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Anita Sharma

Drama Inspirational Children

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Anita Sharma

Drama Inspirational Children

गलती किसकी

गलती किसकी

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"न जाने कैसे डॉक्टर को दिखा लाईं तुम्हारी मां मेरे बेटे को उसके पूरे शरीर पर लाल चकत्ते हो गए है सुनील तुम कुछ करते हो कि मैं अपने बेटे को लेकर मायके चली जाऊं?,,

"अरे नहीं नीलम मां ने अच्छे डॉक्टर को ही दिखाया होगा अब अगर हमारे बच्चें के शरीर पर लाल चकत्ते हो गये है तो मुझसे शिकायत करने से अच्छा है मां को बताओ वो फिर उसी डॉक्टर के पास ले जायेगी जरूर उसे कोई दवाई रिएक्शन कर गई होगी।,,

"हां तुम अपनी मां की तरफदारी करते रहो बस हम सबसे दूर रहकर मां के अच्छे बेटे बने रहना।तुम कभी अच्छे पति अच्छे पिता बनने के बारे में कभी मत सोचना मुझे तुमसे कोई बात ही नहीं करनी।,,

सुनील ने अपनी पत्नी नीलम को अपनी मां की शिकायत करने पर समझाने की कोशिश की और खुद मां को कृष की तबियत के बारे में बताने को कहा तो वो उससे और भी ज्यादा गुस्सा होकर नीलम ने फोन काट दिया तो सुनील परेशान सा अपने कमरे में इधर उधर टहलने लगा।

अपने घर से दूर सुनील शहर में नौकरी करता है। वैसे तो नीलम शादी के बाद ही सुनील के साथ आ गई थी पर अभी बच्चा होने की वजह से मां ने उसे अपने पास ही बुला लिया था ताकि उनकी बहू को कोई परेशानी न हो और वो अपने बहू पोते के साथ पापा का भी ख्याल अच्छी तरह से रख पायें क्योंकि बाबूजी की तबियत आजकल थोड़ी नासाज रहती थी।बच्चे और नीलम का मां पापा के पास होने से सुनील भी निसफिक्र था।

मां ने भी तो उनका भला ही चाहा था पर नीलम को न जाने क्यों सुनील की मां में हमेशा कमियां ही दिखाई देंती थी।अभी उसके छै महीने के बेटे कृष का अन्नप्राशन हुआ था उसी के बाद से उसकी तबीयत ठीक नहीं थी कभी उसे बहुत सर्दी हो जाती तो कभी उसका पेट खराब हो जाता बस इसी लिऐ मां अपने शहर के अच्छे डॉक्टर को जिसे उन्होने अपने बच्चों को भी दिखाया था दिखाकर लाईं थी क्योंकि मां को तो अपना पोता अपने बेटे से भी ज्यादा प्यारा था पर न जाने क्यों दवाई खाते ही कृष के शरीर में लाल-लाल दाने हो गये थे।दवाई दिलाने के बाद कुछ जरूरी काम होने से मां एक दिन के लिऐ अपनी ननद यानि सुनील की बुआ के पास गईं थीं और नीलम उन्हे बच्चे की परेशानी बताने की जगह सुनील को फोनकर उसकी मां की शिकायतें सुना रहीं थी।

बात छोटे बच्चे की तबियत की थी तो सुनील ने जैसे तैसे अपने बॉस को अपनी परेशानी बताकर छुट्टी ली और घर पहुंच गया और वहां पहुंचकर देखा कि मां को भी बाबूजी ने फोन कर बुआ के यहां से बुला लिया था। मां बच्चे को लेकर अस्पताल चलने की तैयारी कर रहीं थीं तो वो नीलम से भी साथ चलने को बोल रहीं थीं पर नीलम अपने बेटे की बीमारी का गुस्सा अपनी सास पर उतारते हुऐ उनसे बोल भी नहीं रहीं थीं।और जब मां ने नीलम के गुस्से से परेशान होकर कृष को लेकर अकेले ही डॉक्टर के पास जाने को बोला तो वो मां पर बिफर पड़ी.....

"हां अब तो बोलोगी ही कि तुम अकेले चली जाओ पहले तो मेरे बच्चे को न जाने कौन से गली मोहल्ले के छोटे से डॉक्टर को दिखा लाईं और अब जब उसकी तबियत बिगड़ गई तो मुझे अकेले भेजकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहीं हैं।,,


मां से तो अपनी बहू से कुछ कहते ही नहीं बन रहा था क्योंकि वो समझ रहीं थीं कि बहू अपने बच्चे को लेकर परेशान है फिर भी उन्होंने नीलम को समझाने की कोशिश की....

"बेटा तुम मुझसे गुस्सा बाद में कर लेना अभी सबसे ज्यादा जरूरी है बच्चे को डॉक्टर को दिखाना ।तुम्हे तो अभी तक अकेले ही जाकर कृष को डॉक्टर को दिखा आना चहिए था पर तुम नहीं गईं तो कोई बात नहीं अब तो चलो।,,

"नहीं मम्मी जी मैं आपके साथ अपने बच्चे को नहीं ले जाऊंगी ।सुनील को आने दो मैं उन्हें पहले दिखाऊंगी कि आपकी कंजूसी की वजह से देखो उनके बेटे को कितना कष्ट हो गया है फिर उन्ही के साथ डॉक्टर के यहां जाऊंगी।,,

अपनी बहू की बात सुनकर सुनील की मां कुछ बोलने जा ही रहीं थीं कि सुनील ने उस समय उन्हे चुप रहने का इशारा किया और आगे बढ़कर अपना बैग वहीं बीच आंगन में रखकर कृष और नीलम को साथ लेकर उसी डॉक्टर के पास पहुंच गया जहां उसकी मां दिखाकर लाईं थी ।डॉक्टर ने जैसे ही कृष को देखा तो बड़े ही धैर्य से बोला.....

"ये लाल चकत्ते कोई बड़ी बात नहीं हैं ये किसी दवाई के असर से नहीं हुऐ है ये तो मौसम में नमी और खुश्की एक साथ होने की वजह से हो रहे है या हो सकता है आप इसको जो भी लोशन वगेरह लगातीं है उसकी वजह से हो रहे हैं तो आप वो बंद करके कुछ दिन तक सिर्फ नारियल तेल लगाईये सही हो जाएंगे।

और डॉक्टर ने बिना एक भी दवाई दिये उन्हे बिदा कर दिया।घर पहुंचकर सुनील ने सबसे पहले कृष को लगाये जाने वाला सामान को देखा जिसे नीलम ने टी बी के एड देखकर उनसे प्रभावित होकर मंगाया था फिर नीलम से मुखातिब होकर बोला.......

"अब बोलो नीलम तुम क्या कहोगी ये जो कृष को तकलीफ हुई है उसकी वजह मेरी मां नहीं बल्कि तुम खुद हो अब तुम अपने आपको क्या बोलोगी अभी तक तो तुम रोज मेरी मां की शिकायतों का पुलिंदा लेकर बैठ जाती थी "तुम्हारी मां कंजूस है पैसे बचाने के लिऐ कृष को नारियल तेल लगाती हैं, तुम्हारी मां ने छोटे डॉक्टर को दिखा दिया,तुम्हारी मां ने गलत दवाई दिला दी।,,

एक बात बताओ नीलम जब हमारे बेटे को तकलीफ हुई वो वक्त मां से गुस्सा दिखाने का था उनकी शिकायत मुझसे करने का था या कि बच्चे को डॉक्टर के यहां ले जाने का था। तुम्हे उस समय ये बात समझ क्यों नहीं आई कि अगर कृष को दवाई रिएक्शन की है तो उसमें मां का कोई दोष नहीं है उन्होंने तो वही दवाई लाई न जो डॉक्टर ने लिखी थी तो तुम्हे डॉक्टर के पास जाना चाहिये? भगवान न करे अगर दवाई का कुछ ज्यादा असर होता तो तुम तो शिकायत ही करती रहतीं तुम्हे तो बच्चे की कोई परवाह ही नहीं थी? उस पर कहती हो कि तुम्हारी मां को कुछ नहीं पता तुम सब जानती हो।

सुनील की बातों का नीलम के पास कोई जवाब नहीं था।आखिर गलती उसकी ही तो थी जो वो अपनी सास की शिकायत करने और उन्हें उनके बेटे के सामने गलत साबित करने के लिऐ उसने इसबात पर ध्यान ही नहीं दिया था कि इस सब में उसके बेटे को कुछ हो जाता तो? तभी सुनील फिर बोला.......

"नीलम तुम अपना और कृष का सामान बांधों क्योंकि में नहीं चाहता कि अब मेरी मां के अच्छे कामों का सिला तुम उनकी बेज्जती करके दो।,,

अभी नीलम कुछ बोलती कि सुनील की मां बोल उठीं.....

"अरे बेटा कोई बात नहीं वो एक मां है डर गई होगी मैं समझ सकती हूं अगर नीलम तुम्हारे साथ जाना चाहे तो खुशी खुशी जाऐ पर तुम उसे यहां से यूं मेरी वजह से डांट कर मत ले जाओ।,,

अपनी सास की बात सुनकर नीलम ने उनके सामने सर झुकाकर हाथ जोड़ दिए क्योंकि वो समझ गई थी कि एक मां कभी भी अपने बच्चे का बुरा नहीं चाह सकती हो फिर चाहे वो दादी मां ही क्यों न हो।


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