Rishabh Tomar

Inspirational


4.2  

Rishabh Tomar

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कोरोना संकट में नारी

कोरोना संकट में नारी

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आज कोरोना महामारी सम्पूर्ण विश्व की दुखती रग बन गई है।तमाम देशों में स्कूल-कॉलेज दफ्तर बन्द है ।सारे व्यवसाय चौपट हो चुके हैं ।निर्माण कार्य फैक्ट्री कारखाने बंद हैं।विद्यार्थी से लेकर श्रमिक ,कामकाजी वर्ग -स्त्री-पुरुष , तथा बच्चों से लेकर बुजुर्गो तक सब अपने अपने घरों में एक छत के नींचे कैद हैं।एक शहर से दूसरे शहर या गांव से शहर जाना तो क्या लोगोंका आस पड़ोस में भी जाना बन्द है और यही हाल हमारे देश भारत का भी है । समूचे देश मे लॉक डाउन जैसी व्यवस्था लागू है और इस समय महिलाओं के कंधे पर जिम्मेदारियों का भार दो गुना हो गया है।सबकी देख भाल करने के अतिरिक्त वो कई अहम बातों का ख्याल भी रख रही हैं जैसे बच्चे बुजुर्ग और वयस्क तनाव ग्रसित न रहे है उनके मनोरंजन के लिये अंताक्षरी गीत गायन ,बात चीत तथा घर से बाहर निकलने पर कभी डांट कर तो कभी प्यार से तो कभी कुछ लालच देखकर जाने वालो को रोक रही है।मतलब उन पर कार्य भार बहुत बढ़ गया है।वैसे तो ये बात सर्वविदित है कि घर को घर बनाने का काम महिलाएं ही करती हैं ।बिना उनके घर चार दीवारी के अतिरिक्त कुछ नहीं होता। ये बात महेश्वरी तिवारी जी ने नारियों के सम्मान में भी कही कि,

''एक तुम्हारा होना क्या से क्या कर देता है

बेजुबान छत दीवारों को घर कर देता है''

वे इस बात को इस भीषण परिस्थिति में भी सिध्द कर रही हैं। अगर वो गृहणी हैं तो सभी सदस्यों की फरमाइशों का ख्याल रखना ,बच्चों को बाहर जाने से रोकना और सबको सेहत का ख्याल रखना,इसके अतिरिक्त जब भी किसी जरूरी काम से बाहर जाए तो मास्क उनके हाथ मे लाकर देना ,सेनेटाइजर उसकी जेब में रखना और ढेर सारी सावधानी बताकर भेजना तथा जैसे ही घर पर आता देख दरवाजे पर साबुन से हाथ धुलवाना मास्क धुलवाना ,पहने हुये कपडों को बदलबाना और लाये हुये समान को सेनेटाइज करना । ये सब कार्य नारियाँ बड़ी जिम्मेदारी से कर रही हैं ।आज की आधुनिक नारियाँ घर तो संभाल ही रही हैं साथ ही उन पर देश को भी सँभलने की जिम्मेदारी है और वो उसका भी निर्वाह पूरी ईमानदारी से कर रही हैं अगर वो डॉक्टर हैं तो घर के साथ साथ मरीजो की भी फिक्र कर रही हैं ।इस भीषण बीमारी में बिना डरे उनका उपचार कर रही हैं।अगर वो नर्स है तो उनकी देखभाल कर रही और इसके अलावा अगर वो पुलिस या अन्य किसी गतिविधि में शामिल है तो पूरी निष्ठा के साथ अपना फर्ज निभा रही है ।वो घरों में बैठकर पोस्टर ,कविता ,स्लोगन ,भाषण आदि माध्यम से जन जागरूकता लाने का भी प्रयास कर रही है ।ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि, "सामाजिक दूरियाँ भले है,देश संकट में भले ही लेकिन इन दिनों नारियों की सशक्त भूमिका देखने को मिल रही है "।वो पुरुषों की भाँति इस महामारी के दौर में देश समाज घर परिवार की सेवा करने में चौबीस घण्टा व्यस्त है।वो इस कथन को यथार्थ के धरातल पर ले आई है कि नारियाँ किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नही है अगर सच कहा जाये तो कोरोना वायरस के विरूद्ध जो सम्पूर्ण देश युध्द लड़ रहा है उसमें प्रत्येक महिला मुस्तैदी से खड़ी ही नहीं है बल्कि कोरोना वॉरियर बनकर उससे लड़ भी रही है।अतः ये कहना गलत नहीं होगा कि ,'सामाजिक दूरियों के अहम दिनों में आज नारी पुरुषों से ज्यादा कार्य कर रही है।




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