निखिल कुमार अंजान

Tragedy


3  

निखिल कुमार अंजान

Tragedy


क्रोध....

क्रोध....

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क्या हुआ अंजान साहब क्या सोच रहे हैं उनकी पत्नी ने कहा... 

हममम कुछ नहीं बस सोच रहा था कि पिछले कई दिनो से जिस कहानी पर काम कर रहा था वह पूरी तो हो गई लेकिन.. 

उनकी पत्नी ने कहा लेकिन क्या ?

यही कि अंत तक मैं तय नहीं कर पाया कि सही कौन है और गलत कौन.... 

मतलब? 

एक काम करो मिसेज अंजान आप दो कप कॉफी बना लाओ फिर बैठते हैं साथ मे वैसे भी आपकी अक्सर शिकायत रहती है कि मैं अपने लेखन मे ही उलझा रहता हूँ आपके साथ समय व्यतीत नहीं कर पाता चलो आज आपकी शिकायत भी दूर किए देते हैं मुस्कुराते हुए पति देव बोले...

  गंभीर होते हुए मिसेज अंजान ने कहा आप दुनिया के लिए अंजान है लेकिन मैं आपको बखूबी जानती हूँ आप जो इतना प्यार दिखा रहे हैं इसके पीछे क्या कारण है मैं सब समझती हूँ

  अरे मलकाइन काहे नाराज़ होती हो चलो आज मैं कॉफी बना लाता हूँ फिर साथ बैठते हैं हाँ ये सही कि तुम मुझे मेरी कहानी के निष्कर्ष पर पहुँचाने मे मदद करोगी और इस बहाने इस सुहावने मौसम मे हम दोनो को साथ वक्त बिताने का मौका भी मिलेगा.......

    उनकी बात सुन वह भी मुस्कुरा पड़ी वह बोली आप बैठिए मैं बना लाती हूँअंजान ने उनका हाथ पकड़ बिठा लिया और बोले अरे नहीं आज तो मैं ही बनाऊगां तुम इत्मनान से बैठो मे अभी कॉफी बना लाता हूँ

  

  थोड़ी देर मे काफी लेकर अंजान आते हैं और मिसेज अंजान को काफी का मग देते हुए कहते हैं मलकाइन आपकी ख़िदमत मे आपका सेवक कॉफी पेश करता है

यह सुन वह उनको तिरछी नजरों से देखती हैं और कहती हैं,

अगर आपका मक्खन (बटरिंग) खत्म हो गया हो तो टोस्ट खाए जाएं यह सुन अंजान साहब हँस पड़ते हैं और कहते हैं जी हाँ जी हाँ जी बस शुरु करता हूँ


यह कहानी मथुरा के छाता मे रहने वाला 32 वर्षीय मनोज शर्मा की है ! मनोज के परिवार मे उसके तीन बच्चे पत्नी और माता पिता थे! मनोज प्रिंटिंग प्रेस चलाता था और एक साप्ताहिक अखबार भी निकालता था काम के सिलसिले अक्सर उसको दिल्ली मे रहना पड़ता था

लेकिन दूसरी तरफ बच्चे बड़े हो रहे थे और उनके बेहतर भविष्य के लिए अब मनोज ने दिल्ली मे शिफ्ट करने का निर्णय लिया

 दिल्ली हरियाणा और यूपी तीन राज्यों को जोड़ने वाले साउथ दिल्ली के बदरपुर इलाके मे वह अपने परिवार संग आकर बस गए स्वभाव से गर्म मनोज की आते ही अपने पड़ोसी से बहस हो गई....बहस हुई भी तो नाली को लेकर दरसल यहाँ अभी नई नई कॉलोनियाँ बसनी शुरु हुई थी तो लोगों ने खुद कच्ची नालीयाँ बनाकर पानी निकासी का जुगाड़ किया हुआ था अब जब मनोज साहब आए तो इनको भी कहा गया कि आपको इसमे अपना पाइप जोड़ने का खर्चा देना पड़ेगा इतना सुन शर्मा जी भड़क गए और बोल पड़े "मेरे का लौंडा का ब्याह है मैं काहू दूँ" आए दिन किसी न किसी गल्ली मोहल्ले वाले से इनका पंगा होता ही रहता इनकी इमेज एक झगड़ालू और बुरे आदमी की बन चुकी थी

     प्रिंटिंग और अखबार के काम के चलते उनका ताल्लुक़ राजनीतिक गलियारों मे भी हो गया जिस कारण उनका रुतबा भी क्षेत्र बढ़ता जा रहा था और साथ साथ गर्म मिजाजी भी....अब बच्चे भी बड़े होने शुरु हो चुके थे बेटा और छोटी बेटी अपने दादा दादी के पास चले गए बड़ी बेटी नेहा अपने माता पिता के साथ ही रह थी

   नेहा का भी अच्छा फ्रैंड सर्कल बन गया था अब उसके दोस्त घर पर भी आने लगे मनोज उन्हें देख गुस्सा हो जाता और नेहा को डांटने लगता और धीरे धीरे उसने उसके घर से बाहर कहीं आने जाने पर पाबंदी भी लगा दी

 लेकिन बढ़ता हुआ बच्चा भला कहाँ रुका है वो भी डर से हाँ आप उसे प्यार से एक दोस्त की तरह समाझाओ तो वह आपकी बात समझेगा भी और अमल भी करेगा लेकिन मनोज ने कभी उससे प्यार से बात तक नहीं की.....

   वहीं नेहा पिता की मौजूदगी मे चुपचाप अपने कमरे मे पड़ी रहती लेकिन मनोज के बाहर जाते ही वह अपनी मर्जी से खुले आकाश मे उड़ने के लिए बाहर निकल जाती

  

क्रोध - पार्ट-2


नेहा का मनोज की गैरमोजूदगी मे बाहर निकलना कब तक चलता आखिरकार एक दिन मनोज को भनक लग गई और मनोज ने घर आते ही नेहा की माँ को लताड़ना शुरु कर दिया तुम्हारी वजह से ये लड़की हाथ से निकलती जा रही है पूरे शहर मे मेरी बदनामी करती फिर रही है, तभी नेहा भी स्कूल से घर पहुँचती है उसको देखकर मनोज का पारा और भी चढ़ जाता है वह उसको जोरदार तमाचा जड़ देता है और कहता है आज के बाद तुम्हारा कहीं भी अकेले आना जाना बिल्कुल बंद है यह कह कर नेहा को उसके कमरे मे बंद कर देता है


अब नेहा को मनोज खुद ही स्कूल छोड़ने जाता और लेने जाता, यहाँ तक कि घर के दरवाज़े और छज्जे पर भी नेहा को खड़े होने की इजाज़त नहीं थी, इन सबके कारण नेहा उदास रहने लगी अक्सर उसके मन मे यही ख्याल आता कि मेरी गलती क्या है क्यों पापा मेरे साथ ऐसा कर रहे हैं

 

वहीं दूसरी तरफ मनोज की जड़े मजबूत होती जा रही थी तो घमंड और गुस्सा भी उसी रफ्तार से बढ़ रहा था, अब वह अपने आगे किसी को कुछ नहीं समझता अक्सर घर मे भी छोटी छोटी बातों को लेकर पत्नी के उपर चीखना चिल्लाना यहाँ तक की हाथ उठाना आए दिन का हो गया था नेहा का चौबीस घंटे इस तरह के माहौल मे रहना उसकी मानसिक स्थिति पर भी असर डाल रहा था, वहीं स्कूल मे भी उसके बारे मे गलत गलत बातें फैलना चालू हो गई कि यह लड़की सही नहीं है जभी तो इसका बाप इसको लेने और छोड़ने आता है, इसका घर से निकलना बंद है स्कूल मे उसके मित्र भी न के बराबर हो गए और बाकी छात्र उसको देखकर हँसते नेहा यह सब अब सहन नहीं कर पा रही थी उसका मन अपने प्रति ऐसा व्यवहार देख तिरस्कार से भर जाता अब नेहा धीरे धीरे अपने पिता से नफरत करने लगी

एक दिन नेहा ने सोचा बस अब बहुत हुआ मैं अपना जीवन अपने हिसाब से जीना है और स्कूल खत्म होने के बाद वह घर न जाकर अकेले पार्क मे बैठी रही और काफी देर से घर पहुँची.....मनोज उसको देखकर ही भभक पड़ा और नेहा को मारना पीटना शुरु कर दिया यह देख नेहा की माँ उसको बचाने के लिए बीच मे आई तो उसको भी पीटने लगा, मनोज का क्रोध उस दिन हद से बढ़ गया था मनोज ने कहा बस अब बहुत हुआ आज तुम दोनो माँ बेटी का किस्सा ही खत्म किए देता हूँ न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी....मनोज के गुस्से को देख नेहा की माँ मनोज के पाँव पकड़ गिड़गिड़ाने लगी, नहीं माफ कर दो गलती हो गई आगे से ऐसा कुछ नहीं होगा मेरी जिम्मेदारी है ये आगे से ऐसा कुछ नहीं करेगी.... मनोज ने कहा ले जा इसे मेरी नजरों से दूर और आज से इसका स्कूल जाना भी बंद जो पढ़ाई करनी थी इसने कर ली...यह कह मनोज घर से बाहर निकल गया


 मनोज के जाने के बाद माँ नेहा के आगे हाथ जोड़ती हुई बोली, बेटी तेरा बाप बुरा आदमी नहीं है लेकिन गुस्से मे वो हैवान बन जाता है मैं नहीं चाहती तेरे साथ कुछ गलत हो इसलिए आजके बाद तू इसकी मर्ज़ी के खिलाफ कुछ नहीं करेगी.... नेहा रोते हुए कहती है माँ ये बताओ मेरी गलती क्या है मैने किया क्या है.... माँ कहती है बेटा गलती तेरी नहीं मेरी है जो मैने ऐसे आदमी से शादी की जिसका अपने गुस्से पर काबू नहीं है, अगर मैने पहले ही इसके खिलाफ आवाज़ उठाई होती तो शायद आज यह दिन न देखना पड़ता

नेहा बोली क्या मतलब माँ....तो माता ने अपनी सारी आप बीती कह सुनाई कि कैसे शादी की पहली रात से लेकर आज तक मनोज ने अपने क्रोध के चलते कितने अत्याचार किए हैं उस पर और वह डर के कारण चुप रही...यह सब सुन मनोज के प्रति नेहा का गुस्सा अपने चरम पर था उसने कहा, माँ बस अब बहुत हुआ, बहुत बर्दाश्त कर लिया अब नहीं उसने तभी 100 नंबर पर कॉल किया और पुलिस को बताया कि उसका बाप उसके साथ गलत हरकतें करने की कोशिश करता है और हम दोनो को मारता पिटता है

पुलिस ने मनोज शर्मा को घरेलु हिंसा करने और अपनी बेटी का यौन उत्पीड़न करने के इल्जाम मे गिरफ्तार कर लिया

अपने उपर लगे अपनी ही बेटी के उत्पीड़न का इल्जाम लगने से मनोज को गहरा सदमा लगा और उसने पुलिस कस्टडी मे सुसाइड कर लिया


हाँ जी मिसेज अंजान कहानी तो आपको सुना दी लेकिन मुझे यह समझ नहीं आ रहा कि बेटी गलत है या बाप.... 

मिसेज अंजान ने कहा अंजान साहब कहानी बस ठीक ही है

और रही बात गलत की तो यहाँ पर रिश्तों पर क्रोध हावी हो गया बाप ने कभी बेटी से प्यार से बात नहीं की और वही गुस्सा बेटी मे था, अपने पर होते अत्याचार को लेकर तो अंजान जी गलती यह है कि क्रोध करना ही भारी पड़ गया जो परिवार बिखर गया समझे का, यह कह वह मुस्कुराह दी...... 



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