दो बीता घूंघटा
दो बीता घूंघटा
विशाखा की शादी मुगलसराय मे बहुत ही ऊँच कुल के समाजसेवी के घर मे हुई।विशाखा पढे लिखे परिवार सेआई थी।विशाखा होस्टल मे रहर पी0जी0 की थी।विशाखा बचपन से पढने मे तेज थी।विशाखा एकल परिवार से थी ससुराल आई तो संयुक्त परिवार का कुनबा मिला।विशाखा का परिवार कहने को तो पढा लिखा समाज सेवी परिवार था पर घर मे बहू पर बहुत ही बंदिश था।बहू को घूंघट मे रहना,छत पर नही जाना,जोर से नहीं बोलना,हँसना मना था।विशाखा का यह सब देखकर अचरज होता कि माडर्न समाजसेवी परिवार बहू को बहुत ही अंकुश मे रखता।विशाखा ने मन ही मन अपने ससुराल को सुधार करने का प्लान किया।
विशाखा के ससुराल मे शादी के बाद कुलदेवता का पूजा होती हैं। कुलदेवता का निवास स्थान जौनपुर के ,एक छोटे गाँव मे हैं। वहाँ घर की बहू-बेटा जाकर कुलदेवता का दर्शन करते है एवं पूजा करते है।विशाखा को अपनी जेठानियों के द्भारा पता चला की उस गाँव की महिला जब भी किसी काम काज के लिये निकलती हैं तो आगे से सर पर दो बीता घूंघट डाल कर निकलती हैं।विशाखा ने साफ शब्दों मे सास ससुर से कह दिया कि उस गाँव मे पूजा के लिये सर पर पल्लू डाल कर जायेगी।वह किसी भी किमत पर सर पर दो बीता का घूघंट डाल कर नहीं जायेंगी ऐसी डिग्री का क्या फायदा कि सर पर दो बीता घूघंट से मुँह ढ़क कर पूजा किया जाये।लानत हैं ऐसी डिग्री का कि समाज से मुँह छिपा कर पूजा किया जाय। विशाखा के तेवर को देख कर सास ससुर की बोलती बंद हो गई। उन्होंने विशाखा को सर पर पल्लू रख कर कुलदेवता को दर्शन करने की अनुमति दे दी।
