गलती
गलती
हां मैं वहीं खड़ा था जब कुछ लोगों ने मेरे भाई को चारों तरफ से घेर रखा था, मेरा भाई जो मात्र 2 साल का ही छोटा था मुझसे, उससे से कुछ दूरी पर ही मां भी भी खड़ी थी| मेरी आंखों के सामने ही मेरे भाई को काट डाला उन लोगों ने बड़ी निर्ममता से| वह मां की बाहों में जा गिरा, कितना पीड़ादायक दृश्य था पर इससे भी उन लोगों का मन नहीं भरा और मेरी मां के पास गया और मेरे भाई के पार्थिव शरीर को अलग किया जिसमें अभी भी जान थी फिर भी उन लोगों ने उससे भी ज्यादा बेरहमी से मेरी मां को मेरी आंखों के सामने काट डाला। वह मेरी बाहों में आकर धड़ाम से गिर पड़ी, अचानक और गति से गिरने के वजह से मैं लड़खड़ा गया पूरा शरीर झकझोर गया।
मेरा एक बांह भी टूट गया। यह सब मैं चुपचाप खड़ा देखता रहा ,चाह कर भी मैं कुछ ना कर सका। मैं आश्चर्य से मूक और अवाक रह गया। क्या गलती थी मेरे छोटे भाई की,मैं उसे बचपन से देख रहा था वह मेरे साथ खेला करता। याद है मुझे जब हम साथ में पंछियों के साथ खेला करते थे कभी पंछी उसके पास जाती तो कभी मेरे पास। वह उन्हें घंटों अपनी बाहों में छुपा उन्हें प्यार करता ,उससे बातें करता। उसकी सिर्फ यह गलती थी कि वह सड़क के किनारे खड़े थे।
(एक वृक्ष की आपबीती)
