Richa Baijal

Tragedy

3.5  

Richa Baijal

Tragedy

डिअर डायरी डे 16

डिअर डायरी डे 16

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डिअर डायरी डे 16


 मेरा देश उन जमातियों की वजह से तबाह हो रहा है । महाराष्ट्र में 1000 केस आ गए हैं और दिल्ली में 500 से ऊपर । एक राज्य की तारीफ करनी पड़ेगी ,और वो है कर्णाटक , 181 के बाद उसने एक भी पेशेंट नहीं बढ़ने दिया । हमारे देश का काला टीका बन कर चमक रहा है ,कर्नाटक ।


वहीँ चीन में कोरोना -2 ने दस्तक दे दी है । वो कह रहा कि इसके कोई लक्षण भी नहीं हैं । क्या ये सच है ? या चीन द्वारा मास्क और सांइटिज़ेर बेचने की एक और मार्केटिंग स्ट्रेटेजी ? वो कह रहा है कि अब जिसको कोरोना -1 हो चुका है , उसको कोरोना -2 हो सकता है । उसके 1540 लोग फिर से पॉजिटिव आये हैं । महसूस हो रहा है कि जैसे हम मानव-बम बन गए हों । अब आप खुद सोचो ,अगर दुनिया में कोरोना 2 जैसी कोई चीज़ है जो महसूस ही नहीं होगी,जिसके कोई लक्षण ही न होंगे , तब तो लोग सड़क पे गिर कर कभी भी मरेंगे या ज़बरदस्ती की दवाई लेंगे । हो सकता है हम ज़िन्दगी भर मास्क पहनें । 


हम बस लड़ रहे हैं , एक ऐसे दुश्मन से जो जैविक है । ऐसे में भारत हाइड्रो - क्लोरोक्विन नमक दवाई से लोगो को ठीक कर रहा है । यू .एस . ऐ. के राष्ट्रपति ने हमारे प्रधानमंत्री से धमकी भरे लहजे में दवाई मांगी । मोदी ने पहले मना किया ,फिर वो दवाई ट्रम्प को भिजवा दी । यू . एस .ए के हाथ पैर फूले हुए हैं इस वक्त । तब अब राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व करने वाला देश किसको कहा जाना चाहिए ? शक्ति के लिहाज से हमें किसे सर्वोपरि मानना चाहिए ? चीन को जिसने ये महामारी देकर अरबों कमाए या भारत को जो हाथ जोड़कर अब भी और देशों की सहायता करने में लगा है ; उन्हें कोरोना से बचा रहा है ? या फिर यू . एस. ए .को ही मानते रहें जो विश्वशक्ति बनने का दावा करता है लेकिन उसका राष्ट्र इस वक्त सांस भी नहीं ले पा रहा है ? क्या विश्व शक्ति का मतलब विमानों की चमकती फ़ौज का अधिपति होना है ? इन सवालों के जवाब हमें फिर से ढूंढने चाहियें । एक और सवाल है मेरा : हम उन्हें जान बचाने की औषधि दे रहे हैं ; क्या अगर कभी हम यू . एस . ए. से कहते कि तुम्हारी मिलिट्री शक्ति ,तुम्हारे विमान ; तुम्हारी सैन्य -रचना का सार दो ; तब वो भी हमारी बात सुनता ?


भारत को सबसे समझदार राष्ट्र समझा जाता है । हमे मालूम है कि इस वक्त सैन्य -तनाव से आवश्यक है मानव -जीवन । लेकिन बड़े - बड़े राष्ट्रों में मौत बांटने वाला चीन ये कब समझेगा ? 10 लोग तो रोबोट जैसे दिखेंगे पृथ्वी पर घूमते हुए । फिर किस पर अपना कोरोना फैलाओगे और किसको जाताओगे कि मैं चीन हूँ । तुम फिर से आदिकाल में चले जाओगे ।

जिस तरह से फ़ूड - चैन बिगड़ने से पर्यावरण पर फर्क पड़ता है , उसी प्रकार मानव -जीवन की हानि से एक काल की समाप्ति होती है ।


ईश्वर- अल्लाह तेरो नाम 

"चीन "को सन्मति दो भगवान ।



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