खुद के साथ लेके जा रही थी। सबने उसके बेटे को ढूंढा पर उसपर हक जमाँते हुए उसके बाप ने गोद में उठा लिया। और कहा ये मेरे पास रहेगा।  

वो माँसूम मम्मी के पास जाने के लिए रोने लगा पर। उसकी मम्मी ने गाड़ी में हाथ बढ़ाया बेटे की तरफ। पर हाथ अंदर ही कर दिए। गाड़ी जाने लगी। उस माँसूम और उसकी माँ की नजर बस एक दूसरे को देखते जा रही थी। ना जाने अब ये नज़रे कब मिल पाती।  उस माँसूम का आज भविष्य बदल गया था। वो माँ को छोड़ चुका था। वह उस पिता की गोद में था जिसने उसकी माँँ को कभी इज्जत नहीं दी। आज उसे हक बनाकर गोद में थाम लिया। ना जाने ज़िन्दगी में कब उसकी माँँ से मिलना होगा।      


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