काल्पनिक तस्वीर,सच्चे एहसास
काल्पनिक तस्वीर,सच्चे एहसास
एक अलसाई शाम जो रात से थोड़ी दूर खड़ी थी| वह दिन और रात के बीच खड़ी थी ,सूर्यास्त हो चुका था परंतु लाल किरणों ने अभी तक आसमान पर बसेरा जमा रखा था |वह थोड़ी देर और उसने फैलाना चाहती थी,उन पंछियों के लिए जो दिन में भोजन की तलाश के बाद घर लौट रहे थे | उस किसान के लिए जो गांव के कच्चे रास्तों से होते हुए अपने बैलों को लेकर घर लौट रहा था और अंधेरा होने से पहले ही घर लौट जाना चाहता था, उन मुसाफिरों के लिए जो अंधेरा होने से पहले एक नया ठिकाना ढूंढ सके ,उन युवतियों के लिए जो अंधेरे के साए से भी डर जाती है उनके कदमों की तेज चाल उनके मन के भीतर के डर को बता रहा था जो युवतियां से कॉलेज ऑफिस और ट्यूशन से लौट रही थी यह लाल किरणें उस पर्यटक के लिए रुकी हुई थी जो अपने प्रेमी,प्रेमिका, परिवार वाले के साथ समुद्र झील या एक सनसेट पॉइंट के पास इसका आनंद ले सके और मैं इन सब से कहीं दूर शहर के एक छोटे से पार्क में हरे घास पर लेटा हुआ और आसमान पर नजर गड़ाए बैठा हुआ हूं कितनी अजीब होती है यह शाम सामने से लोग चले भी जाएं परंतु पहचान ना सकेंगे इस धीमी लाल रोशनी में सभी लोग दिख तो रहे हैं परंतु परछाई की तरह सब एक समान| यहां आवाज एक पहचान बन जाती है|
काले बादल धीरे-धीरे आसमान में अपना बसेरा जमाने लगे हर बादलों का समूह एक काल्पनिक तस्वीर बना रहा है| एक समूह ज्वालामुखी सा दिख रहा हैतो दूसरा एक सफेद बादल की तरह ,एक बादल मानो ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे कोई आदमी अपना एक हाथ आगे करके उड़ रहा हो शायद हनुमान भगवान है, ्या सुपरमैन| मैंने उस ज्वालामुखी बादलों को देखा जो मेरी आंखो के सामने था मैंने अपने काल्पनिक पेन और eraser निकाली और उन बादलों में एक चाहने वाली वाले की एक तस्वीर बनाने लगा कुछ काले और सफेद बादलों को मिलाकर उसके चेहरे को बनाया सफेद बादलों से बने उसके होठों को यह लाल किरणें और भी खूबसूरत बना रही थी उसके यह काली आंखें मेरा दीदार कर रहे थे जब भी दिल की बात उसे बताता तब बादलों के बीच से उसके दिल के पास से बिजली कड़कती और उसका जवाब मुझे मिल जाता तेज हवाओं ने उसकी आंखों के पास से एक सफेद बादल को अलग कर दिया जो उसके रोने का प्रतीक कर रहा था और वह आंसू की बूंद बारिश के रूप में मेरे होठों पर गिरा सच में वह बूंद नमकीन थी| उससे इतनी दूरी बर्दाश्त ना हुई और मेरी काल्पनिक तस्वीर मुझसे मिलने मेरी ओर चलने लगी और मैंने बदले में अपनी बाहें फैला दिया और खुद को रंग दिया जाने लगा उसके रंगों में|
