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निखिल कुमार अंजान

Children


4  

निखिल कुमार अंजान

Children


राय....

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आज राजू स्कूल से घर लौटा तो बहुत खुश था! अंजान साहब ने घर मे घुसते ही राजू से पूछा "क्या बात है बेटा आज बहुत खुश हो !" राजू ने कहा पापा मैने "आपको बताया था न कि मेरी क्लास मे रोज किसी न किसी बच्चे का टिफिन चोरी हो जाता है, तो आज खाना चोर पकड़ा गया!" राजू के पापा बोले "अच्छा कौन था वो ?" राजू ने कहा" पापा वो हमारी ही क्लास का एक लड़का है वो रोज किसी न किसी का खाना चुरा कर अपने बैग मे रख लेता था! आज पकड़ा गया टीचर ने उसको बहुत डाँटा और सबसे माफी भी मँगवाई, कल उसके पैरेंटस को बुलाया है!" अंजान ने अपने बेटे से पूछा कि "उससे तुम्हारी टीचर ने ये नही पूछा कि वो ऐसा क्यों करता है?" तो राजू ने कहा "पूछा था पापा लेकिन वो कुछ बोला ही नही! पूरी क्लास ने मिलकर उसको चोर चोर कह कर बहुत चिढ़ाया अब वो आगे से ऐसा नही करेगा क्यों पापा सही किया न हमने! "अंजान साहब कुछ सोचते हुए बोले "नही राजू यह गलत बात है तुम लोगों को ऐसा नही करना चाहिए, जब तक यह न पता चले कि वो ऐसा क्यों करता था !" राजू बड़े ध्यान से अपने पिता की बात सुन रहा था! 


अंजान साहब ने कहा "बेटा हमे किसी भी बात की तह मे जाए बिना उस पर अपनी राय नही बनानी चाहिए!" राजू बोला" मतलब पापा मै कुछ समझा नही!" पापा ने कहा "रुको मे तुम्हें समझाता हूँ मै तुम्हें एक कहानी सुनाता हूँ ध्यान से सुनना..... 

यह बात तब की है जब मै लगभग 20 बरस का था तो हमारा घर तीस हजारी कोर्ट के पास था! मै और मेरे दोस्त सुबह सुबह टहलने के लिए कचहरी जाया करते थे तो अक्सर हमे वँहा एक वकील नजर खाना खाता हुआ मिलता था वो रोज दो रुपए के छोले लेता और अपने बैग से रोटी निकाल खाने लग जाता हम रोज उसे देखते और उसपे हँसने लग जाते कि इसकी बीबी इसे खाना नही देती बेचारा बासी रोटी लेकर चुपचाप घर से सुबह सुबह कचहरी आ जाता है! 

उसकी हालत पर मै और मेरे दोस्त उसका मजाक बनाने लगे अब वह भी हमे देख कर झेंप जाता ! काफी समय तक ऐसा ही चलता रहा, फिर एक दिन वो हमे नही दिखा हमने सोचा आज नही आया होगा लगभग 15 दिन हो गए लेकिन वो वकील साहब हमे नही दिखे! अब हम लोग सोचने लगे कि सब ठीक तो है, फिर 14-15 दिन बाद वो हमे दिखे तो वो आज खाना नही खा रहे थे और चुपचाप और गुमसुम बैठे थे! हम से रहा नही गया हम लोग उनके पास पहुँच गए वो हमको देख कर हड़बड़ा गए और बोले "हाँ बोलिए मै आपकी क्या मदद कर सकता हूँ?" हमने कहा "वकील साहब सब ठीक तो है काफी दिनों से आप नजर नही आ रहे थे ?" वो बोले कि "मेरी पत्नी लंबे समय से बीमार थी उसका स्वर्गवास हो गया है," हम लोग यह सुन मौन हो गए और थोड़ी देर उनके पास बैठ खुद पर शर्मिंदा हो वहाँ से चल दिए ! उस दिन यह समझ आ गया कि किसी बात का जब तक पूरा न पता हो उस पर अपनी राय मत बनाओ!" 

                राजू अपने पिता की बात सुनते सुनते सो चुका था! अगले दिन जब राजू स्कूल से आया तो बहुत उदास था, अंजान ने कहा "राजू क्या हुआ बेटा सब ठीक तो है तुम इतने उदास क्यों हो ?" राजू ने कहा पापा वो "जो लड़का खाना चुराया करता था न वो अपने घर अपने छोटे भाई बहनों के लिए ले जाया करता था! आज उसके पापा स्कूल मे आए थे उन्होंने बताया कि चेतन की मम्मी नही है और वो प्राइवेट नौकरी करते हैं तो सुबह जल्दी जाना पड़ता है वो खाना बना नही पाते तो चेतन पढ़ने भी आता है और घर भी संभालता है! चेतन एक कोने मे खड़ा रो रहा था, मुझे बहुत बुरा लगा पापा! राजू ने कहा हम सबने उससे माफी माँगी और कहा हम सब मिलकर तुम्हारी मदद भी करेंगें!"यह सुन राजू के पिता ने राजू को गले लगा लिया!



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