STORYMIRROR

Sudha Sharma

Tragedy

4  

Sudha Sharma

Tragedy

दुविधा

दुविधा

2 mins
32

     लघुकथा                       दिनांक 

                                    23.06.26

गाजियाबाद की बी एस एन एल सोसायटी में, जहां केवल बी एस एन एल विभाग के अधिकारी और कर्मचारी रहते थे, एक प्रोढ़ उम्र की महिला केवल चार घरों में काम करने आती। इससे अधिक घरों में काम करना उसके सामर्थ्य के बाहर भी था। लेकिन आश्चर्य इस बात का था कि वह रिक्शा में आती और रिक्शा में जाती। मन में सभी के यह प्रश्न उठता था कि यदि वह आने -जाने के लिए रिक्शा लगा सकती है तो घरों में काम क्यों करती है जबकि इस उम्र में कौन दूसरे के घरों में काम करता है। और यदि काम करना उसकी मजबूरी है तो परमानेंट रिक्शा चालक क्यों? क्योंकि वह जितनी देर काम करती है उतनी देर वह रिक्शा चालक उसकी प्रतीक्षा करता है। आखिर रहस्य क्या है। जितनी देर तक वह प्रतीक्षा करता है उतनी देर में तो वह चार चक्कर काट सकता है।

         यह प्रश्न सभी के मन में खटकता लेकिन किसी की पर्सनल लाइफ में झांकना ठीक नहीं। एक दिन जी एम की पत्नी सरला ने पूछ ही लिया “एक तरफ तो  तुम दूसरों के घरों में काम करती हो लेकिन आती जाती रिक्शा में हो ? इसका कारण क्या है?“ सुनकर उसकी आंखों में पानी आ गया। बोली,” बीबीजी यह रिक्शा वाला मेरा मर्द है। औलाद हमारे है नहीं । दुई साल पहले इनके पेट में दरद उठा । गली मुहल्ले के डाक्टर को दिखाए रहे। जब चार-पांच दिन हो गए तो एक आदमी अपनी जान -पहचान के डाक्टर के पास ले गया । फिर भी दर्द रहा तो बड़े अस्पताल दिखाया तो में पता चला कि डॉक्टर ने एक किडनी निकाल ली। पुलिस के पास गए उसने डांटकर भगा दिया। तो इनसे अब रिक्शा ज्यादा चलाई नहीं जाती। अब इस पेट को तो भरना ही है । मुझसे भी अब ज्यादा काम नहीं होता। चार घर यहां पांचवां घर अपना। बस इतना ही काम जबरदस्ती होता है। वो अगर मुझे रिक्शे में न लाएं तो मैं इतने घर ना कर सकूं। वो चली गई लेकिन सरला का मन बुरी तरह से अनेक प्रश्नों में उलझ गया।


Rate this content
Log in

Similar hindi story from Tragedy