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Ramashankar Roy 'शंकर केहरी'

Fantasy


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Ramashankar Roy 'शंकर केहरी'

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अकाय - पार्ट 17

अकाय - पार्ट 17

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घर पहुंचते ही राधा रिक्शा से उतरी किराया चुकाया और घर के अंदर चली गयी। पहले की बात होती तो राधा मुख्य सड़क पर ही रिक्शा छोड़ देती और दोनों बातें करते घर तक पैदल ही पहुँचते । इस मौके का लाभ लेने के लिए सत्यम कभी-कभी नुक्कड़ पर राधा के आने का इंतजार करता था। उस इंतजार का भी अलग आनंद था। काम कुछ नहीं होता लेकिन सतर्क व्यस्तता इतनी होती कि क्या कहने। किसी को मालूम नहीं होता कि वह क्यों खड़ा है लेकिन उसको लगता कई जोड़ी आँखें उसको ताड़ रही है, जैसे सबको मालूम हो कि वह क्या कर रहा है। अकाय सत्यम को वह दुविधा नहीं थी लेकिन राधा के हाथ मे हाथ डाल चलने की सुविधा भी नहीं थी। 

अब तो उस प्रेतरोधक पोटली के चलते घर के अंदर भी प्रवेश नहीं कर सकता था। उसके कष्ट का ज्ञान राधा को नहीं था । यदि ज्ञान होता तो पहले की तरह किसी बहाने से बाहर आकर जरूर मिलती। अब सत्यम अपनी गाय नानी की सेवा नहीं कर पा रहा था। अब तो उसको यह डर भी लगने लगा कि जब मेरी माँ बछिया के रूप में जन्म लेगी तो उसके सानिध्य से वंचित हो जाऊँगा । लेकिन उसको दूसरी तरफ इस बात का संतोष था कि शायद इन उपायों से राधा की माँ स्वस्थ हो जाए। साथ में उसको यह जानने में भी दिलचस्पी थी यह क्या चकर है और वो कौन सी प्रेतात्मा है जो इस घर को परेशान कर रहा है और उसके नजर से भी बचा हुआ है। संभवतः यह उसके अनुभवहीनता के कारण हो रहा हो।

वह अपने घर चला गया और शंका निवारण के लिए उसने इंस्पेक्टर रवि से बात करने का सोंचा। उसने रवि को संपर्क किया लेकिन वह नहीं आया। अब उसके पास रवि के आगमन का इंतजार के अतिरिक्त कोई उपाय नहीं बचा था। इंतजार करते करते कब वह सो गया उसको मालूम ही नहीं। 

रवि ने आकर उसको आवाज दिया तो उसकी तंद्रा टूटी। रवि ने पूछा "बोलो मुझे क्यों याद किया"? 

सत्यम - मुझे आप से काफी दिनों से मुलाकात नहीं हुई थी ।अतः आपसे मिलने का मन कर रहा था। इस बीच मेरे साथ कुछ ऐसा हुआ है जिसके बारे में आप की राय जननी थी। फिर उसने सारी बात उसको बताया , गाय नानी और बछिया माँ के बारे में बताया। अब राधा के घर में प्रवेश करने में होने वाली अवरोध के बारे में भी बताया।

सारी बातें जानने के बाद रवि ने कहा "मुझे लगता है किसी तांत्रिक ने उस घर को अभिमंत्रित कर चौकी मार दिया है। उस घर से तुम दूर ही रहो नहीं तो तुम उस तांत्रिक के चंगुल में फंस सकते हो ।"

सत्यम - आपकी बात सही है लेकिन मैं अपनी माँ को नए शरीर में अवतरण के सानिध्य और मुलाकात से वंचित नहीं होना चाहता। मेरी यही समस्या है इसमें आप मेरी क्या मदद कर सकते हैं।

रवि - देखो , आत्मा के अंतहीन यात्रा में हमेशा कोई न कोई समस्या रहती है, चाहे यात्रा अकाय की हो या सकाय की । लेकिन अभी तुमको कोई भी कदम सोच समझकर और सावधानीपूर्वक उठाना चाहिए।

मुझे एक कहानी याद आ रही है जो मैंने एक सत्संग में सुना था। एक आदमी हनुमान जी का परम भक्त था ।वह सच्चे मन से उनकी आराधना करता था ।लेकिन कोई न कोई समस्या उसको हमेशा घिरे रहती थी। उसने तंग आकर हनुमान जी से कहा " हे प्रभु अब मैं समस्या झेलने से ऊब चुका हूँ। यदि आप मेरी भक्ति से प्रसन्न हैं तो मुझे इससे निजात दिलाइए।"

हनुमान जी साक्षात प्रगट हुए और उन्होंने कहा कि मैं तुमको एक उपाय बताता हूँ। तुम अपनी सारी समस्या जिससे मुक्ति चाहते हो एक कागज पर लिखकर उसकी पोटली बनावो और दुखहरण वटवृक्ष पर लटका दो। तुमको उन सभी दुखों से मुक्ति मिल जाएगी। लेकिन एक शर्त है तुमको उस वटवृक्ष से कोई भी एक पोटली लेनी पड़ेगी। उस पोटली में दर्ज दुख तुम्हारा हो जाएगा। उस व्यक्ति ने अपनी सभी दुखों की सूची तैयार की और उसे एक पोटली में बांधकर उस वटवृक्ष के पास पहुँच गया। उसने देखा कि उस वृक्ष पर असंख्य पोटली लटकी हुई है - छोटी, बडी और बहुत बड़ी । उन पोटलियों को देखकर उसके मन में विचार आया यदि मैंने जिस पोटली को उठाया और उसमें लटकता दुख मेरे से भी बड़ा हुआ तो। एक अनजान मुसीबत गले लग जाएगी। तभी उसकी नजर एक छोटी पोटली पर गई। उसने सोचा उसमें कम दुःख होगा। तभी उसका मन सोचने लगा हो सकता है, उसकी एक ही समस्या हो लेकिन बहुत गंभीर हो तो वह बुरा फंसेगा। अतः वह अपनी पोटली को उस दुख हरण वटवृक्ष पर नहीं लटकाया और हनुमान जी से प्रार्थना किया कि प्रभु मुझे अपने दुखों की पोटली किसी से नहीं बदलनी क्योंकि मैं उनको अच्छे से जानता हूँ। आपकी कृपा से उनसे पार पाने का प्रयास करूंगा लेकिन अदला बदली नहीं करूंगा। मेरे सुख दुःख मेरे हैं और उन्होंने ही मुझे बनाया है। अंजानी दुख के बदले अपने परिचित दुःख को दांव पर लगाने की गलती नहीं करूंगा।


सत्यम - आपके इस कहानी का अभिप्राय मैं समझ नहीं पाया । इसमें मेरे लिए क्या उपदेश या संकेत है?

रवि ने मुस्करा कर कहा प्रत्येक व्यक्ति को पड़ोसन अपनी बीबी से अच्छी लगती है क्योंकि उसको वह समग्र रूप में नहीं जानता। लेकिन अपनी समस्या बड़ी लगती है क्योंकि आप उसके हर पहलू को अच्छी तरह से जानते हैं। जितना मैं तुम्हारी बातों से समझ पाया हूँ उस गाय के पेट से जो बछिया पैदा होगी वह तुम्हारी माँ का गायावतार होगा। किसी तांत्रिक ने वहाँ चौकी मार दिया है जिसके चलते तुम्हारा या किसी भी भूतात्मा का प्रवेश निषेध हो गया है। यही समस्या है। यदि तुमने किसी प्रकार की कुचेष्टा किया तो हो सकता है वह तुमको अपने कब्जे में कर ले या तुमको भारी नुकसान पहुँचा दे। 

तुम अभी इंतजार करो क्योंकि किसी भी अभिमंत्रित घेराबंदी की एक समय सीमा होती है। हमलोग उस जगह पर पैनी नजर रखेंगे । लेकिन तुम कोई भी ऐसी गलती मत करना जिससे वहां पर तुम्हारी उपस्थिति का उस तांत्रिक को आभास हो। जहाँ तक मेरी समझ है वह बहुत बड़ा वाला तांत्रिक है। तुम कुछ समय के लिए उस परिक्षेत्र से दूर रहो। क्योंकि उसने वहाँ पर अपने खबरी को नियुक्त किया होगा। यदि उसको उस घर मे तुम्हारी दिलचस्पी का कारण पता चल गया तो वह तुमको ब्लैकमेल भी कर सकता है। मैं तुम्हारे साथ चलकर उस क्षेत्र का मुआयना करता हूँ। शायद कुछ सुराग हाथ लग जाए।

उस घर में कोई है जो अक्सर बीमार रहता है और उसपर दवा का कोई खास असर नहीं पड़ता है?

सत्यम- हाँ , राधा की माँ अक्सर बीमार रहती है। लगता है मेरे मरने के बाद से उनकी बीमारी कुछ ज्यादा ही बढ गयी है।

वैसे आप बहुत दिनों तक गायब रहे ,कहाँ चले गए थे?

बड़े ही उदास स्वर में रवि ने कहा "मैं अपनी बेटी के साथ दिल्ली चला गया था। वहां जाने पर ज्ञात हुआ कि करोना कि दूसरी लहर में मेरे बेटे की मौत हो गयी थी। उसका परिवार अभी बहुत ही संकट से गुजर रहा है। बेटी का देवर भी गुजर गया और पति की नौकरी चली गयी है।"

सत्यम - इस महामारी में शायद ही कोई ऐसा होगा जिसने अपने या अपने परिचित में किसी को नहीं खोया हो। इसके लिए सरकार की नाकामी ज्यादा जिम्मेदार है या लोगों की लापरवाही कहना कठिन है। हम लोग तो जिस अवस्था में हैं उसमें ना ही कुछ कह सकते हैं ना ही कुछ कर सकते हैं। लेकिन जो लोग जिंदा है उनको तो अपनी सरकार और समाज को जिंदा होने का एहसास कराना चाहिए।

रवि - तुम्हारी बात अपनी जगह पर सही है। लेकिन कभी कभी ऐसी परिस्थिति आ जाती है कि आप पूर्णतः असहाय हो जाते हैं और जो घट रहा है उसका साक्षी बनने के अतिरिक्त कुछ नहीं कर सकते । यह वही दौर है। आज की सरकार तो काफी मुस्तैद और प्रयत्नशील है वरना परिणाम और भयावह होता । यदि अकाय दुनिया मे भी सेंसस की व्यवस्था होती तो यह काल जनसंख्या विस्फोट का काल कहा जाता। इस बारे में तुम्हारे यमदूत जी बेहतर बता सकते हैं।

फिर दोनों वहाँ से निकल कर राधा के घर की तरफ बढ़ गए। रवि ने सत्यम को सावधान और सतर्क रहने को कहा ताकि तांत्रिक के खबरी की नजर उनपर नहीं पड़े। सत्यम को उतनी समझ नहीं थी लेकिन उसको रवि के अनुभव और समझदारी पर भरोसा था।

रात का अंधेरा सिमटने लगा था ।वातावरण एकदम शांत था। सुबह की ठंडी बयार बह रही थी। निशाचर अपने ठिकानों के तरफ लौट रहे थे और दिनचर भी बिस्तर में करवट बदलने लगे थे। सूर्योदय से पहले जगने वाले पंछियों ने इक्का दुक्का कलरव करना शुरू कर दिया था।

 रवि और सत्यम ने सावधानीपूर्वक राधा के घर का निरीक्षण किया।

फिर बगल वाली छत पर एक कोने पर दोनों बैठ गए। वहां से उस मकान के कोने कोने पर नजर रखी जा सकती थी। धीरे धीरे पंछी का चहकना और मंडराना तेज होने लगा। कुछ गौरैया और कबूतर राधा के बैकयार्ड में उतर कर दाना चुनने लगे। अभी तक सत्यम को कुछ भी अस्वाभाविक नहीं दिखा और उसको ऊब सी होने लगी। तभी रवि ने एक कौआ के तरफ इसारा करके कहा इस पर तुम नजर जमाए रहो । मुझे यही तांत्रिक का खबरी लग रहा है।"

सत्यम ने भी इशारों में ही पूछा ऐसा क्या खास है इसमें जिससे तुमको ऐसा लग रहा है!

 रवि - यह बात तुमको नहीं समझ आएगी। यह पुलिस की नजर है जो अपने शिकार को फौरन ताड़ लेती हैं।

देखो दूसरे सब पंछी राधा के हाते में उतर रहे हैं उसके मुंडेर पर भी बैठ रहे हैं। वहां से उड़कर दूर भी निकल जा रहे हैं। लेकिन यह उसके आंगन में नहीं उतर रहा है ,उसके घर के मुंडेर पर भी नहीं बैठ रहा है। केवल उसके घर का चक्कर लगा रहा है। तुम ध्यान रखना यह एक भी दाना नहीं चुगेगा लेकिन हमेशा सतर्क और सावधान मुद्रा में रहना। इसके अतिरिक्त कोई भी दुसरा कुछ भी संदिग्ध दिखेगा तो बताता हूँ।

सत्यम उस कौआ के ऊपर लगातार नजर बनाए हुए था। उसने इस बात का ख्याल रखा की वह उसके नजर में नहीं आए। रवि के कहने के बाद से वह उस कौआ का व्यवहार उसको अस्वाभाविक लगने लगा। पूरा दिन दोनों का छुप छुपकर उस कौआ के निगरानी में निकल गया । जब शाम ढलने लगी तो रवि ने सत्यम से कहा जिस भी तांत्रिक ने इस घर को घेरा किया है वह बहुत ही ताकतवर है ।उसने मुख्य दरवाजे पर भी एक पहरेदार बैठा रखा है। वह एक छिपकली है। किसी को भी उसपर शक भी नहीं होगा। मुझे ऐसा लगता है उसको संदेह हो गया है कि कोई भूतात्मा ने उसके बंधन के बाद प्रवेश की कोशिश की थी।

फिर सत्यम ने कहा कि "जब वह अंदर नहीं जा पा रहा था तो उसने रामु के शरीर में प्रवेश कर अंदर जाने का प्रयास किया था। कॉल बेल बजाते ही जोर का झटका लगा और वह गिर गया था। उसके गिरते ही मैंने उसका शरीर छोड़ दिया था।"

रवि ने कहा वही मैं सोच रहा था कि उस तांत्रिक ने इतना जबरदस्त पहरा क्यों बैठाया है। अब हम लोगों को उस बंधन के हटने तक इंतजार ही करना पड़ेगा।

सत्यम - हमलोगों को कैसे पता चलेगा कि अब बंधन हट गया ।

रवि - हमलोगों को सुरक्षित दूरी से इस घर पर नजर रखना पड़ेगा। उस छिपकली का उस दरवाजे से हटना हमलोगों के लिए संकेत होगा कि बंधन खुल गया है। मेरा अपना अनुभव यही कह रहा है कि यह उस दिन ही होगा जब वह तांत्रिक आएगा। उसकी नजर से तुम्हें खुद को बचाना पड़ेगा।

मैं तो यह सोंच रहा हूँ आखिर इस घर के अंदर उसको क्या मिला है या दिखा है जिसको नियंत्रण में करने के लिए उसने इतना सख्त पहरा बैठाया है।


क्रमशः --------


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