Shyam Raj

Inspirational


4.5  

Shyam Raj

Inspirational


चाय वाला छगन काका

चाय वाला छगन काका

9 mins 24K 9 mins 24K

याद हैं तुम्हें कब हम साथ बैठे थे? मुझे तो बहुत याद आती हैं तुम्हारे साथ बिताया एक एक पल उम्मीद करता हूँ जल्दी ही मिलेंगे हम सही तो कह रहा हूँ मैं एक वो भी दिन थे जब हम दिनभर एक दूसरे का हाथ पकड़े पकडे पुरे मोहल्ले में घुमा करते थे और याद हैं ना वो छगन काका वाली चाय की दुकान जिस पर बहुत ज्यादा भीड़ होती थी ! जब हम घूम घूम कर थक जाते थे तो वही पर बैठ कर चाय पीते थे ! चाय वाला काका भी हमें देख कर ख़ुश होता था उसके चेहरे पर मुस्कान देखकर हमे कितनी ख़ुशी मिलती थी , तू कई बार तो घर पर आने के बाद भी मुझे उनकी मुस्कान के बारे में बताता था ! तुम्हें वो दिन भी याद हैं ना जब हम दोनों के पास ही चाय पिने के भी पैसे नहीं थे।

और हम काका की दुकान पर जाकर नाटक कर रहे थे कि आज हमें चाय नहीं पीनी शायद काका समझ गये थे हमारी हालत और हमारे पास चाय लाकर कहा था कि आज तुम्हारी इच्छा नहीं हैं फिर भी आज तो तुम्हें ये चाय पीनी ही पड़ेगी और हम क्या कम नाटकबाज थे हम भी गर्दन हिलाते रहे की आज चाय नहीं पीनी लेकिन छगन काका ने हमारी बात सुनी ही नहीं और हमें चाय पीनी ही पड़ी जो हम चाहते थे।

जब से हम दोनों की अलग अलग शहरों में नौकरी लगी हैं तब से हम कई बार यहाँ पर मिले लेकिन हमेशा किसी ना किसी का व्यस्त समय होने के कारण हम वहाँ नहीं जा सके पिछली बार जब हम मिले थे तब हमें छगन काका के हाथ से बनी चाय पिने का प्लान बना था वो भी पक्के वाला पर तेरे मामा जी आ जाने की वजह से नहीं जा पाए थे और शाम को तेरी ट्रेन थी फिर मुझे भी त

तुझे छोड़ने के लिये रेल्वे स्टेशन पर ही आना पड़ा था।

तुझे स्टेशन पर अलविदा कह कर आ रहा था तब मेरा मन में बार बार छगन काका की दुकान पर बनी चाय पिने का कर रहा था तो मैं घर ना जाकर सीधे ही वहाँ ही पंहुचा वहाँ मैंने देखा की छगन काका दिखाई नहीं दे रहे हैं कोई और ही आदमी चाय बना रहा हैं लेकिन मैं गलत था वो कोई और आदमी नहीं था बल्कि खुद छगन काका ही थे उनकी उम्र ज्यादा होने की वजह से मैं उनको पहचान नहीं पाया परन्तु जैसे ही मैं वहाँ पर रखी कुर्सी पर बैठा तो सुना किसी ने मेरा नाम पुकारा हैं मैंने मूड कर देखा तो वो चाय वाला ही मेरा नाम पुकार रहा था।

कौन ? मैं 

हाँ हाँ सुभम तुम ही।

आप मुझे जानते हो ? यहाँ पर छगन काका चाय बनाते थे ना वो कहाँ हैं? उन्होंने ये दुकान आपको को बेच दी क्या? अब कहाँ ( मुझे बीच में ही रोकते हुए)

क्या तुमने मुझे पहचाना नहीं ?

नहीं तो आप ?

कैसे पहचानोगे अब तुम बहुत बड़े अफसर जो बन गये हो और मेरी भी तो उम्र हो चली हैं

छगन काका आप

( मुझे देखकर उनकी आँखो में )

हाँ मैं ही हूँ तुम्हारा वो काका जिसके हाथ की चाय पिने तुम रोज यहाँ आते थे।

उनको देखते ही मेरा भी गला भर आया और मैंने उनको गले लगा लिया उनको देख कर मुझे वो पूराने दिन याद आ गये जब हम यहाँ आते थे बहुत ख़ुशी मिली मुझको ऐसा लगा जैसे मैं अपने ही परिवार के सदस्य से मिल रहा हूँ मेरी आँखो से जो आँसू पलकों के नीचे लुढ़क आये थे उनको उन्होंने अपने दोनों हाथो से साफ किया और मेरे साथ वही पर कुर्सी पर बैठ गये 

काका आप अभी भी यहाँ काम करते हो ?

नहीं नहीं अब नहीं करता उसे देखो वो मेरा नालायक बेटा जो स्कूल से भाग कर आ जाता था जब उसकी पढ़ाई करने की कोई इच्छा ही नहीं थी तो मैंने उसे अपने साथ यही पर रख लिया और सब काम सीखा दिया था तो अब ये दुकान वो ही संभालता हैं मैं तो बस कभी कभी आ जाता हूँ यहाँ अब मेरी कहा हिम्मत हैं काम करने की।

हाँ काका मैंने तो आपको पहचाना ही नहीं बहुत बदल गये आप तो। 

बेटा अब क्या बताऊँ बस दवाइयों के सहारे चल रहे हैं हर सात दिन बाद दवाखाना जाना पड़ता हैं ये देख जेब में ही रखनी पड़ती हैं वो भी इतनी सारी मैं तो कभी कभार ही यहाँ आता हूँ नहीं तो घर पर ही रहता हूँ बहुत दिनों बाद आज आया हूँ और देखो तुम मिल गये। 

काका आपका एक और बेटा हैं ना जो हर कक्षा में अव्वल आता था वो कहाँ हैं?? क्या करता हैं?? नौकरी लगी उसकी (बीच में ही )

चाय लीजिये पापा आप भी ( उनका लड़का चाय ले आया )

हाँ रख दे यहाँ पर अब वो सरकारी नौकरी कर रहा हैं गाँव के पास के स्कूल में बाबू लगा हैं और तुम्हारा दोस्त कहाँ हैं??चाय पीओ ठंडी हो जाएंगी। 

अंकित वो भी अच्छा हैं बडा अफसर बन गया हैं ! कभी कभी ही आता हैं यहाँ पर मैं भी उससे चार पांच महीनों पहले मिला था हाँ उससे फ़ोन पर बात हो जाती हैं उसकी शादी भी हो गई और एक प्यारी सी गुड़िया भी हैं 

बहुत अच्छा वो कभी मुझे भी याद करता हैं या नहीं नहीं करता होगा कहाँ समय मिलता हैं सरकारी नौकरी में 

नहीं नहीं याद करता हैं पिछली बार जब हम दोनों मिले थे तब हमने यहाँ आने का प्लान बनाया था पर आ ना सके वाह !! चाय तो वैसे ही बनी हैं जैसा आप बनाते थे।।

हम्म मेरे साथ ही रहता था तो सीख गया वैसे ही बनाना और मुस्करा दिए

उनकी मुस्कान आज भी वैसी ही हैं बस चेहरे पर झुर्रिया पड़ गई हैं 

( उनको वो बात भी याद थी जो हमारे पास पैसे नहीं थे और हम दुकान पर पहुंच कर नाटक कर रहे थे कि आज हम चाय नहीं पिएंगे )

एक बात पुछु बेटा ?

हाँ हाँ पूछो। 

उस दिन तुम्हारे पास पैसे नहीं थे ना चाय के ?

क्या क्या आपको वो बात आज भी याद हैं हाँ उस दिन हमारे पास पैसे नहीं थे और अंकित को आपके हाथ से बनी चाय पीनी थी तो हमने ऐसा नाटक किया था और उस दिन अपने हमसे पैसे भी नहीं लिये थे ! आपको पता चल गया था क्या?

हाँ तुम लोगों को अच्छे से जानने लगा था मैं उस समय मैं तुम्हारा नाटक देखकर समझ गया था इसलिए नहीं लिये थे

और हंसने लगे। 

मुझे थोड़ी शर्मिंदगी महसूस हुई पर मैंने भी मुस्करा दिया

अरे ! शरमाओ मत मुझे याद आ गया इसलिए बता दिया

अच्छा काका घर पर सब ठीक हैं ना सब अब मुझे भी घर जाना हैं देरी हो जाएंगी मेरा बेटा इंतजार कर रहा होगा अगर मैं नहीं गया तो वो खाना नहीं भी खायेगा ऐसे ही सो जायेगा

क्या नाम हैं बेटे का ?

जियान अभी सिर्फ चार साल का है। 

अच्छा नाम हैं जाओ उसको मेरी तरफ से भी आशीर्वाद देना और हाँ अंकित को भी बोलना जब यहाँ आये तब मुझसे मिलने भी आये बहुत साल हो गये उसको देखे शायद वो भी तुम्हारी तरह मुझे पहचानेगा नहीं और जब कभी आओ तो आ जाया करो यहाँ भी। 

जरूर काका हाँ अंकित को भी बोल दूंगा अब जब भी यहाँ आऊंगा तब पक्का आपसे मिलने आऊंगा अब चलता हूँ अपना ख्याल रखना काका। 

काका से मिल कर आने के बाद भी मेरी छुट्टी बची हुई थी तो तीन दिन बाद मैं फिर से उनकी दुकान पर चाय पिने के लिये गया पर वहाँ पहुंचने पर देखा की दुकान बंद हैं उसके आस पास वाली दुकान वालो को पूछने पर पता चला कि ये दुकान तो पिछले दो दिन से बंद हैं परन्तु किसी कारण बंद हैं ये किसी को भी सही से पता नहीं था तो मैंने दुकान के शटर पर लिखें नंबर पर बात की तो पता चला कि छगन काका की तबीयत बहुत ख़राब हैं और वो अभी भी हॉस्पिटल में एडमिट हैं मैंने हॉस्पिटल का एड्रेस पूछा और घर आकर अपनी गाड़ी लेकर सीधा हॉस्पिटल पंहुचा जहाँ पर उनका बेटा रमेश जो दुकान पर चाय बनाता हैं मुझे देखते ही रोने लगा। 

क्या हुआ काका को ? मैं मिला था तब तो ठीक ही थे हां वो उस दिन मुझे दवाइयां दिखा रहे थे वो किस बीमारी की दवाइया थी??

पापा को हार्ट से संबंधित बीमारी हैं हम पिछले कई दिनों से इनका इलाज करवा रहे हैं पर अब बीमारी बढ़ गई हैं और डॉक्टर इलाज के लिये बहुत पैसे भी मांग रहे हैं हम क्या करे?

मैं डॉक्टर से मिलता हूँ क्या नाम हैं डॉक्टर का जो काका का इलाज कर रहे हैं ? 

डॉक्टर एनके सिंह

आप काका के पास जाओ मैं डॉक्टर से मिलकर आता हूँ

मैं डॉक्टर के पास गया और उनसे बात करके आया ! काका से मिलने के लिये वार्ड में गया तो देखा काका सो रहे हैं ! 

सिस्टर ने बताया की इनको अभी इंजेक्शन लगाया था तो शायद नींद आ गई ! प्लीज थोड़ी देर इनको डिस्टर्ब मत करना  

ओके सिस्टर नहीं करेंगे फिर मैं रमेश के पास आया और उसको बताया की मेरी डॉक्टर से बात हो गई हैं आप लोगों को किसी प्रकार की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं हैं सब ठीक हो जायेगा कल तो मुझे दो दिन के लिये काम से कही बाहर जाना हैं आते ही मैं फिर काका से मिलने आऊंगा तुम यहाँ पर हो हिम्मत रखना और काका का ध्यान भी घर से और कौन कौन आ रखे हैं यहाँ ?

भाई हैं और माँ भी आई थी पर हमने उनको वापस भेज दिया 

अच्छा किया वो यहाँ परेशान हो जाती मैं चलता हूँ और हाँ मैं भूल ही गया ९९२८****८९ ये मेरे नंबर हैं अगर कोई परेशानी आये तो मुझसे बात कर लेना जब काका जगे तो उनको बताना कि मैं आया था ! सब ठीक हो जायेगा राम राम

जब दो दिन बाद अपना काम पूरा कर वापस आया तो मैं फिर काका से मिलने हॉस्पिटल पंहुचा वहाँ काका को देख कर बहुत अच्छा लगा अब ऑपरेशन के बाद काका ठीक लग रहे थे बात की मैंने काका से रमेश वहाँ नहीं था काम से बाहर गया हुआ था थोड़ी देर बाद आया मुझे देखकर उसकी आँखो में आँसू आ गये और हाथ जोड़े और मुझसे कहा आप नहीं होते तो आज पापा 

अरे ! रो क्यों रहे हो सब ठीक हो गया ना देखो काका भी अच्छे से बात कर रहे अब कोई चिंता वाली बात नहीं हैं मैं डॉक्टर से भी मिल के आ गया हूँ वो बोल रहे थे कि दो तीन दिन में काका को डिस्चार्ज कर दिया जायेगा 

आँखो में आँसू लिये रमेश बोला :- भगवान हो आप हमारे जो अपने किया वो आज के ज़माने में कोई मेरा सगा भी नहीं करता

हम कैसे आपका कर्ज चुकाएंगे।

अरे बस मैंने कुछ नहीं किया जो किया भगवान ने ही किया हैं मैं तो एक छोटा सा इंसान ही हूँ अब कोई चिंता नहीं हैं 

काका अब कैसा लग रहा हैं अंकित और मैं आपके हाथ से बनी चाय पिने फिर से आपकी दुकान पर आएंगे आप हमें चाय बना के पिलाओगे ना।

हाँ हाँ पक्का और काका भी रोने लगे यार अंकित मेरी भी आँखे भर आई थी बड़ी मुश्किल से आँसू रोक पाया 

अरे काका आप भी नहीं नहीं ऐसा नहीं करना देखो हम सब आपके साथ हैं जल्दी से घर आ जाओ 

अब मैं चलता हूँ कल सुबह की ट्रेन हैं मेरी और रमेश मेरे नंबर पर रिंग कर दो मैं तुम्हारे नंबर सेव कर लूंगा जब कभी काका से बात करने का मन करेगा तब कॉल कर लूंगा।

और फिर मैं हॉस्पिटल से घर के लिये निकल गया !


Rate this content
Log in

More hindi story from Shyam Raj

Similar hindi story from Inspirational