कर्मचारी
कर्मचारी
कुछ कर्मचारी बड़ी विचित्र आदतों को पाले रखते हैं।
पुष्पा ने पूछा वह कौन सी विचित्र आदतें हैं।
जो आपको इतना परेशान कर रही है।
मैंने कहा अमित क्या तुम जानते हो हर क्षेत्र में इस प्रकार के कर्मचारी मिल जाएंगे।
अमित ने पूछा शायद प्रश्न में कहीं ना कहीं झोल है।
जिसके कारण मुझे यह समझ नहीं आ रहा। आप पूछना क्या चाहते हो।
या तो प्रश्न आधा अधूरा है। या प्रश्न को इशारों में पूछा जा रहा है। दोनों ही स्थिति में मैं इसे समझ पाने में असमर्थ हूं।
मैंने कहा अमित आप वास्तव में बहुत होशियार हो आप समझ गए प्रश्न में कहीं ना कहीं लोचा है।
मैं प्रश्न को दोबारा दोहरा देता हूं। मेरा प्रश्न है कुछ कर्मचारी बुरी आदतों से घिरे हुए होते हैं।
जैसे गांजा पीना शराब का सेवन करना गुटखा खाना तंबाकू खैनी सुरती खाना।
अमित ने कहा नई पीढ़ी नशा खोर होती जा रही है।
सबसे पहले मैं बता दूं गांजा कर्मचारी इसलिए पीते हैं।
क्योंकि वह भोले के भक्त हैं। जबकि भोलेनाथ कभी भी गांजा नहीं पीते।
ये दुष्प्रचार भी बॉलीवुड फिल्मों के माध्यम से सनातनियो के मन मस्तिष्क में भर दिया गया है।
बाकी रही सही कसर गीत कारों ने पूरी कर दी है।
जो किसी भी रूप में सनातनीयों को स्वीकार नहीं है।
अमित ने कहा कई कर्मचारी कहते हैं। जब तक वे दम नहीं मारेंगे। तब तक वह कार्य करने के लिए तैयार नहीं हो पाते।
उनका मानना है दम मारो दम उससे शरीर में नई ऊर्जा आती है।
उनका मानना है दम मारो दम उससे शरीर में फुर्ती आती है।
उनका मानना है दम मारो दम उससे शरीर में एक नई शक्ति उत्पन्न होती है।
उनका मानना है जब वे दम मार लेते हैं। तब वे दौड़ दौड़ कर कार्य करते हैं।
इसके पश्चात उनकी संख्या भी कम नहीं है। जो शराब के आदी हैं।
कहते हैं दिन न देखें रात न देखें पीछे पड़ी है दुनिया।
ला पिला दे सखियां पैमाना पैमाने के बाद होश की बातें करूंगा होश में आने के बाद।
तभी सुमित बीच में ही बोल पड़ा आजकल पापा की परी भी शराब पीने से पीछे नहीं है।
अमित ने सुमित को टेढ़ी नजरों से देखा।
सुमित ने इशारे को भांपते हुए चुप रहना ही मुनासिब समझा।
अमित ने कहा इनके घरों में दो जून की रोटी मिलती हो या नहीं।
परंतु शराब के बिना एक दिन भी इन्हें बर्दाश्त नहीं है।
सुमित ने डरते डरते कहा दिल्ली से शराबियों की नब्ज पहचानते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री ने दिल्ली में शराब के इतने ठेके खुलवा दिए।
जहां एक के साथ एक बोतल मुफ्त मिलने लगी।
पीने वाले शराबीयो ने भी दिल्ली के मुख्यमंत्री को निराश नहीं किया।
घर में चाहे दाना ना हो परंतु शराबियों की दरियादिली देखिए उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को गिरने नहीं दिया।
शराब पी पीकर शराबी खुद लुढ़क गए।
परंतु मजाल है देश की अर्थव्यवस्था और नेताओं के लिए किसी प्रकार की कसर छोड़ी हो।
पुष्पा ने कहा तुम्हारे कर्मचारी की तीसरी विचित्र आदत कौन सी है।
मैंने कहा पुष्पा मेरे कर्मचारी ऐसे हैं। यदि सफेदी करनी हो तो वह सफेदी करने से इंकार कर दें।
यदि उनसे चित्रकारी करवानी हो तो भी वह इंकार कर दें।
परंतु इन सब के बावजूद वे गुटका इस प्रकार खाते हैं।
जिससे कार्यालय के अंदर और कार्यालय के बाहर की दीवारें गुटके की पिक से लाल किला बना दी जाती है।
अच्छे खासे सफेद फर्श को लाल पत्थर की तरह चित्रकारी कर दी जाती है।
अमित गुटका सुरती खैनी खाने वाले इनसे भी चार कदम आगे चलते हैं।
पुष्पा ने पूछा वह कैसे अमित ने कहा जब यह सारा रस उसका चूस लेते हैं।
तब वह उसे फेंकने के लिए वाशबेसिन का इस्तेमाल करते हैं। जब वे वॉश बेसिन का इस्तेमाल करते हैं। तब उनकी इस विचित्र एवं गंदी आदतों के कारण वॉश बेसिन और वॉशरूम की नालियां बंद हो जाती है।
बावजूद इसके वे कहते हैं भोले का भक्त हूँ वादे का सख्त हूं। पीता हूं गांजा अपने में मस्त हूं।
शराबी कहता है हां पीता हूं अपने पैसों की पीता हूं। हां पीता हूं तेरे बाप के पैसों की नहीं पीता। हां पीता हूं गम भुलाने के लिए पीता हूं। अपनी कमाई के पैसों से पीता हूं। तेरे बाप का क्या जाता है। पीता हूं अपनी कमाई का पीता हूं तेरे बाप का क्या जाता है।
गुटखा खैनी तंबाकू सुरती भोला खाने वाला कहता है। थोड़ी फुर्ती आ जाती है। जिससे काम तेजी और आसानी से हो जाता है।
मैंने कहा आप तीनों विचित्र आदतों में जीवन जीने वालों को यही संदेश देता हूं।
मत पियो गांजा वरना हो जाओगे गंजे पैसों के लिए।
मत पियो शराब वरना हो जाओगे खराब स्वास्थ्य से मत।
मत खाओ भोला गुटका सुरती खैनी तंबाकू वरना श्मशान ही आशियाना होगा।
इसीलिए कहता हूं जीना है तो जी भर कर जियो इन व्यसनो से दूर रहकर स्वस्थ जीवन जियो।
शेष जीवन आपका पैसा आपका मर्जी आपकी।
स्वस्थ रहे व्यसनों से दूर रहे मस्त रहे।
इतिश्री
