छोटी छोटी बातें
छोटी छोटी बातें
"अरे! तूने बताया ही नहीं कि मिनी का एक्सीडेंट हो गया और उसके पैरों में भी प्लास्टर चढ़ा हुआ है? यह तो मैं अपने बैंक की मेरठ वाली ब्रांच में आया तो सोचा चल तेरे से भी मिलता हुआ चलूं, वरना तू तो बताती भी नहीं।"
दर्द से कराहते हुए भी मामा को देखकर मिनी के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई थी। मुस्कुराते हुए उसने पूछा "मामा आप मेरे लिए क्या लाए हो?"
"गुस्सा मत होना भैया आप भी परेशान होने के सिवाय क्या कर सकते थे? यही सोच कर मैंने आपको नहीं बताया था। उधर भी तो दोनों बच्चों के इम्तिहान चल रहे थे मिनी के तो चोट लगने की वजह से स्कूल में मेडिकल दिया है। आपके बैंक की क्लोजिंग भी थी।" आपको उधर बच्चों को भी देखना था और अपने बैंक का काम भी इसलिए मैंने आपको परेशान करना ठीक नहीं समझा।
"हां बहुत बड़ी हो गई है तू और समझदार भी। हमें भला क्यों कुछ भी बताएगी तू?" अब मैं तेरा भाई परेशान हो जाऊंगा इसलिए अपना सुख-दुख भी ना बताना।
अनुराधा ने भैया को मनाने के लहजे में गलती मानते हुए कहा "अब आपको पता तो पड़ गया, मिल लो अच्छे से अपनी लाडली भांजी से उसका भी दर्द दूर हो जाएगा।" माता-पिता के बाद में आप ही तो हो जो कि इतना प्यार करते हो और कभी मायके में किसी कमी का एहसास नहीं होने देते।
ऐसा कहते हुए अनुराधा ने बड़े भैया के लिए खाना लगाया। घर वापिस जाते हुए भैया ने अनुराधा से कहा "दुख सुख तो बता दिया कर? मैं व्यस्त था तो अपनी भाभी को ही बता दिया होता।"
"भैया! प्लीज भाभी को मिनी के बारे में कुछ मत बताना?"
क्या? क्यों? तू तो हमेशा अपनी भाभी की तरफदारी करती थी, अब तू ऐसा क्यों कह रही है जैसे वह कोई पराई हो। मैं तो उसे इस शनिवार को ही तेरे पास भेजने वाला था, पर ऐसा क्यों भला? रमन जी तुम्हारे पति भी अगर तुझसे कोई बात छिपाएं तो क्या तुझे अच्छा लगेगा?"
"नहीं भैया, ऐसी बात नहीं है। बात सिर्फ यह है कि भाभी के मायके वालों ने ही मेरी शादी कराई है जो कि यहां मेरठ में ही रहते हैं। अभी कुछ समय पहले जब मिनी को टाइफाइड हुआ था तो काफी समय अस्पताल और घर में बीमार रहने के बाद जब वह बिस्तर से उठी तो उसके लंबे बाल बुरी तरह से उलझ गए थे जो कि मुझे कटवाने पड़े। मिनी को भी अपने लंबे बाल कटवाने पर बहुत दुख हुआ था। बस यूं ही बातों बातों में मैंने भाभी से भी मिनी के बालों का जिक्र किया था। भाभी ने जाने अपने मायके में क्या कहा कि उनके घर से उनकी बहन ने स्कार्फ पहनी हुई मिनी से कहा जरा अपने बाल तो दिखाना कितने छोटे हो गए? मिनी उस दिन बहुत रोई थी। उस दिन मुझे भी एहसास हुआ था कि मुझे भाभी को कुछ नहीं बताना चाहिए था।
अब तो पैर में प्लास्टर ही बंधा हुआ है जाने भाभी अपने मायके में क्या बताएं? मैं भी पहले ऐसे ही करती थी घर आने के बाद भाभी को अपने ससुराल के किस्से सुनाते हुए मालूम नहीं किस के चरित्र का कैसा चित्रण करती थी। समय के साथ मेरी भावनाएं तो उन लोगों के साथ अच्छी हो जाती थी लेकिन भाभी के मन में तो मैंने जिसके प्रति जो विचार डाल दिए वह तो वही रहेंगे ना? भैया ने कुछ समझते हुए अनुराधा के सर पर हाथ रखा और कहा मिनी का ख्याल रखना ऐसा कहते हुए वह अपने घर चले गए।
दूसरे दिन जब दरवाजे की बेल बजी तो देखा भाभी सामने खड़ी थी। अनुराधा भाभी को देखकर एकदम चौंक गई। उसने उन्हें बहुत प्यार से अंदर बुलाया।
भाभी अपने साथ जो सामान लाई थी उन्होंने वह सामान अनुराधा को पकड़ाया और फिर उस को गले लगा के वह बोली तुम मेरी ननद नहीं मेरी बेटी के समान हो।
मैं सब बातें जानती हूं क्योंकि मेरी बेटी यानी कि तुम्हारी भतीजी शीनू ने मुझे सब बता दिया था। उस दिन मेरी बहन ने जब मिनी से स्कार्फ उतारने के लिए कहा और मिनी बहुत दुखी हुई थी तो दुखी होने के बाद मिनी, शीनू से बहुत देर तक बात करती रही। मिनी और शीनू यह हमारी यह दोनों बच्चियां एक दूसरे की पक्की सहेलियां भी है। यह आपस में कोई बात नहीं छुपाती।उस दिन मुझे भी एहसास हुआ था कि हम सबको सबकी प्राइवेसी की भी इज्जत करनी चाहिए। जल्द ही मिनी ठीक हो जाएगी और अगर वह नहीं चाहती है कि वह किसी को भी ऐसी दयनीय हालत में दिखे तो हम किसी को भी नहीं बताएंगे। तुम मेरे ससुराल की हो और ससुराल की हर बात मायके में बताना जरूरी तो नहीं। जब तुम्हें मेरी गलती से ही इतना समझ आ गई तो क्या मुझे मेरी खुद की गलती से कुछ समझ नहीं आई होगी। ऐसा कहते हुए भाभी ने अनुराधा को बहुत प्यार करा।
उसके बाद उन्होंने मिनी को बहुत सी किताबें देते हुए कहा कि यह कहानियों की किताबें शीनू ने तुम को पढ़ने के लिए दी है।
सारा दिन भाभी और अनुराधा बहुत प्यार से रहीं। जाते हुए भाभी ने अनुराधा को कहा कि तुम मेरी ननद नहीं बल्कि बेटी हो। यदि भैया तुम्हारे पिता समान है तो मैं भी तो तुम्हारी मां के समान हुई ना। अपने मन में कोई बात मत रखा करो मुझे कह दिया करो। भाभी को जाते हुए देखकर अनुराधा के मन में भाभी के प्रति बहुत सम्मान जागृत हो रहा था। भाभी सही तो कह रही थी छोटी छोटी बातें कभी अपने मन में रखकर बड़ी-बड़ी बातों के लिए रास्ता ना खोला करो।
