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Sanjeevan Kumar Singh

Romance Fantasy Others

4  

Sanjeevan Kumar Singh

Romance Fantasy Others

चेहरे नहीं, चरित्र चुनिए

चेहरे नहीं, चरित्र चुनिए

8 mins
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सच्ची सुंदरता का खजाना
आज के समय में विवाह के लिए जीवनसाथी की तलाश करते हुए बहुत से युवक-युवतियाँ बाहरी सुंदरता को सबसे बड़ा गुण मान बैठते हैं। चेहरे की चमक, गोरा रंग, आकर्षक कद-काठी और फैशन के अनुरूप व्यक्तित्व अक्सर लोगों को इतना प्रभावित कर देता है कि वे इंसान के वास्तविक गुणों को देखने की कोशिश ही नहीं करते। परिणाम यह होता है कि कई बार वे जीवन के सबसे महत्वपूर्ण निर्णय केवल दिखावे के आधार पर लेने लगते हैं। लेकिन क्या केवल सुंदर चेहरा ही किसी घर को खुशियों से भर सकता है? क्या केवल आकर्षक व्यक्तित्व ही रिश्तों को जीवनभर निभा सकता है? क्या केवल बाहरी रूप ही किसी परिवार की नींव को मजबूत बना सकता है? इन प्रश्नों के उत्तर खोजने के लिए एक छोटी-सी घटना कभी-कभी इंसान की पूरी सोच बदल देती है। ऐसी ही एक कहानी है एक युवक की, जो सुंदरता को जीवन का सबसे बड़ा गुण मानता था। एक छोटे से शहर में रहने वाला एक युवक कपड़ों के बड़े शोरूम में काम करता था। शोरूम महिलाओं के वस्त्रों के लिए प्रसिद्ध था। हर दिन वहाँ सैकड़ों महिलाएँ और युवतियाँ खरीदारी करने आती थीं। युवक का अधिकांश समय ग्राहकों को कपड़े दिखाने, उनकी पसंद समझने और बिक्री करने में बीतता था। लेकिन धीरे-धीरे उसके मन में एक अलग प्रकार की सोच जन्म लेने लगी। वह रोज़ सुंदर-सुंदर चेहरों को देखता। किसी की बड़ी-बड़ी आँखें होतीं। किसी के लंबे घने बाल। किसी का गोरा रंग। किसी का आकर्षक पहनावा। वह अक्सर सोचता— "जब मेरी शादी होगी तो मेरी पत्नी भी ऐसी ही सुंदर होनी चाहिए। लोग उसे देखकर मेरी किस्मत की तारीफ करें। रिश्तेदार कहें कि क्या सुंदर जोड़ी है।" धीरे-धीरे उसके मन में यह विचार इतना गहरा बैठ गया कि उसने जीवनसाथी के बाकी गुणों को महत्व देना लगभग छोड़ दिया। उसके लिए सुंदरता ही सब कुछ बन चुकी थी। समय बीतता गया। घर वाले उसके विवाह की चिंता करने लगे। एक दिन उसकी माँ ने बड़े उत्साह से एक लड़की का फोटो उसे दिखाया। फोटो में एक साधारण-सी लड़की थी। न ज्यादा मेकअप। न कोई बनावटी अंदाज। न महंगे कपड़े। सांवला रंग। सादगी से भरा चेहरा। उसकी आँखों में आत्मविश्वास था लेकिन दिखावे का कोई निशान नहीं था। युवक ने फोटो देखा और कुछ ही क्षणों में उसका चेहरा उतर गया। उसे लगा कि यह लड़की उसके सपनों जैसी बिल्कुल नहीं है। उसने फोटो मेज़ पर रख दिया और नाराज़ होकर बोला— "यह लड़की मेरे लिए नहीं है।" घर वालों ने समझाया— "लड़की पढ़ी-लिखी है।" "संस्कार अच्छे हैं।" "परिवार अच्छा है।" "घरेलू कामकाज जानती है।" "बड़ों का सम्मान करती है।" लेकिन युवक के कानों तक ये बातें पहुँच ही नहीं रही थीं। उसे केवल एक बात दिखाई दे रही थी— लड़की उसकी कल्पना के अनुसार सुंदर नहीं थी। उसने साफ़ मना कर दिया। उस रात घर में माहौल भारी हो गया। माँ उदास थी। पिता चिंतित थे। परिवार के अन्य सदस्य भी उसे समझाने की कोशिश करते रहे। लेकिन वह अपनी बात पर अड़ा रहा। रात का खाना भी उसने नहीं खाया। वह छत पर चला गया। पुराने पलंग पर लेटकर आसमान की ओर देखने लगा। उसके मन में केवल एक ही विचार घूम रहा था— "मैं शादी करूंगा तो केवल बहुत सुंदर लड़की से ही करूंगा।" रात धीरे-धीरे बीत गई। सुबह हुई। वह तैयार होकर काम पर निकल पड़ा। रास्ते भर वह हमेशा की तरह आने-जाने वाले लोगों को देखता रहा। जहाँ कोई सुंदर युवती दिखती, उसका मन उसी दिशा में भटक जाता। वह कल्पनाओं में खोया हुआ चल रहा था। अचानक उसका पैर रास्ते पर पड़े केले के छिलके पर पड़ गया। संतुलन बिगड़ा। और वह जोर से फिसल गया। पास रखे कूड़ेदान से टकराकर गिर पड़ा। कुछ लोगों ने उसे देखा। किसी ने हँसकर देखा। किसी ने सहानुभूति दिखाई। उसी समय सामने स्थित एक ब्यूटी पार्लर से एक महिला बाहर आई। उसने तुरंत उसे उठाया। उसकी चोट के बारे में पूछा। और सहारा देकर भीतर ले गई। अंदर आरामदायक कुर्सियाँ लगी थीं। उसे एक कुर्सी पर बैठा दिया गया। वह थोड़ा संभला। चोट ज्यादा गंभीर नहीं थी। वह पानी पीकर शांत बैठ गया। इसी दौरान एक दूसरी महिला पार्लर में आई। उसका रंग सांवला था। चेहरे पर कोई विशेष आकर्षण नहीं दिख रहा था। बाल भी साधारण ढंग से बंधे हुए थे। यदि कोई उसे सड़क पर देखता तो शायद बिना ध्यान दिए आगे बढ़ जाता। वह सामने वाली कुर्सी पर बैठ गई। युवक समय बिताने के लिए उसे देखने लगा। पार्लर की कर्मचारी अपना काम शुरू कर चुकी थी। सबसे पहले उसने महिला की भौहें ठीक कीं। चेहरे की सफाई की। फिर बालों को सँवारा। इसके बाद विभिन्न सौंदर्य प्रसाधनों का उपयोग किया गया। धीरे-धीरे परिवर्तन दिखाई देने लगा। महिला का चेहरा पहले से अधिक निखरने लगा। बाल चमकने लगे। आँखें अधिक आकर्षक लगने लगीं। कुछ समय बाद जब पूरा मेकअप समाप्त हुआ तो वह महिला पहले जैसी बिल्कुल नहीं दिख रही थी। वह अत्यंत आकर्षक दिखाई दे रही थी। युवक आश्चर्यचकित रह गया। उसने पहली बार इतने ध्यान से यह परिवर्तन देखा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि कुछ देर पहले जो चेहरा सामान्य दिखाई दे रहा था, वही अब इतना अलग कैसे लग रहा है। उसके मन में अनेक विचार आने लगे। उसे एहसास हुआ कि जिन सुंदर चेहरों को देखकर वह प्रभावित होता रहा था, उनमें से बहुत-सी सुंदरता प्राकृतिक नहीं बल्कि सजावट और प्रस्तुति का परिणाम भी हो सकती है। उसने महसूस किया कि बाहरी रूप को देखकर किसी इंसान के बारे में अंतिम निर्णय लेना कितना गलत है। वह सोचने लगा— अगर कोई व्यक्ति केवल चेहरे के आधार पर अच्छा या बुरा ठहराया जाए तो यह कितना अन्याय होगा। एक इंसान की पहचान उसके विचारों से होती है। उसके व्यवहार से होती है। उसके संस्कारों से होती है। उसकी ईमानदारी से होती है। उसकी संवेदनशीलता से होती है। उसकी जिम्मेदारी निभाने की क्षमता से होती है। चेहरे की सुंदरता समय के साथ बदल सकती है। लेकिन चरित्र की सुंदरता जीवनभर साथ रहती है। उसके मन में माँ की बातें गूंजने लगीं। "लड़की पढ़ी-लिखी है।" "संस्कार अच्छे हैं।" "घर संभालना जानती है।" उस समय उसने इन बातों को महत्व नहीं दिया था। लेकिन अब वही बातें सबसे महत्वपूर्ण लग रही थीं। उसने सोचना शुरू किया— जब किसी घर में कठिन समय आता है तो क्या गोरा रंग समस्या हल करता है? क्या सुंदर चेहरा परिवार को जोड़कर रखता है? क्या फैशन और मेकअप रिश्तों में प्रेम पैदा करते हैं? नहीं। मुश्किल समय में साथ खड़ा होने वाला स्वभाव काम आता है। त्याग काम आता है। समझदारी काम आती है। संस्कार काम आते हैं। उसे अपने आसपास के कई परिवार याद आने लगे। कुछ घरों में अत्यंत सुंदर लोग थे लेकिन वहाँ हर दिन झगड़े होते थे। कुछ घरों में साधारण दिखने वाले लोग थे लेकिन वहाँ शांति, प्रेम और सम्मान था। तब उसे समझ आया कि घर को स्वर्ग बनाने वाली चीज़ सुंदर चेहरा नहीं बल्कि सुंदर मन होता है। वह कुर्सी पर बैठा-बैठा बहुत देर तक सोचता रहा। उसे अपनी सोच पर शर्म आने लगी। उसने बिना जाने, बिना समझे केवल फोटो देखकर एक लड़की को अस्वीकार कर दिया था। उसने उसके गुणों को जानने की कोशिश तक नहीं की। सिर्फ इसलिए क्योंकि वह उसकी कल्पना के अनुसार सुंदर नहीं थी। उसके मन में एक और विचार आया। जिस लड़की का फोटो उसे दिखाया गया था, वह चाहती तो मेकअप करके, तस्वीर को सजाकर, अलग-अलग फिल्टर लगाकर खुद को कहीं अधिक आकर्षक दिखा सकती थी। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। उसने अपने वास्तविक रूप को ही सामने रखा। यह उसकी ईमानदारी थी। यह उसका आत्मविश्वास था। यह उसकी सच्चाई थी। और यही गुण वास्तव में सबसे सुंदर थे। युवक को महसूस हुआ कि सच्चा सौंदर्य वही है जो दिखावे पर नहीं टिका हो। जो नकली परतों के पीछे छिपा न हो। जो परिस्थितियों के बदलने पर भी वैसा ही बना रहे। उसने तुरंत अपनी जेब से मोबाइल निकाला। माँ का नंबर मिलाया। फोन उठते ही माँ की आवाज़ आई— "हाँ बेटा?" उसकी आवाज़ में झिझक थी। शायद वह सोच रही थीं कि फिर से कोई बहस होगी। लेकिन इस बार युवक की आवाज़ बदल चुकी थी। वह शांत था। वह परिपक्व था। वह पहले जैसा नहीं रहा था। उसने कहा— "माँ, मुझे आपसे एक बात कहनी है।" माँ चुप रहीं। वह आगे बोला— "कल आपने जो फोटो दिखाया था, मुझे वह रिश्ता स्वीकार है।" कुछ क्षण के लिए दूसरी ओर सन्नाटा छा गया। माँ को विश्वास ही नहीं हुआ। उन्होंने दोबारा पूछा— "सच कह रहे हो?" युवक मुस्कुराया। "हाँ माँ, बिल्कुल सच।" "अब मुझे समझ में आ गया है कि जीवनसाथी चुनते समय केवल चेहरा नहीं देखा जाता।" "अच्छे संस्कार, अच्छा स्वभाव और सच्चा चरित्र ही सबसे बड़ी सुंदरता हैं।" माँ की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। उन्होंने ईश्वर का धन्यवाद किया। उन्हें लगा जैसे उनका बेटा एक ही दिन में बहुत बड़ा हो गया है। फोन रखने के बाद युवक ने आकाश की ओर देखा। उसे महसूस हुआ कि आज उसने केवल एक रिश्ता स्वीकार नहीं किया है। उसने अपनी सोच को भी बदल लिया है। उसने बाहरी चमक से आगे देखना सीख लिया है। उसने इंसान को इंसान की तरह देखना सीख लिया है। समय के साथ उसे यह भी समझ में आया कि विवाह केवल दो लोगों का मिलन नहीं होता। यह दो परिवारों का संबंध होता है। यह विश्वास, सम्मान, सहयोग और जिम्मेदारी का बंधन होता है। इस बंधन को निभाने के लिए सुंदर चेहरा नहीं, सुंदर हृदय चाहिए। कहानी का संदेश चेहरे की सुंदरता आँखों को कुछ समय के लिए आकर्षित कर सकती है, लेकिन मन की सुंदरता जीवनभर साथ रहती है। रंग, रूप और बनावट प्रकृति का उपहार हैं, जबकि संस्कार, व्यवहार और चरित्र व्यक्ति की वास्तविक पहचान हैं। जीवनसाथी चुनते समय यदि केवल बाहरी आकर्षण को महत्व दिया जाए तो निर्णय अधूरा रह जाता है। सच्चा सुख उसी घर में मिलता है जहाँ प्रेम, सम्मान, विश्वास और अच्छे संस्कार हों। क्योंकि अंततः घर को स्वर्ग बनाने वाला सुंदर चेहरा नहीं, बल्कि सुंदर मन होता है। संजीवन कुमार सिंह ✍️


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