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Sonia Goyal

Tragedy

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Sonia Goyal

Tragedy

एक बूंद जिंदगी

एक बूंद जिंदगी

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कोरोना की महामारी ने सभी मजदूरों से उनके रोजगार छीन लिए थे। जिंदगी बसर करने के लिए कोई मार्ग नज़र नहीं आ रहा था। ऐसे में मजदूरों ने अपने गांव लौट जाना ही उचित समझा, पर जाएं कैसे रेलगाड़ी, बस सभी यातायात के साधन तो बंद थे। यहां रहना भी मुश्किल हो रहा था, तो ऐसे में बेचारे मजदूर अपने घरों के लिए पैदल ही निकल पड़े। इतना लंबा रास्ता, पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।

ऐसे में एक सात साल के बच्चे ने अपने पापा से पूछा,"पापा और कितना दूर जाना पड़ेगा, गला सूख रहा है पानी पीना है। अब मुझसे और नहीं चला जाएगा।"

उसके पिता ने बोतल में देखा तो सिर्फ एक बूंद ही पानी था। उसके पिता ने भगवान से कहा,"हे भगवान! ये कैसा दिन दिखाया है, बच्चों को बूंद-बूंद पानी के लिए भी तरसाया है।"

इतने में बच्चे की फिर आवाज़ आई,"पापा पानी दो ना।"

उसके पिता ने वो एक बूंद पानी अपने बेटे को देते हुए कहा,"ले बेटा आज तू भी एक बूंद जिंदगी का स्वाद चख ले।"

उस एक बूंद जिंदगी का स्वाद चखने के बाद बच्चे की जान में जान आई और फिर उसने अपने सफ़र की दोबारा शुरूआत की।



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