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Ranjana Mathur

Horror


3  

Ranjana Mathur

Horror


कुलधरा का खौफनाक रहस्य"

कुलधरा का खौफनाक रहस्य"

2 mins 630 2 mins 630


"फिर क्या हुआ....." 

अक्षय मजाकिया लहजे में बोला। 

"यार यह मज़ाक नहीं कुलधरा गांव के खौफनाक रहस्य के तार इससे जुड़े हो सकते हैं ऋतिक।  दादी मां नर्स का काम करती थीं। इक बार बहुत तेजँ बारिश व आंधी तूफ़ान अपने ज़ोरों पर था। चारों ओर घुप अंधेरा.... कि अचानक उनके घर का दरवाजा रात के बारह बजे किसी ने खटखटाया। दादी ने किवाड़ खोला तो सामने एक आदमी बौखलाया सा हाथ में लालटेन लिए खड़ा था। 

"मेरी पत्नी को प्रसव पीड़ा हो रही है। इस तूफ़ानी रात में उसे अस्पताल ले जाना संभव नहीं। "मेहरबानी करके आप मेरे साथ चलिए और उसका प्रसव कराइए।" वह गिड़गिड़ाते हुए बोला।न जाने उसकी बातों में ऐसा क्या था कि दादी माँ बरबस ही उसके साथ हो लीं।


तूफ़ानी बरसाती रात। घनघोर अंधियारे में हाथ को हाथ न सूझ रहा था कि अचानक उस आदमी ने दादी को रास्ता दिखाने की गर्ज से लालटेन थोड़ी नीचे कर दी।बाप रे बाप.!इसके पांव कुछ विचित्र व ज़मीन से ऊंचे उठे हुए थे। दादी की घिग्घी बंध गई। वे पसीने में तरबतर।माज़रा समझते हुए वह बोला - "थक गईं ? बस वो रहा घर।"

यह क्या...यह आदमी तो उन्हें उन खंडहरों के निकट ले आया था जहाँ गांव का कोई भी इंसान आने की हिम्मत न कर पाता था। भुतहा खंडहर।दादी चकित थीं कि खंडहर रोशनी से नहाया हुआ था। वह आदमी उन्हें अंदर कमरों में ले गया। वहां की साजसज्जा देखते ही बनती थी। बहुत सी स्त्रियों के बीच एक शानदार पलंग पर एक अत्यन्त रूप वान युवती प्रसव पीड़ा से छटपटा रही थी। दादी ने देखा उसके भी पांव उल्टे व सभी उपस्थित औरतों के भी।


दादी ने गर्म पानी व ज़रूरी सामान मंगाकर बहुत डरते डरते प्रसव कराया और घर जाने की आज्ञा मांगी तो अंगीठी में तापती एक बुजुर्ग महिला बोली - -

"अपना मेहनताना तो लेती जाओ। लाओ अपना आंचल आगे करो"और देखते ही देखते अंगीठी में से जलते कोयले अंजलि भर कर दादी की झोली में डाल दिए।

वही आदमी दादी को छोड़कर गया। मारे डर के दादी रास्ते में एक एक कोयला फेंकती रहीं। घर आकर साड़ी को वैसा ही छोड़ कपड़े बदल कर डर कर सो गई। सात दिन बुखार में पड़ी रहीं। उस अभिशप्त खंडहर में जाना जान की जोखिम साबित हुआ। इस गांव की बर्बादी निश्चित है क्यूँ कि इसके मुखिया ने मेरी इस राधा की जिन्दगी बर्बाद की थी।यह कुलधरा गांव का कुल नष्ट हो जाएगा। दादी ने किसी को नहीं बताया और बाद में वे दूसरे गांव जा कर बस गयी।




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