Best summer trip for children is with a good book! Click & use coupon code SUMM100 for Rs.100 off on StoryMirror children books.
Best summer trip for children is with a good book! Click & use coupon code SUMM100 for Rs.100 off on StoryMirror children books.

Mukul Kumar Singh

Inspirational


4  

Mukul Kumar Singh

Inspirational


जीवन-धारा

जीवन-धारा

22 mins 237 22 mins 237

शशांक बड़ा खुश है। थोड़ी देर पहले प्युन काल-लेटर लेकर आया जिसमें उसे सेना के एस-एस-बी इलाहाबाद रिपोर्ट करने के लिए कहा गया है अर्थात उसने सैनिक अधिकारी बनने की लिखित परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है और अब उसे सायको-टेस्ट में अंश-ग्रहण करना होगा। बस अब सौ मीटर की दूरी रह गई है। सायको-टेस्ट 9/10 मीटर तथा 1/10 मीटर जनरल इन्टरव्यू बोर्ड और ये दोनों बाधाएं जीता उसे स्वास्थ्य-परीक्षा की ओर जाने की अनुमति मिलेगी। आनन्द से उसके शरीर में विद्युत तरंगों की तार कंपायमान होने लगी। मित्रों ने अभी से हीं बधाई देना आरम्भ कर दिया तथा कुछ के मन में शशांक के प्रति ईर्ष्या होने लगी।

जो भी हो निश्चित समय पर इलाहाबाद के लिए प्रस्थान किया। रेल स्टेशन पर छोड़ने के लिए परिवार का कोई भी सदस्य नहीं आया। साथ में केवल दो मित्र थे। निर्धारित समय पर ट्रेन आई। मित्रों से विदा लेकर शशांक द्वितीय श्रेणी के बोगी में सवार हो गया। ट्रेन समय से आधा घंटा विलंब से स्टेशन छोड़ने आए लोगों को टाटा-बाय-बाय करती हुई प्लेटफार्म से धीरे-धीरे गति पकड़ी। रात का समय था। अपने लिए आरक्षित बर्थ पर लेट गया। कुछ ही पल में टी टी ई आया, टिकट चेक किया और आगे बढ़ गया। ट्रेन जब गति बढ़ाई तो उसकी चाल पालकी के झूले के समान लगने लगा। शशांक ने एकबार अपने चारों तरफ के सहयात्रियों को देखा। कुछ लोग डिनर कर रहे थे, कुछ अपने सह बर्थ धारकों के साथ गप्पें मार रहे थे जबकि ट्रेन यात्रियों में से एक बड़ा हिस्सा नाकों से संगीत की सप्त लहरी की धुन छेड़ रहा था जिसे सुनकर कुछ यात्री व्यंग्य करके हंसी की फुहारों से बोगी को अलंकृत करने में व्यस्त हैं। अभी भी बहुत से यात्री गण के सीट कम बर्थ आरक्षित कराने का काम जारी है और अपने लगेज लेकर दायें-बायें कर रहे हैं। शशांक को साइड बर्थ मिली थी इसलिए उसकी दृष्टि इन यात्रियों पर पड़ जाता करती है और वह चाहकर भी कल्पनाओं के जगत में डूब नहीं पाया। हालांकि ऐसी बात नहीं है कि उसके मन में उथल-पुथल नहीं चल रही है। वह आने वाले उस रिपोर्टिंग के समय की कल्पना कर रहा है कि पता नहीं कैसा एटमसफेयर मिलेगा, अन्य सह प्रतियोगी कैसे होंगे। सेनाविभाग की व्यवस्था संतोषजनक होगी या अव्यवस्थित तथा ये लोग पांच दिन में कौन-कौन सा टेस्ट लेंगे। वह इससे पूर्व कभी भी ऐसी प्रतियोगिता मे हिस्सा नहीं लिया है। टेस्ट पास कर जाएंगे या फेल इसकी चिंता नहीं है परिस्थितियों से मुकाबला करने में विश्वास करता है क्योंकि वह जानता है युद्ध में उतरने पर ही जय-पराजय मिलती है तो घबड़ाने की क्या आवश्यकता है। शशांक आंखों को बंद कर लिया पर पलकें बोझिल हो चुकी है लेकिन नींद नहीं आ रही है। ट्रेन धड़-धड़-धड़ करती पटरी पर दौड़ रही है। धीरे-धीरे निरवता जा गई बोगी के अन्दर और जीरो बल्व की मन्द प्रकाश सभी यात्रियों को अपने अंक में समेटे जा रहा था। शशांक पलकें मुंदे पड़ा था। कानों में गूंज रही थी धड़ धड़ धड़ खट-खट खटाक। पता नहीं नींद की रानी उसे लोरियां सुना रही थी या कुछ और। अचानक एक स्वप्न देखकर उसकी आंखें खुल गईं तथा स्वप्न का दृश्य स्मरण हो आया। उसने अपने आपको सैनिक अधिकारी के कैप हीन वर्दी में पाया। उसका मुखमंडल प्रसन्नता से भर गया। उठकर बैठ गया। एक बार फिर बोगी को देखा प्राय: सभी यात्री सोये हुए थे। अपने कंधे उचकाए और पुनः बर्थ पर लेट गया।

आखिर उसकी इलाहाबाद रेल यात्रा पुरी हुई। लगभग सुबह छः बजे एस एस बी रिपोर्टिंग सेन्टर पर रिपोर्ट किया। वहां की व्यवस्था देखकर लगा जैसे वह अधिकारी के रूप में चुना जा चुका है। शायद अन्य सभी उम्मीदवारों के मन में यही भावना चल रही थी। सबकी दृष्टि एक दूसरे को घुर रही थी। हाय-हेलो की व्यार से वातावरण मनोरम बन सबको लुभा रही थी। गंभीर तथा मिलनसार बनने का अभिनय था या सच्चाई शशांक को समझ  नहीं सका। हल्की मार्निंग रेफरेंसमेंट की व्यवस्था की गई थी और सबको चेस्ट नम्बर दिए गए। सभी उम्मीदवारों को एक घोषणा सुनने को मिली - वेलकम जेन्टलमेन गूडमार्निंग यूं आर रिक्वेस्टेड टू अटेंड ऐट अडोटोरियम फर स्क्रीन टेस्ट एकार्डिंग रिसेप्शन टेबल। एक अफ़रा - तफ़री सारे उम्मीदवारों में। शशांक अपने नम्बर के अनुसार क्यू में खड़ा हो गया तथा वहां अन ड्युटी अफसर को अपना नम्बर दिखाया। वह मेजर था उसके कंधे पर पीतल के पालिश किए गए अशोक स्तम्भ तारों की भांति उज्जवल छटा बिखरा रहा था। आकर्षक व्यक्तित्व सामने वाले को इम्प्रेस्ड करने के लिए काफी था। वह एक बार शशांक को देखा तथा पूछा - "आर यु फ्राम वेस्ट बेंगाल।" शशांक बड़े आत्मविश्वास के साथ रिप्लाई दिया - "ऑफकोर्स फ्राम वेस्ट बेंगाल।"

"गूड, गो टू रूम न. 27 ऐण्ड योर लगेज मस्ट बी पुट आउटसाइड आफ रूम।" मेजर ने कहा,

"यस सर। थैंक्स।" इतना कहकर शशांक भागा बताए गए रूम की ओर। लगभग उस रूम में 200 उम्मीदवारों की बैठने की व्यवस्था थी। मेजर रैंक के कई अधिकारी गार्ड के रूप में डिटेल थे साथ हीं कुछ सैनिक भी थे अनन्य सहायता उम्मीदवारों को देने के लिए अर्थात सबको लग रहा था कि अफसर बन चुके हैं। लगना भी चाहिए क्योंकि शुरुआत में हीं एक सिपाही आपकी निर्देशों का पालन करने के लिए तैनात। खैर जो हो रहा है होने दो कौन ध्यान देता है। सबके हृदय की धड़कन बढ़ गई है। तभी हाल में घोषणा सुनने को मिलती है - अटेंशन प्लीज, आल कैंडिडेटस मोस्ट वेलकम टू एपीयरेंस फर स्क्रीन टेस्ट। बीफोर फिफ्टीन मिनट क्वेश्चन पेपर वील वी डिस्ट्रिब्यूटेड एमंग यु। आफ्टर दैट यु शुड राईट योर नेम,रोल नं. एण्ड-----------और भी न जाने क्या-क्या इन्सट्रकश्न दिए जा रहे थे परंतु कम हीं थे जो इनको सुन रहे थे। ज़्यादातर तो अपने नर्वसनेस पर साधारण दिखने का प्रयास कर रहे थे। शशांक ध्यान से निर्देशों को सुना। इतनी तो जानकारी मिली कि एक घंटे का पेपर तथा प्रश्नों की संख्या सौ रहेगी। इसमें से जो लोग 60% से ज्यादा स्कोरिंग करेंगे उन्हें हीं अगली टेस्टों के लिए लजींग फैसिलिटीज मिलेगी बाकी को आज हीं बैक कर दिया जाएगा। पन्द्रह मिनट पहले बेल बजी तथा क्वश्चनेयर डिस्ट्रिब्यूटेड हो गई। सबने निर्देशानुसार क्वेश्चनेयर पर अपना नाम, रोल नं लिखा। उसके बाद टेस्ट स्टार्ट की बेल लगी। रूम ने एक बारगी नीरवता की चादर ओढ़ ली। शशांक पेपर में सारे प्रश्नों को पढ़ने लगा। उसके ओंठो पर मुस्कान खेल गई क्योंकि सारे प्रश्न पारिवारिक पृष्ठभूमि से जुड़े हैं तथा कुछ प्रश्न करेंट अफेयर्स के थे। सारे प्रश्नों को पढ़ने के पश्चात अपनी गर्दन रूम के अंदर घड़ी के कांटे की भांति घुमाया देखा कि सबकी गर्दन 90 डीग्री कोण की दिशा में क्वश्चनेयर पर निम्नगामी थी। सामने टेबल पर बैठा मेजर की साफ्ट साउण्ड शशांक के कानों में सुनाई पड़ी - "जेन्टलमैन, स्टार्ट योर राइटिंग एण्ड डोन्ट वेस्ट योर टाइम।"

"ओ यस सर।" शशांक उत्तर दिया और उसकी लेखनी दौड़ना आरंभ की तो फिर थमने का नाम नहीं ली। बीच-बीच में कई बार सुनने को मिली नो हमींग, कैरी अन यंगमैन। पर शशांक को इन बातों से कोई सरोकार नहीं था। ज्यादा से ज्यादा चालीस मिनट लगे उसकी कलम विरामावस्था में आई, उसने सारे उत्तरों को एक बार अच्छी तरह से पढ़ा तत्पश्चात सामने बैठे अफसर को संबोधित किया - "एक्सक्यूज मी सर, मेरा हो चुका है और मैं अपना आन्सरशीट जमा देना चाहता हूं" इतना कहने भर की देर थी कि और भी कई जन खड़े हो गए अपनी उत्तर पुस्तिकाओं के साथ। सामने बैठा अफसर ने किसी छोटुराम को आवाज लगाई और लगभग छः फीट लम्बा हवलदार टेबल के सामने - जी साब।

"देखो इनकी आन्सरशीट जमा करलो।"

"ठीक है साब।"  शशांक उस हवलदार की चाल -ढाल देख प्रभावित होता है। मन में गुदगुदी होती है कि आनेवाले समय में उसकी आदेशों का पालन हवलदार छोटुराम के ऐसे व्यक्तित्व करेंगे। रूम से बाहर निकल जब वह अपने लगेज उठाने जाता है वहीं पर उसके साथ अन्य कैंडिडेट्सों के साथ आलाप - परिचय होता है। वार्तालाप का प्रारंभ होता है - हलो आय एम पवन सक्सेना फ्राम यु पी एण्ड यू………और अभिवादन के लिए अपना हाथ बढ़ाता है। प्रत्युत्तर में शशांक हाथ मिलाया " नाइस टू मीट यू,आय एम शशांक शेखर भट्टाचार्य फ्राम वेस्ट बंगाल।"

" हाउ वाज योर पेपर"

" भेरी ईजी"

"ईज इट्स ए पेपर अर ए जोक। आय एम एम राव फ्राम आन्ध्रा"

"में बी। "आय एम पवन एण्ड ही ईज शशांक। और एक से भले दो-दो-से भले तीन हो गये तथा तीनों हीं अपनी-अपनी लगेजों को लेकर वापिस रिपोर्टिंग रुम में जा बैठे। आखिर दोपहर के लांच के बाद रिजल्ट घोषित होने तक का समय कटाना है। धीरे-धीरे वहां पर गुंजन की सीमा में वृद्धि होती चली गई। पुरा रिपोर्टिंग सेन्टर एक मिनी इण्डिया बन गई। इंग्लिश-हिन्दी मिली भाषा में राग-रागिनी सुनाई दे रही थी। कुछ सबसे हिल-मिल गए तो कुछ गंभीर तो कुछ अपने को एकदम शांत। ज्यादातर को देखकर लगता है कि हंसने की कोई बात नहीं है फिर भी जबरदस्ती हंसने का अभिनय कर रहे हैं। शशांक को बड़ी जल्दी दादा का सम्बोधन मिल गया।  नये दोस्तों की छोटी-छोटी टोलियां बन चुकी थी और हंसी-मजाक की आंधी में डूबे आनन्ददायक वातावरण की प्रतिष्ठा हुई। किसी तरह दोपहर के भोजन का समय हो आया था। सेना के तंबुओं से रंग-बिरंगी डाईनहाल की व्यवस्था सुन्दर एवं मनोहारी। लंच के समय शशांक को एक नया दृश्य देखने को मिला वो यह कि कांटे-चम्मच का व्यवहार जैसे युद्ध हो रहा है अर्थात अभी तो सायकोलॉजी टेस्ट का शुभारंभ हुआ है और इसके बाद टेस्टों को क्वालीफाई करने के पश्चात जनरल इन्टरव्यू का अवसर मिलेगा एवं उत्तीर्ण होने पर पुनः एक और बाधा आएगी मेडिकल टेस्ट तब जाकर अफसर की ट्रेनिंग जिसमें कांटे-चम्मच का अभ्यास एक साधारण नागरिक से अलग सेनाधिकारी बना दिए जाओगे और हाथ से भोजन करना प्रेस्टिज हैम्पर माना जाएगा। हालांकि शशांक काललेटर के अनुसार सारी व्यवस्था करके आया था परन्तु कहां एक बंगाली युवक जो बचपन से हीं माछ - भात हाथों से खाया है सो कांटे-चम्मच को लगेज से बाहर निकाला ही नहीं। लांच के बाद अब इन्तजार हो रही है उस समय की जब रिजल्ट घोषित होंगे। घड़ी भी आश्चर्य की वस्तु है जो अपने निर्धारित गति से टिक-टिक करती है और आगे बढ़ती रहती है। उसे किसी की परवाह नहीं है और ना ही कोई सम्वेदना। वो तो मनुष्य है बड़ी बेसब्री से उसका राह देखता है। राह देखते-देखते बड़ी संख्या में बैठे-बैठे कुछ परीक्षार्थी खर्राटे लेने लगे। जबकि कुछ अलसाई पलकों को जबरदस्ती खोले रखने का मिथ्या प्रयास कर रहे थे। शशांक भी लंबी ट्रेन यात्रा के थकावट से मित्रता को मजबूर हो चुका है। अचानक पवन उसे झकझोर कर जगाया - "ओ दादा - ओ दादा उठो। लगता है रिजल्ट डिक्लेयर किया जाएगा।" शशांक अंगड़ाई लेता हुआ उठ बैठा। सबके साथ - साथ एक पल के लिए उसके हृदय की धड़कन तेज हो जाती है पर फौरन हीं अपने -आपको नियंत्रित कर लेता है कि वह तो यहां परीक्षा देने आया है और परीक्षा में पास-फेल तो इससे पूर्व भी देखा है कभी नर्वस नहीं हुआ तो अभी क्यों हो। अपनी टोली के साथ रिजल्ट घोषणा वाले सेंटर पर पहुंच गया। और धड़कने बढ़ रही थी। जिसे उजागर होने से बचने हेतु एक-दूसरे को बधाईयां दे रहे थे। चेस्ट नम्बर 1,9,10,34,44………….करके बढ़ती हीं जा रही है एवं एक समय 1122 शशांक के कानों सुनाई पड़ी पर वह असमंजस की स्थिति है क्योंकि जिन नम्बरों को पढ़ा जा रहा था आज के टेस्ट में पास है या फेल निर्णय नहीं कर पा रहा था। लगभग आधा घंटा से उपर हो गया अचानक पवन सक्सेना उसे पिछे से जकड़ लिया - "चलो दादा हम दोनों अब साथ आगे कदम बढ़ाएंगे। वी हैव क्रास्ड मेन अबस्टक्ल।" वैसे रिजल्ट सुननेवालों की गैदरिंग हल्की होने लगी। रिजल्ट घोषणा समाप्त हो गई। शशांक-पवन की बंधुओं की टोली में केवल इन्हीं दोनों को अगले टेस्ट का अवसर प्राप्त हुआ और रेस्ट आप आल थैंक्यू। जो लोग आज क्वालीफाई किया उनके लिए एक स्पेशल ब्रीफिंग की व्यवस्था की गई है आफ्टर ईविनींग रिफ्रेशमेंट। सुबह से लेकर अब तक जो चहल-पहल थी वह खामोशी की चादर ओढ़ती जा रही है पर जाने वाले क्वालिफाईड दोस्तों को कांग्रेटस् करना नहीं भूले। वैसे एक दृश्य देख शशांक आश्चर्यचकित हैं आज रिपोर्ट करने से लेकर स्क्रीन टेस्ट रिजल्ट डिक्लेयर होने तक सेना वाले कैंडिडेट्स के साथ जामाई (दामाद) की तरह व्यवहार किए और वापसी के लिए फेल कैंडिडेट्स को सिविलियन की भांति भगाने पर तुले हुए हैं। ब्रीफिंग का समय हो चुका है, एक-एक कर आडिटोरियम में प्रवेश कर रहे थे। शशांक-पवन दोनों पास-पास सामने से दूसरी रो में बैठे थे। आडिटोरियम की सज्जा मन लुभावनी एवं दीवारों पर सैनिकों एवं अधिकारियों की वीरता के विभिन्न ‍पदकों से सम्मानित तस्वीरें देख हृदय में ऐसे भाव उभर रहे हैं जैसे उसके सीने पर भी ये पदक एक दिन अवश्य चमकते हुए दिखेंगे। हल्की-हल्की गुंजन भी हो रही है। अन्दर में जे.सी.ओ और एन.सी.ओ भी डिसिप्लिन का पालन करने का विनम्र परामर्श दे रहे हैं। सामने डायस बांयी ओर तथा स्टेज के ठीक बीचोबीच एक बड़े बोर्ड पर कलर्ड चाक से लिखा है हिन्दी-अंग्रेजी में एक ब्रीफ बाय मेजर के अस्थाना। कुछ पल पश्चात आडिटोरियम के मेन गेट से एक एट्रेक्टिव व्यक्तित्व का स्वामी का गट-गट करते अन्दर प्रवेश किया तथा एक सुबेदार मेजर की कड़क आवाज सुनाई देती है - जेन्टलमेन सावधान। "विश्राम" डॉयस पर मेजर अस्थाना एक बार पुरे आडिटोरियम में सामने से पिछले रो तक अपनी नज़र डाली फिर हल्के मुस्कुराया और कहना शुरू किया -

"गूड इविनिंग एण्ड कांग्रेचुलेशन टू एवरीवडी एण्ड नाउ यूं आर नकिंग डोर आफ योर सायकोलॉजी टेस्ट"।

"थैंक्स सर"

मेजर अस्थाना के पर्सनलिटी से सभी प्रभावित होते हैं तथा सभी उसे सुनने को उत्सुक हैं। और वह कहना शुरू करता है……….

"जेन्टलमैन आय नो दैट यु आल आर टैलेंटेड एण्ड हैव प्रोव्ड दिस इन टूडेस स्क्रीन टेस्ट। सो वन्स अगेन माय कांग्रेचुलेशन टू यू। एक बार पुनः थैंक्यू सर गुंज उठा। सबसे पहले मैं जानना चाहूंगा आप में से कितने एपीयर हो चुके हैं एस एस बी बिफोर इट,प्लीज रेज आप योर हैंडस।"  मेजर अस्थाना गिनती करने का कोशिश करता है पर संख्या अधिक देख मुस्कुरा उठा - "वन्डरफुल। बड़ी खुशी की बात है रेस्ट आफ आल आर न्यू, एम आय राइट।"

"यस सर।"

"ओ के। अगले दिन से आप सभी एक नये टेस्ट के लिए प्रोसीडिंग्स करेंगे जिसमें आपके अन्दर Q L O अवजर्व किया जाएगा मिन्स क्वालिटी लाइक आफिसर्स। अफसर तो कोई भी बन सकता है पर सेना के लायक क्वालिटी जिसमें रहेगी उसे हीं सैनिक अधिकारी के रूप में लिस्टेड किया जाएगा। और यह क्वालिटी क्या है आप सबको जान लेना चाहिए ऐज एग्जाम्पल-एट्रेक्टिव पर्सनलिटी, स्पीकिंग पावर, कूअपरेटिव, लीडरशीप,क्विक डीसीसन मेकर, स्पोर्ट्समैनशिप,डीसिप्लिन ऐण्ड गुडबीहैव एट्सेक्ट्रा। ये सारे दो तरह के कैटेगरी वन इज GTO एण्ड अनदर इज WTO, पहले वाले में ग्रुप डिस्कशन, डीबेट, स्लाइड्स देखकर स्टोरी रायटिंग ऐण्ड दूसरे में ग्रुप वर्क और फीजिकल कम अब्सटेक्ल टेस्ट होंगे। इन सारे टेस्टों में डोंट भी नर्वस टेक इट ईजी ऐण्ड नेवर बी निगेटिव माइन्डेड। आय होप यू आल वील क्वालिफाई इट। जेन्टलमैन यदि कोई डिसक्वालिफाई हो जाता है तो निराश होने की आवश्यकता नहीं है। यहां से वापस लौटने पर अपने टैलेंट को अन्य फिल्ड में यूज करो। आपके द्वारा किया गया हर कार्य जिससे देश के विकास को गति मिलती है तो आप एक सच्चे सैनिक कहलाएंगे। सैनिक का अर्थ यह नहीं है कि सबको वर्दीधारी बनना बल्कि देश का हर नागरिक हीं सैनिक है। यदि आपने अपने कर्त्तव्य का पालन इमानदारी के साथ किया तो आप भी एक सैनिक की भांति देश को सशक्त सुरक्षा प्रदान किया। नाउ जेन्टलमेन यू आर बीकमिंग ऐन आर्मी अफिसर सो माय वेस्ट विशेस वीथ यूं।"

" थैंक्यू सर।" पुरा आडिटोरियम गुंज उठा।

मेजर अस्थाना डायस छोड़ कर बाहर निकलने लगा तो कैंडिडेट्स का एक बड़ी भीड़ उसे घेरते हुए उसके पीछे - पीछे हो लिया। शशांक को आश्चर्य होता है ये लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं। भीड़ छंट जाने के बाद शशांक भी बाहर आता है तथा लगेज लेकर उस हाल में पहुंचता है जहां उनलोगों के लिए सोने की व्यवस्था की गई थी। एक बेड पर अपने लगेज को रखकर कपड़े बदल बाथरूम की ओर। वहां का दृश्य देखकर शशांक के अन्दर का अबतक का सारा झिझक निकल जाता है। सभी एक-दूसरे के साथ छेड़छाड़ कर रहे थे भले हीं भाषा न समझ पा रहे हैं पर इन्हें लगता है सब एक माता-पिता के संतान हो यही है भारतीय सेना की विशेषता। बाथरूम से फ्री हो प्राय: सभी आउटिंग के लिए बाहर निकल गये।

              अगली सुबह ह्वाइट टी शर्ट एवं पैंट तथा सफेद मोजे-किड्स और चेस्ट नम्बरों से सजे-धजे सारे के सारे जेन्टलमैन दिख रहे थे वे स्वमेव हीं अनुशासन की धारा में बह रहे हैं। मार्निंग ब्रेकफास्ट के बाद हीं आज से प्रारंभ हो जाएगी सायको टेस्ट। दस-दस की टोली बना दी गई थी पर शशांक के लिए सबसे आश्चर्यजनक विषय थी टोली का निर्माण जहां प्रतियोगी विभिन्न भाषा-भाषी थे। अतः सबने आपस में तय किया कि हमलोग अपना कम्यनिकेशन हिंग्लिश में करेंगे। तीन जन ऐसे थे जो केवल अंग्रेजी हीं को श्रेय समझते थे। वैसे आज फर्स्ट टेस्ट था ग्रुप डिस्कशन और प्राकृतिक वातावरण भी बिल्कुल अनरुप। प्रात:काल हल्की - हल्की बूंदा-बांदी ने गतकाल की उष्णता को कम कर दिया। शरत् ऋतु अपनी अंतिम पड़ाव पर। नीले आकाश के तले इलाहाबाद सेना युनिट बड़े-बड़े सघन वृक्षों से आच्छादित और इनपर पड़़नेवाली किरणें पत्तों के झोप से छन - छन कर हरे घास के मैदानों पर पड़ रही थी। लेकिन टेस्ट का हौवा ऐसा था कि किसी को फुर्सत नहीं थी जो इस प्राकृतिक सौंदर्य का रसपान करें। सब आपस में विभिन्न करेंट टापिक्स पर चर्चा कर रहे थे। शशांक-पवन दोनों हीं अलग-अलग टोली में बंट गये। ब्रेकफास्ट के बाद एक-दूसरे को विश भी न कर सके। शशांक की टोली जहां खड़ी थी वहीं से पवन भागता हुआ वहां से जाता दिखा। तुरंत शशांक ने आवाज लगाई-हाय पवन विश यू गूडलक। प्रत्युत्तर में पवन हाथ उठाया और कहा - थैंक्स बंगाली दादा,कैरी अन योरसेल्फ।

टेस्ट कुछ हीं पल  में प्रारंभ हो जाएगी। प्रतियोगियों को राउण्ड पोजीशन में बिठाया गया तथा सामने पांच फूट की दूरी पर एक फूट ऊंची स्टेज थी जिस पर दो मेजर रैंक के अधिकारी एवं एक सिविल ड्रेस में शायद सायकोलॉजी स्पेशलिस्ट बैठे थे। टापिक दिया गया वोमेन एम्पावरमेंट इन इंडिया। प्रतियोगियों की धड़कन बढ़ गई थी पहले कौन-पहले कौन। प्राय: सभी आफ्टर यू - आफ्टर यू कर रहे थे और दूसरी ओर तीन जोड़ी आंखें सबके हृदय को भेदने पर तुली हुई थी। अंत में शशांक उठ खड़ा होता है और बोलना शुरू किया - "गुडमार्निंग आफिसर्स आय वान्ट योर परमिशन टू स्टार्ट टूडेस टपिक।" " आफकोर्स" सामने वाले ने हाथ उठाकर संकेत दिया और शशांक बिना विलम्ब किये अंग्रेजी - हिन्दी मिली भाषा में टेप रिकॉर्डर आन कर दिया तथा बेल लगने से पहले हीं थैंक्स माय फ्रेंड कहकर अपने चेयर पर बैठ गया। इसके बाद एक - एक कर दसों ने अपना-अपना पक्ष रखा।

             बड़े हीं खुशनुमा वातावरण में आज के सारे टेस्ट पुरे। आगामीकाल के टेस्टों के लिए अफसरों ने शुभकामनाएं दी। हंसी-मजाक एवं आनन्द में शाम हो चली और आउटिंग के लिए सभी लोग निकल चुके थे। लेकिन आज एक नये रुप देखने को मिला हालांकि इससे शशांक के लिए अस्वाभाविक न था परन्तु इतना समझ गया कि सरकारी पदाधिकारियों के लिए इट ड्रिंक बी मैरी लाइफ हो हीं जाती है तभी तो जब टेस्ट चल रही थी सारे कैन्डिडेट्स एकदम डिसीप्लीन्ड जैन्टेलमेन और इस समय अधिकतर के कदम लड़खड़ा रहे थे। खैर जो भी हो एक दिन-दो दिन……….. और अंतिम पांचवें दिन लेफ्टिनेंट जनरल के सामने इन्टरव्यू। विगत रात से तैयारियां चल रही थी। प्राय: सारे कैन्डिडेन्टस टेन्सन ग्रस्त थे यहां तक कि जिन्होंने ड्रिंक किया था उनके आंखों से भी नींद गायब। अभी आकाश में लालिमा ने आंखें खोलना शुरू हीं किया था और जनरल के सामने इन्टरव्यू में उपस्थित होने के लिए साज - सज्जा होनी चाहिए। क्या पहनें ताकि प्रिसाइडिंग अफसर एवं अन्य आफिसर्स को इम्प्रेस्ड किया जाय।

साक्षात्कार अपने पूर्व निर्धारित समय पर आरंभ हो गया। कैंडिडेट्स के लिए व्यवस्था में कोई त्रुटी नहीं छोड़ी गई। इनके चेहरे पर उबाउपन न आए वो सारी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थी। अप-टू-डेट पोशाक में सबका व्यक्तित्व निखरकर उज्जवल चांद की तरह लग रहा है। एक - एक कर कैंडिडेट इन्टरव्यू रूम में जाते तथा मुश्किल से तीन मिनट में बाहर निकल आते । उस समय रुमाल से ललाट पोछते मुखमण्डल बैशाख - जेठ के दोपहर के समान दिखाई दे रही है। जिनका साक्षात्कार हो जा रहा है उनकी भेंट जिसका साक्षात्कार नहीं हुआ इनके साथ किसी भी प्रकार का संपर्क न हो ऐसी व्यवस्था की गई थी। खैर जो भी हो शशांक की बारी थी। वह आगे बढ़ा़, दरवाजे पर पर्दा हटाने से पूर्व ही। शशांक ने कहा -" में आय कम इन सर"

"यस कमीन"....... शशांक अन्दर प्रवेश किया।

"बी सीट डाउन।"

"थैंक्यू सर।"

"योर नेम।"

"माय नेम इज शशांक शेखर भट्टाचार्य।"

"ह्विच स्टेट विलंग्स"

"आय विलांग्स वेस्ट बेंगाल"

"ह्वाट आज योर फादर"

"माय फादर इज ए सिम्पल मैशन"

"हाउ मेनी ब्रदर्स एण्ड सिस्टर्स"

"सर आय एम सिंगल चाइल्ड आफ माय पैरेंट्स"

"इफ यू आर सिलेक्टेड देन हाउ यू वील लूक आफ्टर हर"

"सर, मेरे लिए जितना संभव होगा उन्हें खुश रखने का प्रयास करूंगा"

"ओ के जेन्टलमैन ए लास्ट क्वेश्चन ह्वाई यूं वांट ज्वाइन द आर्मी"

"ऐज ए गूड सिटीजन मेरा प्रथम कर्तव्य है अपने देश की सीमाओं की रक्षा करना तथा आय नो आय हैव क्वालिटी लाइक आर्मी अफसर तो क्यों न सेनाधिकारी बनूं। एक-एक प्रश्न के उत्तर में शशांक का आत्मविश्वास झलकता है। अंतिम प्रश्नोत्तर को सुनकर प्रिसाइडिंग अफसर के ओंठो पर मुस्कान दिखती है।

"ओ के जेन्टलमैन।"

"थैंक्यू सर।"

शशांक मुस्कराते हुए बाहर निकल आया और उसी ओर गया जहां अब तक जिन लोगों की इन्टरव्यू समाप्त हो गई थी। और सब उसे घेर लेते हैं। हाय बंगाली दादा कैसा रहा, क्या पूछा, क्या उत्तर दिया आदि की झड़ी लगा दी गई। कुछ लोग अपने रियेक्सन दे रहे थे। कुछ कह रहे थे कि ये सारे प्रश्न तो हमारा मजाक उड़ाना है। किसी ने कहा कि यहां आफिसर्स सिलेक्शन नहीं कैंडिडेट्स रिजेक्शन थी परन्तु शशांक ने कहा आय डोंट माइंड लेकिन आज पांचवा दिन है सेना ने हम सबको अपना दामाद मान आवभगत तो की। इस पर सभी ठहाके लगा कर हंसने लगे। प्रतिदिन की भांति आज भी रिजल्ट की घोषणा हुई जिसमें कहा गया था जिनके चेस्ट नम्बर बताया गया है दे विल प्रेफर फर मेडिकल टेस्ट ओन्ली ऐण्ड रेस्ट आफ आल थैंक्यू। धीरे-धीरे निरवता की चादर फैलती जा रही है और उसका साथ अस्ताचलगामी सूर्य पश्चिमी व्योम को अपने प्रभाव से मुक्त कर दिया। शशांक भी अपना लगेज समेटकर वापसी के लिए तैयार हो गया। परन्तु उसके मन में अपनी त्रुटि कहां रह गई यह जानने की उत्कंठा सागर की लहरों की भांति उठ रही थी - गिर रही थी। कौन बताएगा - किससे पूछे। ट्रेन तो रात आठ बजे के बाद है। ठीक है प्रयास करते हैं। ऐसा सोचकर शशांक की टोली का रेस्पॉन्सिबल अफसर मेजर एस आनन्द से मिलने का कोशिश की और इसमें वह सफल रहा। मेजर आनन्द के सामने उसने अपनी जिज्ञासा प्रकट की। थोड़ी देर के लिए मेजर आनन्द शशांक के चेहरे पर झलकता आत्मविश्वास देख आश्चर्यचकित होता है। "ओ के आय ट्राय टू हेल्प यू जस्ट होल्ड फाईव मिनट फर मी।" शशांक बाहर खड़ा इन्तजार करता है। इन्तजार तो इन्तजार होता है जिसमें परेशानी तथा उबन का मिश्रण हो। पांच मिनट ऐसे लग रहा था जैसे पता नहीं कितने घंटे चले जा रहे हो। लगभग दस मिनट पश्चात मेजर आनन्द सामने था और कहा कि "यंगमैन योर पर्सनलिटी इज सो पुअर" डोंट वरी डिटरमाइण्ड योरसेल्फ इन अनदर वे आप लाइफ और सुनो निराश मत होना। योर फ्युचर इज ब्राइट।

"थैंक्यू सर। मैं निराशावादी नहीं हूं। माय विल पावर इज स्ट्रांग।

"एक गूड चैंप" शशांक सहजता के साथ मुड़ता है और धीरे-धीरे आगे बढ़ता है। पता नहीं क्यों मेजर आनन्द उसे जाते हुए देख रहा था। शशांक को इस समय पवन का ख्याल ही न था जो इस समय उसके पीछे पीछे चला आ रहा था। जब दोनों पास-पास आ गए तो पवन ने ही टोका - "शशांक वापसी पर हो!" दोनों के हीं कदम जमीन से चिपक गया। एक सिकन्दर दूसरा पोरस जिनके बीच भावनाओं की अभिव्यक्ति की कोई भाषा न थी। "कांग्रेचुलेशन बंधु, माय विशेस वीथ यूं।"

"थैंक्स। मैंने तो स्वप्न देखना प्रारंभ कर दिया था कि हम……... " इसके बाद वह वाकरुद्ध हो जाता है।

"डोंट वरी पवन। यू आर गोईंग टू बिकम ऐन आर्मी अफसर और एक सेनाधिकारी का भावना के लहरों से लड़ने की क्षमता रहना चाहिए।"

"शायद तुम ठीक कहते हो" पवन के शब्दों में पांच दिन की मित्रता नदी के किनारों की भांति टूटता नजर आया। और इस किनारे के एक प्रांत पर शशांक तथा दूसरे किनारे पर पवन खड़ा हो गया।

"हां। एक दम। बट आय वीलिभ वी वील मीट अगेन एण्ड ईट्स माय प्रोमिस"। और इस पर दोनों हीं खिलखिला कर हंस उठा। तब पवन कहता है "चलो स्टेशन तुम्हे छोड़ आते हैं।"और…………..

                आठ वर्ष पश्चात अर्थात १९९३ दार्जिलिंग हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टिट्यूट में बैसिक माउंटेनियरिंग कोर्स का प्रथम सप्ताह की समाप्ति का दिन। सेना के चार अधिकारी, कुई जे सी ओ एवं एन सी ओ भी ट्रेनिंग ले रहे हैं। शाम का रोलकल हो चुका है और ये चारों सेनाधिकारी आउटिंग में निकल एक महंगे रेस्टोरेंट में बैठे आपस में एक ट्रेक टू टाइगर हील पर घटी घटना पर चर्चा कर रहे हैं की एक सिविलियन ट्रेनी ने अपने फ्लाईंग अफिसर को चुनौती दिया है कि वह हम सेनाधिकारी बाईलक एण्ड एबिलिटी से सिलेक्टेड होते हैं और बैसिक कोर्स में प्रमाणित करके दिखाएगा। "हाउ डेयर ही इज।" यह सुनकर उनमें एक कैप्टेन रैंक का अधिकारी था उसने गहरी सांस ली और कहा - "डोंट मेक हिम अण्डर ईस्टीमेड। आय शैल मीट हीम ऐट याकसम।" "यू आर राईट कैप्टेन। ही इज ए अर्गेटिक जैन्टेलमैन एण्ड आय लाइक हीम एण्ड हैव एक्सेप्टेड चैलेंज इन फ्रेंडली।"

              दूसरी ओर सिविल ट्रेनियों में भी एक लहर आलोचना की चल रही थी कि वो बंगाली दादा ने उस डीफेंस आफिसर को क्या झटका दिया है मजा आ गया। और लहर की शुरुआत तो प्रथम दिन से हीं हो गई थी। डिफेंस अधिकारी जैसे ट्रेनी न होकर वी आई पी हो तथा उनके लिए सारी व्यवस्था को देख सिविल ट्रेनियों को बड़ा अजीब लगता है क्योंकि उनमें एवं सिविलों के बीच एक दूरी बन गई थी। इतना हीं नहीं वो लोग भी इनसे मित्रों ऐसा मेल - जोल बढ़ाने का प्रयास नहीं करते थे। खैर जो भी हो इनके बीच वह बंगाली दादा प्राय: सबका प्रिय बंधु बन चुका था। उसका बात - चीत, व्यवहार तथा सबसे मिलकर रहना सबको प्रभावित किया। जिस समय सभी टायगर हील पहुंचे और फोटो में एक दूसरे को कैद कर रहे थे। भला कौन ऐसा होगा जिसे हिमालय की गोद में बसा टायगर हील की सुन्दरता आकर्षित न करें। मेघाच्छादित आकाश हल्की - हल्की ठंडी हवाओं का झोंका अपनी स्पर्श से जो आनन्द देती है इसका बखान शब्दों में किया हीं नहीं जा सकता है और यदि भुवन भास्कर की कृपा रही तब आकर्षण में चार चांद लग जाएंगे। बंगाली दादा ऐसे हीं एक फोटो समूह के सामने पहुंचा और उन लोगों से कहा - "मे आय ज्वाइन वीथ यू" प्रत्युत्तर मिला - "ह्वाई नट" और फोटो कैमरे के अन्दर। फिर कुछ बातें भी हुई तथा बंगाली दादा के साथ परिचय। जब अंतिम ट्रेनी ने अपना नाम बताया आय एम विवेक कट्टी फ्राम महाराष्ट्र एण्ड यू, शशांक शेखर भट्टाचार्य फ्राम वेस्ट बेंगाल। मुझे पता है मिस्टर कट्टी यू आर फ्लाईंग आफिसर। हालांकि विवेक चौंकता है पर प्रकट नहीं होने दिया। बातें और भी आगे बढ़ी। शशांक ने अपनी बातों से ट्रेकिंग की थकावट दूर भगा दिया। इसके बाद शशांक की पेशे के बारे में विवेक जानना चाहा। शशांक ने हंसते-हंसते कहा कि यदि मेरे लक ने साथ दिया होता तो आज मैं भी कैप्टेन रैंकधारी होता। विवेक उसे समझाया कि डिफेंस अफिसर सभी नहीं हो सकते हैं जिनमें क्वालिटी रहेगी वही डिफेंस अफिसर बनेगा। हंसी-मजाक के वातावरण में शशांक ने कहा - " तो फिर लगी शर्त यदि इस कोर्स में मैं तुम्हें बीट कर दूं तो तुम्हें अपने इस ग्रुप के दोस्तों को भर पेट मिठाई खिलाने होंगे। वैसे मिस्टर फ्लाईंग आफिसर मुझे अपने डिफेंस अधिकारी बनने का कोई दु:ख नहीं क्योंकि मैं स्वयं तो न बन सका पर तीन युवक को डिफेंस अधिकारी बना चुका हूं और लगभग पचास से ज्यादा युवाओं को आर्मी एअरफोर्स तथा पैरामिलिट्री फोर्स में भर्ती करवाया जिससे लगता है मैंने एक सैनिक अधिकारी का दायित्व पालन किया है। एस-एस-बी की ब्रीफिंग ने मेरे जीवन धारा को नई प्रेरणा प्रदान की थी और मैं अपने कार्य से खुश हूं। फ्लाइंग आफिसर कट्टी शशांक यानी बंगाली दादा के मुखमण्डल को देखता रहा और इसी वार्तालाप के बीच सेकेंड लेफ्टिनेंट राज फ्लाईंग आफिसर कट्टी को बुलाने आया था जिसे उसने ठहरने का इशारा किया और पुरी घटना को सुनकर वह हजम नहीं कर पाया उसे मन हीं मन विवेक और शशांक पर क्रोध आ रहा था।

                और इन अधिकारियों में जो कैप्टेन था किसी की याद ने उसे अस्थिर कर दिया। उसे बस रह-रह कर वे शब्द याद आ रही थी "वी शैल मीट अगेन इटृस माय प्रोमिस।"



Rate this content
Log in

More hindi story from Mukul Kumar Singh

Similar hindi story from Inspirational