"एक गरीब मां का सपना"(भावनात्मक और प्रेरणादायक)
"एक गरीब मां का सपना"(भावनात्मक और प्रेरणादायक)
समोद जो एक छोटे से गाँव का एक गरीब घर का लड़का था। उसके पिता मज़दूरी का काम करते और माँ दूसरों के घरों में सफाई का काम करती थी। गरीबी ने उनके सपनों को बहुत छोटा सा बना दिया था, लेकिन उसकी माँ का सपना बहुत ही बड़ा था—
वो चाहती थी कि समोद पढ़-लिखकर एक बड़ा आदमी बने और हर बेसहाराओं का सहारा बने।
किन्तु घर की परिस्थितियाँ इतनी आसान खराब थीं कि कभी एक वक्त खाना भी नसीब नहीं होता, तो कभी कपड़े तो कभी घर का अनाज खरीदे के भी लाले पड़ जाते। लेकिन अपने बेटे की पढ़ाई में उसकी मां किसी तरह की कोई कमी नहीं आने देना चाहती थी। स्कूल की फ़ीस भरने के लिए उसकी माँ ने दिन-रात मेहनत करने की ठानी।
समोद भी अपनी माँ की तकलीफ़ों को अच्छी तरह समझता था। वह दिन में स्कूल जाता और रात को सड़क के किनारे एक चाय की दुकान में काम करता।
और एक दिन जब स्कूल में परीक्षा का समय आया, तब उसी दिन से उसकी माँ बहुत बीमार पड़ गई। डॉक्टर ने कहा कि दवा नहीं मिली तो उनकी मां की हालत और भी बिगड़ सकती है। समोद विचार में पड़ गया क्योंकि उसके पास दवा खरीदने के भी पैसे नहीं थे। उसने बहुत सोचा, बहुत लोगों से मदद भी मांगी पर कोई मदद नहीं मिली। तब हताश और निराश होकर उसने बिना सोचे-समझे अपनी किताबें बेच दीं और माँ के लिए दवा ले आया। ये दवा और दुआओं का ही असर था कि उसकी मां अब धीरे-धीरे स्वास्थ्य होने लगी।
जब उसकी माँ को यह बात पता चली कि समोद ने उसकी दवाई के लिए अपनी सारी किताबें ही बेंच दी हैं तो उनकी आँखों से आँसू छलक आए। उन्होंने सामोद को अपने गले से लगाते हुए कहा, "बेटा, तुमने अपनी पढ़ाई क्यों छोड़ी दी?"
सामोद ने मुस्कुराकर जवाब दिया, "माँ, अगर आप नहीं रहेंगी, तो फिर भला मेरी पढ़ाई का कोई मतलब ही नहीं रह जाता।" यह सुनकर माँ की आँखों से गर्व और प्यार के आँसू छलक पड़े।
यह सब बातें जब सामोद के शिक्षक ने सुना, तो उन्होंने समोद को अपनी पढ़ाई और मेहनत जारी रखने को कहा और उसे मुफ्त में पढ़ाने का वचन दिया। समोद ने भी अपनी मेहनत जारी रखी और अपनी मेहनत के बदौलत वो वर्षों बाद एक बड़ा डॉक्टर बन कर गांव लौटा। गांव वालों के लिए वो प्रेरणा का श्रोत बन गया।
जिस दिन समोद डॉक्टर बनकर, अपनी माँ के पास आया और बोला, "माँ, आज से तुम्हारी सारी तकलीफ़ें खत्म। अब तुम्हें कभी भी काम नहीं करना पड़ेगा, देखो तुम्हारी मेहनत के बदौलत ही आज मैं एक डाॅक्टर बन पाया हूं। अब से आप की और गरीब लोगों की सेवा ही अब मेरा संकल्प होगा और उसे मैं उसे अच्छी तरह से निभाऊंगा, क्योंकि गरीब इंसान अपनी गरीबी की वजह से सही समय पर अपना इलाज नही करवा पाता !"
यह सब सुनकर माँ की आँखों में खुशी के आँसू आ गये थे। उन्होंने अपने बेटे को गले लगाया और कहा, "मेरी सबसे बड़ी कमाई तो तू ही है, बेटा, ये सब तेरी दिन रात की मेहनत का ही नतीजा है !"
यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची मेहनत और माँ-बाप के आशीर्वाद से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। चाहे जीवन में कितनी भी मुश्किलें क्यो न आ जाएँ, अगर इरादा मजबूत हो, पक्का हो तो इंसान अपनी तक़दीर खुद ही लिख सकता है।
