Swati Rani

Tragedy


4.6  

Swati Rani

Tragedy


जोकर

जोकर

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"पापा मैं कुछ नहीं जानता मुझे सर्कस देखने जाना है तो जाना है,आप कबसे बोल रहे हो, मेरे सारे दोस्त बोल रहे थे इस बार वाला जोकर बहुत हंसा रहा है", कहते हुये 6 साल का सूरज जमीन पर लेट कर जोर-जोर से रोने लगा। 

" बेटा बोला ना आज कुछ जरूरी काम है, शाम में पक्का ले चलुंगा, मेरा वादा है ये", अजय ने सूरज को उठाते हुये कहा। 

सूरज को स्कूल छोड़ अजय अपने काम को निकल गया। 

दरअसल माया और अजय ने घरवालों के खिलाफ जा कर घर से भागकर प्रेम विवाह किया था।

अजय एक अनाथ युवक था और माया अमीर परिवार कि लड़की, दोनों संगीत के क्षेत्र में प्रयास कर रहे थे, दोनों मिले और शादी का फैसला कर लिया। पर दोनों में से कोई भी सेटल नहीं था। 

शादी के बाद माया कि महत्वकांक्षा घर के चूल्हे- चौके और बरतन में रह गयी। 

अजय अपनी महत्वाकांक्षा के आगे माया के सपनों को भुल ही गया। 

अजय का प्रयास जारी था, पर कामयाबी ना मिलने से कभी-कभी माया उसके गुस्से का शिकार बनने लगी थी। 

घर खर्च चलाने के लिये वो कभी-कभी शहर के नौटंकी में भी काम कर लेता था। 

 कुछ दिन तक तक तो सब ठीक था, पर बात और बिगड़ गयी जब सुरज इस दुनिया मे आया । घर के खर्चे बढ़े, जिम्मेदारियां बढी। इधर माया को उसके अपने सपने बिखरते दिख रहे थे। उसको घुटन होती थी। 

रोज लडा़ईया होने लगी, एक बार अजय ने गुस्से में माया को बोल दिया घर से चले जाओ। 

ये बात माया के दिल पर लगी, वो सुरज और अजय को छोड़ कर अपने मायके चली गयी। 

अजय ही अब सूरज का मां बाप दोनों था, यथा सभव उसके जिद को पुरा करने का प्रयास करता था। 

दरअसल अजय आज आॅडिसन था, अच्छा गाते हुये भी वो सेलेक्ट नहीं हुआ,उल्टा जवाब देने पर उसको बेइज्जत करके भगा भी दिया गया। 

घर लौटते वक्त उसको सूरज से कि हुया याद आया, सूरज के पास पैसे भी नहीं थे और काफी रात हो चुकी थी, अजय अपने नाटक कंपनी में गया और कुछ लेकर वापस घर गया। 

जैसे सूरज ने दरवाजा खोला ये क्या सामने जोकर था। 

अचानक से जोकर उटपटांग हरकतें करने लगा, चलते-चलते गिर गया,फिर अचानक से रोने लगा, जैसे उसको रोता देख सूरज उदास हुआ वो जोर- जोर से हंसने लगा,जिससे सूरज को खुब हंसी आयी, फिर जोकर ने सूरज को खाना खिलाया और सुला दिया। जोकर रूपी अजय ने सूरज को माथे पर चुमा और फिर बालकनी में जा कर अजय अपनी जोकर वाली ड्रेस उतारकर अपनी नाकामयाबी और माया को याद करकर खुब रोया। 

जाने ये कैसा जोकर था जो मन में अथाह दर्दो, अपनों का बिछोह को लेकर भी बेटे कि ख्वाहिश पुरी किया।


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