कॉलेज का वह डरावना वाकिया
कॉलेज का वह डरावना वाकिया
हुआ कुछ यूं मैं सेकंड ईयर में थी। सेकंड ईयर साइंस में जूलॉजी बॉटनी एंड केमिस्ट्री सब्जेक्ट होते थे ।
और जूलॉजी में भी अलग-अलग रूप में बहुत डिसेक्शन करने पड़ते थे।
एक बार की बात आज भी याद करके मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
मेरी वैक्स ट्रे में एनिमल कैचर ने बड़ा सा स्कॉर्पियोन जिसे हम डंक वाला बिच्छू भी कहते हैं डाला।
मैंने देखा उसने उसकी जहर वाली स्टिंक नहीं काटी थी। और स्कॉर्पियोन पर फॉर्मलीन का कोई असर नहीं हुआ था। वह बेहोश नहीं हुआ था।
जैसे ही मैंने डिसेक्शन के लिए ट्रे को अपनी तरफ खिसकाया बिच्छू एकदम उछलने लगा।
एक सेकेंड के लिए इतना डर लगा लगा आज तो गई मैं गई तो मगर उसी समय दिमाग में ख्याल आया और मैंने इमीडीएटली एकदम से अपने साधन में से कैची उसके ऊपर दबा दी और जोर से चिल्लाई।
एकदम मैडम ने देखा और एनिमल कैचर को बुलाकर उसको ट्रे ले जाने को बोला।
और मैंने उससे दूसरा डिसेक्शन करने से मना कर दिया मैं इतना घबरा गई थी।
मगर मेरी मैडम जया देवी जी के कहने से और समझाने से मैं शांत हुई और फिर दूसरा स्कॉर्पियोन लेकर उसका डिसेक्शन किया । आज भी वह वाकिया याद करके एकदम रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
इसी तरह एक बार फाइनल ईयर में रेट का डिसेक्शन करते हुए पूरा हो गया था थोड़ा ही बाकी था।
और उसको होश आ गया और उछलने लगा।
उस दिन भी मैंने बहुत मुश्किल से अपना पूरा हाथ का पंजा उस पर रखकर उसको वापसट्रेपर लगाया ।उस समय में हमेशा सोचती थी कि कितना अच्छा हो पढ़ने के लिए यह डिसेक्शन ना करना पड़े।
आज जमाना बदल गया है आज कोई डिसेक्शन नहीं करने पड़ते हैं।
और कंप्यूटर से सब सिखाया जाता है काश यह सब हमारे समय में भी हुआ होता तो ऐसी भयानक याद ना रहती।
