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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Tragedy

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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Tragedy

“गाँव की बारात में गाँव वाले नदारत” (संस्मरण)

“गाँव की बारात में गाँव वाले नदारत” (संस्मरण)

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घर में कदम रखते ही मेरी आशा ने मुझसे कहा,--“अभी -अभी आपका कॉल आया था ! गाँव से राजू ने आपको याद किया है !”“क्या कोई खास बात?” मैंने पूछा !“ नहीं , वो खुद आपको कॉल करेगा !...... आखिर मॉर्निंग वॉक में मोबाइल क्यों नहीं ले जाते हैं ?”-शिकायत भरी लहजे में आशा ने मुझसे कहा ! मैंने भी हाँ कह दिया , --“कल से मोबाइल ले जरूर ले जाऊंगा !”9 बजे रात में राजेश कुमार झा उर्फ राजू का कॉल आया ! मोबाइल उठाते राजू बोला ,--“चाचा जी! प्रणाम ,मेरा प्रथम पुत्र आकाश की शादी बौंसी बाँका जिला में लगी है ! दिनांक 30 नवम्बर 2025 को बाबा बासुकीनाथ दुमका झारखंड में एक शादी भवन में होगी ! आपको अवश्य आना है !”बाबा बासुकीनाथ धाम दुमका में ही है ! दुमका से मात्र 23 किलोमीटर दूरी पर एक तीर्थ स्थान है ! और अपने गाँव के लोगों से भी मुलाक़ात हो जाएगी ! मैंने झट जवाब दिया ,---“ठीक है,जरूर मैं आऊँगा, परंतु मुझे पहुँचना कहाँ है ?”“चाचा जी ,मैं आपको इसकी सूचना व्हात्सप्प पर भेज दूंगा”बहुत दिन हो गए थे ! इस बीच अपने गाँव परमानपुर प्रखण्ड विसनपुर जिला भागलपुर जाने का मौका ही ना मिला ! दरअसल मेरा पैतृक गाँव गनौली ,प्रखण्ड अंधराठाढ़ी, जिला मधुबनी है ! परमानपुर मेरे पिता जी का मामा गाँव है ! मैं अधिकतर परमानपुर से ही जुड़ा रहा, पर गाँव तो गाँव ही होते हैं ! परमानपुर बहुत छोटा सा गाँव है ! मैं हरेक व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से जनता हूँ ! चलो इसी बहाने बारात में आने वालों के साथ मुलाक़ात हो जाएगी !बारात को 86 किलोमीटर दुमका बाबा बासुकीनाथ आनी थी ! बीच में बौंसी पड़ता है ! लड़की वाले को यहीं आकार विवाह समारोह का आयोजन करना था ! मेरे लिए आसान था ! मुझे सिर्फ 23 किलोमीटर की दूरी तय करनी थी !वैसे आजकल बारात मैथिल समाज में भी “एक सञ्झु” (एक रात की) होती है ! पहले दो शाम यानि एक रात और फिर दूसरे दिन भोजन करके बाराती की बिदाई होती थी ! यहाँ तो एक ही रात की बात थी ! चलो कोई नहीं रात भर सोऊंगा नहीं , पर अपने लोगों से तो मिलुंगा !30 नवम्बर 2025 को अपनी मारुति ओल्टो-800 से मैं अकेला शाम 3.30 बजे निकल गया ! हालाँकि यह मुझे पता था कि कार्ड में लिखा हुआ था भागलपुर से बारात 7 बजे शाम को चलने की बात थी ! करीब उनलोगों को 3 घंटे तो लगेंगे ही ! बारात 10 बजे रात में बासुकीनाथ पहुंचेगी ! दरअसल मैं इतना जल्द इसलिए निकल गया कारण , मैं रात को गाड़ी चलाना नहीं चाहता हूँ ! आधे घंटे में मैं बासुकीनाथ पहुँच गया ! मंदिर के पास ही शादी भवन था ! मैंने अपनी गाड़ी शादी भवन के पार्किंग में सुरक्षित ढंग से लगा दिया और उसी गाड़ी में आराम करने लगा !गाड़ी के अंदर से ही शादी भवन की चहलकदमी देखता रहा ! राजू और उनके सभी लोगों के मोबाइल नंबर थे परंतु मैंने किन्हीं को कॉल करके यह नहीं पुछा कि बारात कब तलक पहुंचेगी ? ..... मैं सब ग्रामवासिओं को सर्प्राइज़ देना चाहता था !ठंठ का समय था ! ओल्टो में बैठे -बैठे शादी भवन की तैयारियों को देख रहा था ! तकरीबन 8 बजे तक कोई सुगबुगाहट बाराती की नहीं हो रही थी ! अब मन में होने लगा कि शादी भवन में पहुँचकर बारात के विषय में लड़की वालों से पूछ लूँ ! इसी क्षण में कुछ बच्चे मेरी कार के पास से गुजरने लगे ! मैं कार से बाहर आकार उनलोगों से पूछा,-----” ये बच्चे ! जरा सुनो तो!”बच्चे मेरे करीब आ गए और मुझसे पूछा,--“कहिए क्या बात है?”“आपलोग शादी में आए हैं?”“जी, हमलोग लड़की के तरफ से हैं!”एक लड़का तो लड़की का भाई ही था ! मैंने उनसे पूछ बैठा,---- “बारात कहाँ तक पहुँची है?”“ सुनने में आया है कि बारात वाली गाड़ी रास्ते में खराब हो गई है ! रात 12 बजे तक बारात यहाँ पहुंचेगी !”बच्चे चले गए पर थोड़ी देर में कुछलोग मेरे पास आ गए और बोलने लगे,--“माफ कीजिएगा हमलोग बहुर देर से देख रहे थे पर आप से पूछा तक नहीं ! वो तो बच्चों ने बताया कि आप बाराती से हैं ! चलिये अंदर चलिये ! सब इतजाम है !”सही में सब इतजाम था ! मुझे कमरा नंबर 106 दे दिया गया ! और उस कमरे की चाभी भी ! आदर सत्कार खूब जम के हुआ ! रात 12 बज के 55 मिनट पर बारात आयी ! रस्मों रिवाज होने लगे ! पर मेरी आँखें ढूंढ रही थी कि आखिर गाँव से कौन- कौन आए हैं ? बस राजू के ही परिवार से लोग आए थे ! उनमें जानने और पहचानने वाला एक भैरव था और दूसरा टुनटुन ! खैर ,दोनों से मिला ! भैरव मुझसे एक साल का बड़ा था ! मैंने पाँव छूकर प्रणाम किया ! टुनटुन मुझसे छोटा था ! वो मुझे प्रणाम किया ! हाल- चाल उनलोगों से ही गाँव का पूछा !सब रीति रिवाज के अंतर्गत शादी संपन्न हुयी ! मैं सुबह अपने कमरे से निकलकर चाभी शादी भवन के मैनेजर को हैंडओवर किया ! सबसे विदा लिया और अपनी गाड़ी लेकर दुमका आधे घंटे में दुमका आ गया ! पर मेरी लालसा गाँव के लोगों से मिलने की रही की रही रह गई !==================डॉ लक्ष्मण झा परिमल


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