बॉडी बिल्डिंग : खेल
बॉडी बिल्डिंग : खेल
"बेटा खाना लग गया है चलो खाना खा लो।" निरुपमा ने अपने बेटे से कहा।
"माँ!! मैं अभी कसरत कर के आया हूँ पहले प्रोटीन पाउडर पी लूँ फिर दूसरी एक दवा भी पीनी है और मैं अपने साथ जूस लया हूँ वो पियूँगा, आप लोग खा लो मुझे खाना नही खाना है।" अश्विन ने माँ से कहा।
निरुपमा के बेटे को डांस का बहुत शौक था। वो डांस शो में हिस्सा लेने के लिए मुंबई गया फिर वही का हो के रह गया, डांस शो से नाम हो गया था, फिर टी.वी. सीरियल में काम मिलने लगा । उसने जिम जा -जा कर अच्छी बॉडी बना ली बहुत व्यस्त रहने लगा, अपने पैतृक घर तो आना भूल ही गया था। जब भी निरुपमा आने के लिए कहती वह मना कर देता, बोलता- "मम्मी आप लोग आ जाइए, मेरे पास टाइम नहीं है शायद वो अपनी दुनिया में बहुत रम गया था। अब तो ऐसे ही करते करते बहुत साल बीत गए अब निर्मला ने इंतजार करना छोड़ दिया है। कभी-कभी खुद ही जा कर मिल आती थी वहॉं उसकी दिनचार्या देख के परेशान हो जाती थी ।
दादा जी की बरसी की बड़ी पूजा थी तो बहुत जबरदस्ती करने पर दो दिन के लिए आया है।
वो सोच रही थी कि दो दिन प्यार से उसको घर का खाना खिलाएगी लेकिन जब भी खाने के लिए बुलाने जाती वो माना ही कर देता।
निरुपमा उदास हो जाती । अश्विन बॉडी बनाने में और काम करने में वो इतना व्यस्त निरुपमा रहा उसने शादी भी नहीं करी है ४० वर्ष की उम्र हो गई है ।
आज-कल के लोग शरीर को और फिर संबंधों को कैसे खेल समझने लगे हैं दवाये खा खा कर न जाने कितने एब्स बना लेते है और लिव इन मे रहकर शादी कि कमी को पूरा के लेते है।
पूजा पाठ का काम निपट गया, ब्राम्हण आदि भोजन कर के चले गए। शाम ढल चुकी थी, सुबह सुबह अश्विन भी निकल जाएगा घर मे बहुत सा काम फैला पड़ा है काम बाद में निपटा लेगी, निरुपमा कुछ सोचकर बेटे के पास गई ।
"अश्विन मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।"
"हाँ माँ!! बोलो क्या बात है, पर रुकने के लिए मत बोलना मैं दो दिन के लिए आया था मेरे पास टाइम नहीं है यहाँ रहता हूँ तो मेरा जिम भी नहीं हो पाता है। तुम समझती नहीं मम्मी बॉडी खराब हो जाएगी काम भी मिलना बंद हो जाएगा।"
"हाँ बेटा!! मैं जानती हूँ अब तो मेरी भी आदत पड़ गई, मैं तुम्हें रुकने के लिए नहीं बोलूंगी लेकिन जो तुम लोगों ने अपने शरीर को इतना खिलवाड़ बना रखा है दवाइयों के सहारे और भी न जाने क्या क्या खाते रहते हो बॉडी बनाने के लिए वह ठीक नहीं है।"
निरूपमा आगे बोली, "मैं भी आए दिन अखबार में पढ़ती रहती हूँ कि कोई पैंतालीस की उम्र में हार्ट अटैक से मर गया कोई पचास की उम्र में। तुम लोग अपने स्वास्थ्य के साथ इतना खिलवाड़ इसलिए ही तो करते हो कि उम्र बढ़ने के बाद भी युवा दिख सको लेकिन उसके लिए उम्र बढ़ने तक जीवित रहना भी तो जरूरी है।"
निरूपमा के कुछ शब्द उसके दिमाग मे उतर गए थे वो भी सोचने को मजबूर हो गया आखिर सब को जिम में ही हार्ट अटैक क्यों आ रहा है माँ की बात में दम है
अश्विन ने माँ को गले लगा लिया, "तुमने कितनी आसानी से समझा दिया, हम लोग अपने स्वास्थ्य व शरीर के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। जवानी को बरकरार रखने के लिए हम उल्टी-सीधी चीजे खा रहे हैं शायद वही चीजे लोगो को बुढ़ापे तक पहुँचने ही नही दे रही है। मैं तुम्हारी बातो पर अमल करूँगा।"
निरूपमा ने थोड़ी सी चैन की सांस ली "ठीक है बेटा तुम सो जाओ सुबह जल्दी निकलना है" बोल कर वो कमरे से बाहर चली आई।
