Shagufta Quazi

Drama

4.0  

Shagufta Quazi

Drama

ख़ामियाज़ा

ख़ामियाज़ा

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234



         क़रीब छः माहीने पहले विलास और हर्षा का रिश्ता तय हुआ।शादी के लिए लॉन,हॉल,कैटरर आदि की उपलब्धतानुसार विवाह की तिथि निश्चित की गई।वर-वधु पक्ष ने शादी के लिए लॉन,कैटरिंग व्यवस्था आदि सबकी बुकिंग करवाली।पाँच महीने का समय पर लगाकर उड़ गया।इधर दो महीने से COVID_19 यानी कोरोना वायरस फैलने की गंभीर चर्चा आए दिन टी वी न्यूज़ चैनल ,समाचार पत्रों,सोशल मीडिया पर चल रही थी।किंतु दोनों पक्ष में से किसी को भी अंदाज़ा नहीं था कि शादी की तारीख़ नज़दीक आते-आते कोरोना वायरस इतना भयंकर रूप धारण कर सारी दुनिया पर कहर ढाने लगेगा।शादी के कार्ड बंट चुके थे।

     शादी को चार-पाँच दिन बचे थे।हल्दी,मेहंदी,संगीत आदि कार्यक्रम रीति रिवाज के अनुसार तीन-चार दिन पहले से ही शुरू हो जाते है। इन्होंने भी अपने कार्यक्रम ऐसे ही बनाए थे।कोरोना के बढ़ते कहर के डर से हल्दी के निमंत्रण पर सगे संबंधियों ने भी आने से गुरेज़ कर लिया।सरकार नित नए नियम जो लागू कर रही थी। सरकार! वह कहां ग़लत थी?कोरोना वायरस वैश्विक महामारी का रूप धारण कर चुका था।पूरी दुनिया में त्राहि-त्राहि मची हुई थी।लोग जान बची तो लाखों पाएं की तर्ज़ पर जी रहे थे।कोरोना के महामारी का रूप धारण करने के कारण उसे रोकने हेतु युद्ध स्तर पर कार्य करना सरकार की पहली प्राथमिकता व आवश्यकता थी।जिसे वह मुस्तैदी से पूरा करने में एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा रही थी। हल्दी का कार्यक्रम तो जैसे तैसे कम लोगों में भी संपन्न हो गया दूसरे दिन से अन्य रस्मे सम्पन्न करने की तैयारियों के बीच शहर में धारा 144 लागू कर दी गई।शॉपिंग मॉल,सिनेमा हॉल,स्कूल- कॉलेज तो पहले ही बंद किए जा चुके थे।और अब सोशल गैदरिंग पर भी रोक लगा दी गई।हॉटेल, लॉन आदि बैंड करने के आदेश दिए गए थे।वर-वधू पक्ष के लोग परेशान थे।दोनों पक्षों की बैठक में वर-वधू पक्ष के ज़िम्मेदार लोगों ने वर-वधु के पक्ष के घर के साथ-आठ सदस्यों की उपस्थिति में विवाह सम्पन्न करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया।वर के माता-पिता ने इस पारित प्रस्ताव को अमलीजामा पहनाने हेतु एक शर्त वधू पक्ष के आगे रखी,"हमारी तरफ़ से घर के आठ-दस सदस्यों की उपस्थिति में हम विवाह संपन्न करने को राज़ी है,किंतु आप हमें शादी से पहले चार लाख रुपये दीजिए।"यह सुन वधु के पिता सन्न रह गए।उन्हें काटो तो खून नहीं,बड़ी मुश्किल से उन्होंने अपने आप को संयत कर रुंधे गले से कहा,"समधी जी चार लाख किसलिए?वर के पिता ने कहा,"समधी जी शादी के लिए हमने लॉन,कैटरर आदि बुक किया था,उस रक़म के नुक़सान की भरपाई का ख़ामियाज़ा तो आपको ही देना होगा,अन्यथा------?वधु के पिता मन ही मन सोचने लगे,"मैने भी तो लॉन,कैटरर आदि बुक किये है,उस रक़म की भरपाई का ख़ामियाज़ा - - - -?

         


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