Ramashankar Roy

Inspirational


3.0  

Ramashankar Roy

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बोझिला की माँ

बोझिला की माँ

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कुहासे में लिपटी हुई ठिठुरती सर्द सुबह थी । चारो तरफ वातावरण में अजीब सा सन्नाटा पसरा था । मोतीमहल सिनेमा के सफाई कर्मचारी झाड़ू लगाकर एकत्र किए कूड़े में आग जलाकर मुफ्त की गर्मी उधार ले रहे थे । धीरे-धीरे 'हम आपके हैं कौन' सिनेमा के सुपरहिट होने पर ब्लैक में टिकट बेचकर होनेवाली आमदनी पर चर्चा कर रहे थे । तभी रोड की दूसरी तरफ स्थित नरेश भवन से जोर जोर से रोने की आवाज आने लगी । बरबस ही उनका ध्यान उस तरफ चला गया ।

उनलोगों ने आवाज पर गौर किया तो ऐसा लगा की दो तीन औरतें रो रही हैं और यह आवाज सुरेश भवन के मालिक के फ्लैट से ही आ रही है जो रोड साइड मे फर्स्ट फ्लोर पर ही है । आपस मे सब सोंचने लगे विजय बाबू के घर आचनक क्या मुशीबत आ गयी। कल शाम को नाईट शो में तो डीलक्स बॉक्स में अपने सेठ के साथ मे बैठकर हँसी मजाक कर रहे थे । दूसरे ने बोला मैने ही पैग बनाकर दिया था उनके चेहरे पर तो किसी प्रकार की समस्या की झलक नही थी। कुछ तो जरूर हुआ होगा ,बड़े लोग बड़ी बातें ।हमलोग जाकर पूछ तो नही सकते लेकिन जब दिन फहींच होगा तो उनके घरेलू नौकर बबलू या मैनेजर साहब से पता चलेगा कि क्या बात है। आज रविवार है मैनेजर साहब जरूर आएँगे ट्रक की कमाई का हिसाब देने । आज ही के दिन तो मैनेजर साहब और विजय बाबू का क्लास लगाते हैं मास्टर साहब ।

सुरेश भवन तीन मंजिला बडा सा बिल्डिंग है । यह आरा शहर का प्राइम लोकेशन है। ग्राउंड फ्लोर पर रोड साइड में बारह दुकान हैं और पीछे की तरफ वेयरहाउस या ऑफिस है। कुल मिलाकर ग्राउंड फ्लोर कमर्शियल एरिया है और ऊपर के मंजिल रेजिडेंशियल है । उसमे ऊपर जाने के लिए पीछे की तरफ से दो सीढ़ी है और दोनो सीढ़ी के दोनो तरफ दो-दो फ्लैट बना है और प्रत्येक फ्लैट में तीन रुम है। इस बिल्डिंग के एक तरफ पेट्रोल पंप और दूसरी तरफ शानदार नर्सिंग होम है । विजय ठाकुर का परिवार पहली मंजिल पर पेट्रोल पंप साइड मे रहता है और एक साइड का पूरा एरिया यानी कि दोनो फ्लैट अपने जिम्मे रखा है। बिल्डिंग में चारों तरफ से बालकॉनी है ।

इस परिवार की गिनती शहर के सम्पन्न लोगों में होती है । इनके पास पांच ट्रक और लगभग पचहत्तर बिघा की खेती है । विजय ठाकुर के पिता जी सुरेश ठाकुर अपने गाँव के हाई स्कूल के हेडमास्टर हैं। गांव भी मात्र बीस किलोमीटर की दूरी पर है और अपनी गाड़ी है तो आना जाना लगा रहता है । फिर भी सुरेश ठाकुर और उनकी पत्नी ज्यादातर गाँव मे ही रहते हैं । यहां पर विजय ठाकुर उनकी बीबी और तीन बेटियाँ रहती है । इसके अतिरिक्त उनके छोटे भाई की विधवा पत्नी और पंद्रह साल का नौकर बबलू स्थायी रूप से रहते हैं। विजय ठाकुर की एकलौती बहन विमला कभी भी टपक पड़ती है। वह विजय से छोटी और अजय से बड़ी है लेकिन उसकी शादी सबसे पहले हुई थी और उसको एक बेटा और दो बेटी है । भाइयों से ज्यादा बाप की दौलत का घमंड उसको है और साथ मे वह ग्रेजुएट थी । दोनो भी केवल लफा-शूटिंग में ही रह गए । किसी तरह से ठेल ठालकर बारहवीं तक पहुँच पाए थे। लेकिन दोनो भाभियाँ ग्रेजुएट थी । बड़ी वाली जूलॉजी और छोटी वाली हिस्ट्री से ऑनर्स थी।

कुछ देर बाद रोने का आवाज आना बंद हो गया लेकिन सिनेमा हॉल के कर्मचारियों की जिज्ञासा नही खत्म हुई थी । खासकर के मंगेश का क्योंकि उसको छोटी बहू में 'प्रेम रोग' फ़िल्म की पद्मिनी कोल्हापुरी नजर आती थी ।अजय ठाकुर की मौत शादी के तीन महीने बाद ही रोड एक्सीडेंट में हो गया था। उसकी अपने पति से मात्र चार दिन देखा- देखी हुई थी अपनी शादी के समय ।लेकिन वह अब वैधब्य का चोला धारण करने को मजबूर हो गयी ।

दोनो देवरानी जेठानी बेहद खूबसूरत हैं । दोनो सलवार सूट में जब बाहर निकलती हैं तो लोगों को लगता है कि बड़ी को अभी बच्चा नहीं हुआ है और छोटी की शादी होनी बाकी है । अजय ठाकुर तो देखने मे ठीक ठाक थे लेकिन विजय ठाकुर चारकोल ब्लैक हैं और नयन नक्श भी औसत से नीचे दर्जे का। जब वह अपनी पत्नी के साथ होते हैं तो किसी के भी मुँह से आह निकल जाती है कि लंगूर के हाथ हूर लगी है। उनकी शादी को मात्र सात साल हुआ है लेकिन उनकी बीबी तीन बेटी की माँ बन चुकी है और एकबार फिर से गर्भवती है । देखने से तो शायद "कभी भी" वाला समय चल रहा है ।

खैर , सात बजे जब बबलू कुत्ता को घुमाने के लिए नीचे आया तो मंगेश लपककर उसके साथ हो लिया । दोनो टहलते टहलते पूरब साइड से महाराजा कॉलेज के कंपाउंड मे घुस गए । ग्राउंड में कुत्ता को खुला छोड़कर दोनो एक बेंच पर बैठ गए।

मंगेश - "सुबह मे आज तुम्हारे फ्लैट से रोने की आवाज आ रही थी । किसी को कुछ सीरियस हुआ है क्या ?"

बबलू -" नहीं ऐसी कोई खास बात नही है । मालकिन को फिर बेटी पैदा हुई है । यह खबर सुनते ही उनकी सास और ननद पुका फाड़ फाड़कर रोने लगीं । घर पर ही नार्मल डिलीवरी हो गया । लेकिन इन दोनों को फिर बेटी होने का सदमा लगा और रोने लगीं ।उदास तो सब हैं क्योंकि इस खानदान को वारिश की उम्मीद तो बड़ी मालकिन से ही है। इसी प्रयास में चौथी बार भी बेटी का जन्म परिवार के लिए खुशी की बात नही है। मालकिन अभी प्रसव पीड़ा से उबरी भी नही होंगी की उनकी सास और ननद ने जली कटी सुनाना शुरू कर दिया। विमला दीदी ने तो कह दिया कि माँ अब भैया की दूसरी शादी करनी पड़ेगी । उस नवजात का नाम भी रख दिया गया - बोझिला ।"

मंगेश -" बोझिला , यह क्या नाम हुआ ?"

बबलू - "जब मालकिन की तीन बेटियों का नाम जानोगे तो इसका मतलब समझ मे आएगा । बड़ी बेटी खुशी , दूसरी बेटी आशा और तीसरी बेटी निराशा । दूसरी बेटी अजय ठाकुर के मरने से पहले पैदा हुई थी लेकिन तीसरी उनके मारने के बाद पैदा हुई । इसलिए उसका नाम निराशा रखा गया । यह बेटी तो हर किसी के लिए बोझ लग रही है क्योंकि अब वंश वृक्ष नाउम्मीदी के दौर में प्रवेश कर रहा है।"

मंगेश - "यह सब नाम किसने रखा है ?"

बबलू - "विमला दीदी ने । अब उनका बेटा राहुल अपने नाना-नानी के आँखों का तारा बन गया है । आज की घटना के बाद तो उनकी उम्मीद भी धुंधलाने लगेगी।"

मंगेश - "लेकिन इसमे तुम्हारी मालकिन या उस मासूम बच्ची का क्या दोष है ?"

बबलू -" कभी-कभी बिना दोष के भी परिस्थितयां इंसान को गुनाहगार के घेरे में खड़ा कर देती हैं । आज अगर अजय ठाकुर जिंदा होते तो वारिश देने का एकतरफा दबाव मालकिन पर नही होता । वो तो विजय बाबू अपनी पत्नी को बहुत प्यार करते हैं नही तो उनकी माँ और बहन तो कब का इनकी दूसरी शादी कर देतीं । फिर भी विमला दीदी हमेशा ताने मरती है ।"

गुजरते वक्त के साथ मास्टर साहब, सासु माँ और विमला का व्यवहार बड़ी बहू के प्रति रूखा होने लगा । घर की बड़ी बहू होने के बावजूद उनकी अहमियत घटते हुए हासिए पर पहुँच गयी । घर के किसी भी बात में उनकी राय या सुझाव को अनसुना किया जाने लगा । अब उनका संबोधन बदल कर बोझिला की माँ हो गया । बोझिला ही बड़ी बहू के अस्तित्व का पहचान बन गयी है ।

हद तो तब हो गयी जब एक रोज यह फरमान सुनाया गया कि अगर अगली बार फिर बेटी पैदा हुई तो विजय की दूसरी शादी करवा दी जाएगी । बड़ी बहू यानी मृदुला को यह बात बहुत चुभ गयी जब उसके पति ने भी इस बात पर सहमती जताया। उसने अपने पति को एक सच्चे भारतीय नारी की तरह अपनाया था। मृदुला की खूबसूरती और शिक्षा के सामने विजय ठाकुर चाय काम पानी लगते हैं ।

लेकिन आज की घटना मृदुला को अंदर तक चुभ गयी । उसने निर्णय किया इसबार बेटा ही पैदा करूँगी और आपलोगों को वारिश दूँगी । लेकिन मुझे छोड़कर दूसरी शादी नही करने दूँगी।

बड़ी बहू मृदुला बनकर अपने बिस्तर में घुंसकर रोते हुए एक निर्णय पर पहुंचने का प्रयास करने लगी ।बायोलॉजी का स्टूडेंट होने के नाते उसको मालूम था कि संतान के लिंग निर्धारण मे X & Y क्रोमोजोम की अहम भूमिका होती है । औरत में केवल XX पाया जाता है और पुरुष में XY दोनो पाया जाता है । वैज्ञानिक तौर पर बेटा या बेटी पैदा होने में स्त्री की बिओलोजिकली कोई भूमिका नही होती है । पुरुष का X या Y जो भी जाकर स्त्री के X से मिलता है तो XX (लड़की) या XY(लड़का) पैदा होता है। उसको यह भी मालूम था कि औरत की फर्टिलिटी पॉसिबिलिटी कब हाई होती है । बोझिला जब एक साल की हो गयी तो मृदुला ने जिद मे आकर बबलू के साथ संबंध बनाया और गर्भवती हो गयी । पारिवारिक और सामाजिक अपमान से बचने के लिए उसने व्यक्तिगत नैतिकता से समझौता कर लिया। उसको पूरा विश्वास था कि इसबार उसको बेटा होगा ।

बड़ी बहू एकबार फिर गर्भवती थी ।लेकिन घर मे किसी मे कोई खास उत्साह नही था क्योंकि सबको उम्मीद था कि फिर बेटी ही होगी । अंदर ही अंदर सास ननद ने लड़की देखना शुरू कर दिया था क्योंकि बेटा पैदा नही होने पर विजय ठाकुर की दूसरी शादी होना तय था ।

सभी लोगो के अनुमान को दरकिनार करते हुए मृदुला ने सुंदर और स्वस्थ बेटा को जन्म दिया । घर मे होली दीपावली का सा उत्सव एकसाथ उतर गया । सब लोग इतने खुश हो गए की इसबार भी किसी को जमाता की खोज खबर लेने की सुध नही रही ।

बच्चे का नाम रोशन रखा गया । बोझिला का नाम बदलकर रोशनी रख दिया गया । सबलोग उसको लाड़ प्यार करने लगे कि वह अपने पीछे भाई लेकर आयी ।

लेकिन मृदुला अपने को बोझिला की ही माँ महसूसती क्योंकि उसका व्यक्तित्व मलिन हो गया था । इस खुशी और जीत मे वह नारी जाति की नैतिक हार देख रही थी और उस हार के लिए खुद को जिम्मेदार मान रही थी ।



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