लंदन यात्रा के शुरू के 5 दिन
लंदन यात्रा के शुरू के 5 दिन
मन में बहुत उमंग और उत्साह लिए हम लोग बड़ौदा से कार में रवाना हुए।
अहमदाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट से लंदन की डायरेक्ट फ्लाइट एयर इंडिया के ली।
एयर इंडिया की फ्लाइट में हमारा बहुत अच्छा अनुभव रहा खासतौर से वहां की एयर होस्टेस ज्योत्सना और शोमी उन लोगों ने हमारी बहुत सहायता करी, और रास्ते में उनका सबका व्यवहार और मदद भी बहुत अच्छा था।
फ्लाइट भी अच्छी थी थोड़ी मेंटेनेंस की जरूरत है।
व्हीलचेयर असिस्टेंट से लगाकर बहुत ही अच्छा स्टाफ था।
बहुत ही अच्छी तरह से हम लोग एयरपोर्ट पहुंचे लंदन पर बेटा लेने आ गया था।
इमीग्रेशन वगैरा भी अच्छी तरह से हो गया 12 तारीख को रात को हम यहां पहुंचे।
घर पर सब इंतजार कर रहे थे पोते और बहू से मिलकर बहुत ही अच्छा लगा।
खाना-वाना खाकर सो गए दूसरे दिन सुबह यहां लैंपटन पार्क में घूमने गए जो घर के सामने ही है। घर के पीछे में भी एक छोटा सा पार्क बना रखा है
और गेटेड कम्युनिटी है तो बच्चे आराम से खेल सकते हैं डर जैसा नहीं है वह काफी सुंदर है मैं वहीं बैठ कर लिख रही हूं।
यहां हर जगह पर हर एरिया में बहुत पार्क है और अच्छे ग्रीनरी हर जगह है रास्ते में भी बैठने के लिए जगह-जगह पर बेंचेज लगी हुई है। यहां चलना बहुत पड़ता है तो आराम से बैठ कर रुकते रुकते चल सकते हैं। यहां बरसात कोई भी समय हो जाती है और वह नजर और भी अच्छा लगता है। अगर बाहर हमेशा मौसम देख कर ही निकलना पड़ता है
13 तारीख को शाम को हम होलैंड पार्क गए बहुत अच्छा पार्क था उसमें जैपनीज पार्क भी था और बहुत ही तरह-तरह के स्ट्रक्चर्स पेंटिंग, फाउंटेन थे फ्लावर्स कुकुनहाफ टाइप बहुत सुंदर लगा रखे थे। मेरी गोल्ड के फ्लावर का नजारा बहुत अच्छा था।
वहा पर घूमने में बहुत मजा आया ।
उसके बाद बच्चों के झूले और फिसल पट्टी बड़ों के झूले हमारा बचपन लौटा दिया।
हमने भी वहां बहुत झूले झूले और बहुत एंजॉय करा।
वहां से घर आकर आराम किया।
एक-दो दिन ऐसे ही आसपास के पार्क घूमने में ।परसों 15 अगस्त को यहां पिक्चर देखी यहां के लोग हिंदी पिक्चर के बहुत दीवाने हैं ।हमने ग़दर 2 देखी अच्छी पिक्चर थी।
पिक्चर हॉल भी भारत के जैसा ही था।
यहां ऐसा लग नहीं रहा है कि हम लंदन में आए हैं।
आधा इंडिया ही लगता है।
सबसे बड़ी बात यहां पर सब जगह सोसाइटी में बड़े-बड़े पार्क है। जो इस जगह को बहुत खास बनाते हैं।
घर भी काफी अच्छे हैं थोड़ी-थोड़ी दूरी पर ही सब सामान मिल जाता है।
कल 16 तारीख सुबह हम यहां से पैदल ही लक्ष्मी नारायण भगवान की मंदिर गए बहुत अच्छा मंदिर है जिसमें सभी भगवान की मूर्तियां लगी हुई हैं व्यवस्था भी काफी अच्छी थी पूजा प्रसाद लंगर सब कुछ चलता है। बहुत से लोग वहां आए हुए थे।
मुझे लगता है भारतीय संस्कृति जहां जहां एक भारतीय जाता है वह वहां भारतीय संस्कृति को पैदा कर देता है।
और मंदिर गुरुद्वारा जैन मंदिर सभी कुछ यहां बन जाते हैं।
हां मगर एक बात है यह लोग जिस जमाने में आए होते हैं उस जमाने से आगे नहीं होते उस जमाने में ही जी रहे होते हैं ऐसा मुझे लगा।
हो सकता है मैं गलत भी हूं मगर मंदिर जाकर काफी अच्छा लगा वहां शिवजी का अभिषेक करने की भी एक अलग जगह बना रखी थी।
सब कुछ काफी अच्छा था।
आज हमको 5 दिन हो गए हैं आए हुए, बहुत अच्छा लग रहा है।
बहुत अच्छा समय प्रसार हो रहा है परिवारजन के साथ में बैठना।
बच्चों के साथ खेलना और मौसम अच्छा होने के कारण बाहर जाना सब कुछ बहुत अच्छा लगा।
जिस बात का मुझे डर था पता नहीं कैसा रहेगा
यह सब गलत साबित हुआ।
चलना भी चार-पांच किलोमीटर हुआ मगर इतनी तकलीफ नहीं हुई।
क्योंकि घुटने के दर्द से चलना बहुत मुश्किल लगता था डर लग रहा था।
मगर मन में घूमने का जज्बा हो तो यह सब हो जाता है ऐसा मुझे लगा। तो यह था मेरा लंदन का चार-पांच दिन का अनुभव अभी तो हम यहां हैं।
आगे भी अनुभव दूसरे भाग में लिखूंगी।
