दुख कहां है
दुख कहां है
दुख कहाँ है
दुख तब होता है
जब दो प्यार करने वाले बिछड़ते हैं,
जो कभी भी एक को ज़्यादा,
एक को कम नहीं होता है,
बस दुख होता है और वो दुख
दोनों की तरफ से बराबर होता है।
जहां एक की रात वैसे ही कटती है
जैसे दूसरे की सुबह होती है
जहां एक का दिल टूटता है
तो दूसरे का दिल भी रोता है
पर जब प्यार एक तरफ़ा है,
तो वहाँ दुख की जगह ही कहाँ है,
जहाँ प्यार है ही नहीं,
वहाँ दुख का वजूद ही कहाँ है।
वहाँ तो बस मन की बनावट है,
दिल की बनावटी सी कहानी है,
अंदर छुपी हुई एक ज़ुबानी है,
जो कभी कही गई ही नहीं,
जो कभी सुनी गई ही नहीं।
उसने तो प्यार किया ही नहीं,
उसने तो कुछ कहा ही नहीं,
तो दुख किस बात का है,
ये तो बस एक बनावटी सी कहानी है
इसे तुमने खुद से चुना है,
खुद ही खुद से कहा है,
और खुद से ही जिया है।
तुमने तो पाया ही नहीं,
तो फिर तुमने खोया क्या है?
इसलिए अब ये समझ लो,
एक तरफ़ा प्यार में दुख नहीं होता,
एक अधूरी सी कहानी होती है,
जो जिसके दिल ने लिखी
होती है,
बस उसे ही मिटानी होती है।
